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Fatehabad News: लॉकडाउन में आए आइडिया ने ज्योति को दिखाई प्रगति की राह
Sun, 16 Mar 2025 11:17 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sun, 16 Mar 2025 11:17 PM IST
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फतेहाबाद में कैंचुआ खाद की जानकारी देती हुई गांव ढिंगसरा निवासी प्रगतिशील किसान ज्योति
फतेहाबाद/रतिया। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार में आयोजित कृषि मेले में गांव ढिंगसरा की प्रगतिशील किसान ज्योति जाखड़ और गांव नंगल के सतीश को सम्मानित किया जाएगा। गांव ढिंगसरा की ज्योति ने केंचुआ खाद को लेकर उपलब्धि हासिल की है।
कोरोना काल के बाद ज्योति ने घर पर ही केंचुआ खाद बनाना शुरू किया। अब एक एकड़ में पति धर्मवीर के साथ मिलकर केंचुआ खाद तैयार कर रहे है और अच्छी आमदनी हो रही है। यही नहीं केंचुआ खाद को लेकर किसानों को जागरूक भी कर रहे हैं। प्रगतिशील किसान ज्योति व उनके पति धर्मवीर ने बताया कि कोरोनाकाल में लोग स्वास्थ्य को लेकर चिंतित थे और ऑर्गेनिक खेती के बारे में सोच रहे थे।
इस दौरान उनके मन में केंचुआ खाद तैयार करने का आइडिया आया। तब उन्होंने अपने गांव ढिंगसरा में केंचुआ खाद बनाने पर काम शुरू किया। वर्ष 2021 में घर पर ही कुछ बैग में केंचुआ खाद तैयार किए। उनका प्रयोग सफल रहा। इसके बाद एक एकड़ जमीन गांव कुम्हारिया में साझेदारी पर लेकर यूनिट लगाई। जो पिछले तीन साल से सही चल रही है। करीब 40 फीसदी आमदनी हो रही है।
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ऐसे तैयार करते हैं खाद
ज्योति के पति धर्मवीर जाखड़ का कहना है कि केंचुआ खाद को तैयार करने के लिए वह गोशाला से गोबर लेते हैं। 25 से 30 दिन तक इसमें पानी डालकर गैस निकाली जाती है और ठंडा किया जाता है। इसके बाद बेड लगाकर इसमें केंचुआ की ऑस्ट्रेलियन ब्रीड छोड़ दी जाती है। करीब तीन से चार माह में पूरी प्रक्रिया के बाद खाद तैयार होती है। केंचुआ खाद आसपास के जिलों में सप्लाई हो रही है।
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देसी गाय के गोमूत्र, गोबर और लस्सी के स्प्रे से ऑर्गेनिक खेती से लाखों कमा रहे हैं सतीश
नंगल ढाणी के सतीश कंबोज प्राकृतिक खेती से एक विकसित किसान के नाम से क्षेत्र में विख्यात हैं। सतीश कंबोज ने अपनी 22 एकड़ जमीन में 7 एकड़ में प्राकृतिक खेती से फसल तैयार कर रहे हैं वहीं अन्य 15 एकड़ में वह उन्नत किस्म के बीज तैयार करके क्षेत्र के किसानों को प्राकृतिक खेती के द्वारा फैसले उगाने को प्रोत्साहित कर रहे हैं। सतीश कंबोज की ऑर्गेनिक खेती को लेकिन इससे पहले भी भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा दिल्ली के कृषि वैज्ञानिकों ने गांव नंगल ढाणी में पहुंचकर गेहूं के खेतों का निरीक्षण किया था और उन्हें दिल्ली में सम्मानित भी किया गया था। इसके अलावा करनाल और हिसार में भी सतीश कंबोज अपनी उन्नत तकनीक की फसल को लेकर कई बार सम्मानित हो चुके हैं। सतीश कंबोज ने बताया कि बिना खाद के वह प्राकृतिक खेती के माध्यम से देसी गाय का गोमूत्र गोबर और लस्सी की स्प्रे का खेतों में छिड़काव कर लहसुन, हल्दी सहित अन्य सब्जियों को उग रहे हैं। विशेष आरएस 1 किस्म की गेहूं की बिजाई की गई है जो कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद साबित होगी। उन्होंने कहा कि वह ऑर्गेनिक खेती को लेकर विशेष किस्म के बीज राइडर सीडर के द्वारा तैयार करवा रहे हैं जो कम जगह में ज्यादा बीज तैयार होते हैं। कम लागत के साथ अधिक फसल और अधिक बचत होती है। सतीश ने बताया कि ऑर्गेनिक खेती और उन्नत किस्म के बीज तैयार करके वह अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे है तथा उनकी फसल से लोगों की सेहत को भी काफी फायदा होगा।
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कोरोना काल के बाद ज्योति ने घर पर ही केंचुआ खाद बनाना शुरू किया। अब एक एकड़ में पति धर्मवीर के साथ मिलकर केंचुआ खाद तैयार कर रहे है और अच्छी आमदनी हो रही है। यही नहीं केंचुआ खाद को लेकर किसानों को जागरूक भी कर रहे हैं। प्रगतिशील किसान ज्योति व उनके पति धर्मवीर ने बताया कि कोरोनाकाल में लोग स्वास्थ्य को लेकर चिंतित थे और ऑर्गेनिक खेती के बारे में सोच रहे थे।
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इस दौरान उनके मन में केंचुआ खाद तैयार करने का आइडिया आया। तब उन्होंने अपने गांव ढिंगसरा में केंचुआ खाद बनाने पर काम शुरू किया। वर्ष 2021 में घर पर ही कुछ बैग में केंचुआ खाद तैयार किए। उनका प्रयोग सफल रहा। इसके बाद एक एकड़ जमीन गांव कुम्हारिया में साझेदारी पर लेकर यूनिट लगाई। जो पिछले तीन साल से सही चल रही है। करीब 40 फीसदी आमदनी हो रही है।
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ऐसे तैयार करते हैं खाद
ज्योति के पति धर्मवीर जाखड़ का कहना है कि केंचुआ खाद को तैयार करने के लिए वह गोशाला से गोबर लेते हैं। 25 से 30 दिन तक इसमें पानी डालकर गैस निकाली जाती है और ठंडा किया जाता है। इसके बाद बेड लगाकर इसमें केंचुआ की ऑस्ट्रेलियन ब्रीड छोड़ दी जाती है। करीब तीन से चार माह में पूरी प्रक्रिया के बाद खाद तैयार होती है। केंचुआ खाद आसपास के जिलों में सप्लाई हो रही है।
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देसी गाय के गोमूत्र, गोबर और लस्सी के स्प्रे से ऑर्गेनिक खेती से लाखों कमा रहे हैं सतीश
नंगल ढाणी के सतीश कंबोज प्राकृतिक खेती से एक विकसित किसान के नाम से क्षेत्र में विख्यात हैं। सतीश कंबोज ने अपनी 22 एकड़ जमीन में 7 एकड़ में प्राकृतिक खेती से फसल तैयार कर रहे हैं वहीं अन्य 15 एकड़ में वह उन्नत किस्म के बीज तैयार करके क्षेत्र के किसानों को प्राकृतिक खेती के द्वारा फैसले उगाने को प्रोत्साहित कर रहे हैं। सतीश कंबोज की ऑर्गेनिक खेती को लेकिन इससे पहले भी भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा दिल्ली के कृषि वैज्ञानिकों ने गांव नंगल ढाणी में पहुंचकर गेहूं के खेतों का निरीक्षण किया था और उन्हें दिल्ली में सम्मानित भी किया गया था। इसके अलावा करनाल और हिसार में भी सतीश कंबोज अपनी उन्नत तकनीक की फसल को लेकर कई बार सम्मानित हो चुके हैं। सतीश कंबोज ने बताया कि बिना खाद के वह प्राकृतिक खेती के माध्यम से देसी गाय का गोमूत्र गोबर और लस्सी की स्प्रे का खेतों में छिड़काव कर लहसुन, हल्दी सहित अन्य सब्जियों को उग रहे हैं। विशेष आरएस 1 किस्म की गेहूं की बिजाई की गई है जो कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद साबित होगी। उन्होंने कहा कि वह ऑर्गेनिक खेती को लेकर विशेष किस्म के बीज राइडर सीडर के द्वारा तैयार करवा रहे हैं जो कम जगह में ज्यादा बीज तैयार होते हैं। कम लागत के साथ अधिक फसल और अधिक बचत होती है। सतीश ने बताया कि ऑर्गेनिक खेती और उन्नत किस्म के बीज तैयार करके वह अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे है तथा उनकी फसल से लोगों की सेहत को भी काफी फायदा होगा।