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अपराजिता कार्यक्रम : बेटियां बोली, समाज कमतर ना समझे हमको, हर पग पर लाएंगी खुशियां

Sat, 25 Jan 2020 12:03 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jan 2020 12:03 AM IST
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Aprajita programme : Girl said, do not think less will bring us happiness on  every stap
फतेहाबाद के आर्यभट्ट पब्लिक स्कूल में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित संवाद कार्यक्रम में बे? - फोटो : Fatehabad
समाज अक्सर बेटियों को बेटों से कमतर समझता आया है लेकिन अब समाज को भी ये समझना होगा कि बेटी है तो कल है, बेटियां हैं तो समाज में निरतंरता है। ये सार है बालिका दिवस पर ‘अमर उजाला फाउंडेशन’ द्वारा अपराजिकता कार्यक्रम के तहत आर्य भट्ट पब्लिक स्कूल में करवाए संवाद कार्यक्रम का। संवाद कार्यक्रम में शिरकत करने वाली बेटियों ने साफ तौर पर कहा कि समाज बेटियों को कमतर ना समझे, हम बेटियां अब हर कदम पर अपने आप को साबित करती आई हैं और हमारे हर पग पर खुशियां आती हैं।
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‘हम खुशकिस्मत हैं कि हमारे अभिभावकों ने हमें बेहतर शिक्षा के लिए स्कूल भेजा, लेकिन दुख होता है जब ये सामने आता है कि कुछ बेटियां अभी भी लिंग भेदभाव के चलते शिक्षा तो दूर, जीने तक का अधिकार हासिल नहीं कर पाती और कोख में ही दम तोड़ देती हैं।’ वर्षा, छात्रा।
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‘शिक्षा ग्रहण करने के बाद कुछ ऐसा करना चाहती हूं कि समाज के लिए एक उदाहरण बनकर सामने आऊं कि बेटियां ही हमारी खुशियों का सार हैं।’ दिव्या, छात्रा।
‘बेटी दिवस पर मेरी तो बस यही इच्छा है कि बेटा-बेटी में कोई भेदभाव नहीं रहे। ना जन्म से पहले और ना ही जन्म के बाद। अगर ऐसा होता है तो समाज सही मायनों में एक आदर्श समाज के रूप में स्थापित होगा। इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने घर से शुरूआत करनी होगी। तभी सही मायनों में इसे एक स्वच्छ आंदोलन के रूप में खड़ा किया जा सकेगा।’ -अरू, छात्रा।
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‘बेटियां हमेशा कम से कम दो घरों के बीच में सेतु का काम करती हैं। ऐसे में ये सेतु इतना मजबूत तभी हो सकेगा, जब बेटियां शिक्षित एवं अपने पैरों पर खड़े होने लायक होंगी। बेटियां समाज की निरंतरता का प्रतीक हैं।’ -पूनम, छात्रा।

‘बालिका दिवस मनाने की जरूरत ही इसलिए आन पड़ी है कि समाज के एक हिस्से में आज भी बेटियों को बोझ समझा जाता रहा है। ऐसे में सबसे पहले तो इस सोच को ठीक करने की आवश्यकता है। जब समाज के एक तबके की सोच सकारात्मक हो जाएगी, बेटियों को निर्बल कहने या समझने की जरूरत भी समाप्त हो जाएगी।’ -गुंजन, छात्रा।
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