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Fatehabad News: सख्त हुआ प्रशासन, पराली जलाने वाले किसान पर केस दर्ज
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गांव मिराना के खेत में पराली में लगी आग को बुझाते कृषि विभाग के कर्मचारी।
फतेहाबाद। लगातार जागरूकता और जुर्माना लगाने के बाद भी पराली की आग नहीं रुकी तो अब प्रशासन ने सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इस बार धान के सीजन में पराली जलाने वाले किसान के खिलाफ पहली एफआईआर दर्ज कर ली गई है। शनिवार को सदर थाना फतेहाबाद पुलिस ने गांव भड़ोलांवाली में पराली की गांठों को आग लगाने के मामले में किसान गगी सिंह पर केस दर्ज किया है। जिले में शनिवार को भी आठ स्थानों पर पराली जलाई गई, यह पराली रतिया व फतेहाबाद क्षेत्र में जली है। इस तरह पराली जलाने के मामले बढ़कर 499 तक पहुंच गए हैं। पराली जलाने के मामले में पुलिस को गांव भड़ोलांवाली के ही किसान ठंडीराम ने गगी सिंह के खिलाफ शिकायत दी है। ठंडीराम ने बताया कि उसने अपने खेत में करीब डेढ़ एकड़ पराली पशुओं को चराने के लिए इकट्ठा करके नहर की पटरी के पास सरकारी जगह पर रखी थी। शनिवार दोपहर करीब तीन बजे गांव के ही गगी सिंह ने इस पराली को आग लगा दी। जब उसने रोका तो आरोपी ने उससे गाली गलौच किया। सदर पुलिस ने ठंडीराम की शिकायत पर गगी के खिलाफ धारा 144 का उल्लंघन करने, पर्यावरण प्रदूषण बढ़ाने व आगजनी करने के आरोप में केस दर्ज किया है। जिले में अब तक 274 किसानों को सात लाख 14 हजार 500 रुपये का जुर्माना किया जा चुका है। पराली जलाने की लोकेशन लगातार आ रही हैं और कृषि विभाग के अधिकारियों के अलावा सभी थानाध्यक्ष भी अपने-अपने क्षेत्र में पराली बुझाने के प्रयासों में जुटे हैं।
फतेहाबाद में 45 हजार एकड़ में अभी भी धान, कैसे निकलेगा पराली का समाधान
पराली जलाने के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। अब तक जिले में 499 स्थानों पर पराली में आग लगाने की लोकेशन आ चुकी है। जिले में अभी भी करीब 45 हजार एकड़ पर धान की फसल खड़ी है और लगातार धान की कटाई हो रही है। गेहूं बिजाई का सीजन अंतिम समय की ओर चल रहा है, ऐसे में प्रशासन के जागरूकता अभियान को दरकिनार कर लगातार पराली जला रहे हैं। आने वाले जिस प्रकार से जिले में पराली जल रही है, उससे लगता है कि यह पिछले साल जली पराली के मामलों के आकड़ों नजदीक पहुंच जाएगा।
बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में दोबारा हुई थी धान की रोपाई
जिले में बाढ़ आने के बाद रतिया, टोहाना, फतेहाबाद, जाखल व कुलां में करीब एक लाख एकड़ में दोबारा से धान की रोपाई की गई थी। इसमें से लगभग 55 हजार धान की फसल की कटाई हो चुकी है, लेकिन अभी भी 45 हजार एकड़ में धान खड़ी है। धान की कटाई पूरी होने में लगभग एक सप्ताह लगेगा, ऐसे में पराली जलाने के मामलों में बढ़ोतरी होना लाजिमी है। क्योंकि गेहूं की बिजाई का सीजन अपने पीक पर है, ऐसे में किसान जल्द से जल्द धान काटकर, गेहूं की बिजाई में जुटेंगे।
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शनिवार को इन गांवों में जली पराली
-अहरवां में दो जगह
- बीराबदी
- भिरड़ाना
- चुहड़पुर
- हिजरावां खुर्द
- मामुपुर
- नड़ेल
कोट
कृषि अधिकारियों के साथ-साथ पुलिस प्रशासन भी पराली जलाने के मामलों को रोकने में जुटा हुआ है। किसानों को साफ कहा गया है कि अगर वह पराली जलाएंगे तो उनको सरकार से मिलने वाली सभी प्रकार की सब्सिडी भी मिलना बंद हो सकती है।
-डॉ. राजेश सिहाग, डीडीए फतेहाबाद।
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फतेहाबाद में 45 हजार एकड़ में अभी भी धान, कैसे निकलेगा पराली का समाधान
पराली जलाने के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। अब तक जिले में 499 स्थानों पर पराली में आग लगाने की लोकेशन आ चुकी है। जिले में अभी भी करीब 45 हजार एकड़ पर धान की फसल खड़ी है और लगातार धान की कटाई हो रही है। गेहूं बिजाई का सीजन अंतिम समय की ओर चल रहा है, ऐसे में प्रशासन के जागरूकता अभियान को दरकिनार कर लगातार पराली जला रहे हैं। आने वाले जिस प्रकार से जिले में पराली जल रही है, उससे लगता है कि यह पिछले साल जली पराली के मामलों के आकड़ों नजदीक पहुंच जाएगा।
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बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में दोबारा हुई थी धान की रोपाई
जिले में बाढ़ आने के बाद रतिया, टोहाना, फतेहाबाद, जाखल व कुलां में करीब एक लाख एकड़ में दोबारा से धान की रोपाई की गई थी। इसमें से लगभग 55 हजार धान की फसल की कटाई हो चुकी है, लेकिन अभी भी 45 हजार एकड़ में धान खड़ी है। धान की कटाई पूरी होने में लगभग एक सप्ताह लगेगा, ऐसे में पराली जलाने के मामलों में बढ़ोतरी होना लाजिमी है। क्योंकि गेहूं की बिजाई का सीजन अपने पीक पर है, ऐसे में किसान जल्द से जल्द धान काटकर, गेहूं की बिजाई में जुटेंगे।
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शनिवार को इन गांवों में जली पराली
-अहरवां में दो जगह
- बीराबदी
- भिरड़ाना
- चुहड़पुर
- हिजरावां खुर्द
- मामुपुर
- नड़ेल
कोट
कृषि अधिकारियों के साथ-साथ पुलिस प्रशासन भी पराली जलाने के मामलों को रोकने में जुटा हुआ है। किसानों को साफ कहा गया है कि अगर वह पराली जलाएंगे तो उनको सरकार से मिलने वाली सभी प्रकार की सब्सिडी भी मिलना बंद हो सकती है।
-डॉ. राजेश सिहाग, डीडीए फतेहाबाद।