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Fatehabad News: छोटे प्रयास से बड़ी उड़ान, गीता ने शहद से संवारी अपनी दुनिया

Tue, 06 Oct 2026 10:29 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Tue, 06 Oct 2026 10:29 PM IST
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A small effort leads to a soaring flight; Geeta has shaped her world with honey
समैन। ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से लगाई गई प्रदर्शनी में शहद बेचती गीता देवी। फाइल फोटो
भूना/समैन। स्वयं सहायता समूह से जुड़कर गांव बोस्ती की गीता देवी ने मधुमक्खी पालन को अपनी आजीविका का साधन बनाया। पति के साथ 12 मधुमक्खी बक्सों से शुरू किया काम आज करीब 500 बक्सों तक पहुंच गया है। उनके शहद की बिक्री देश के विभिन्न हिस्सों में होती है।
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हर साल करीब 10 से 12 लाख रुपये मूल्य का शहद विदेशों में निर्यात किया जाता है। गीता देवी ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गांव की महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने करीब 10 से 12 समूहों के गठन में सहयोग किया। इनमें से एक कोमल महिला स्वयं सहायता समूह की वह सदस्य बनीं।
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समूह में 10 महिलाएं हैं। समूह को करीब एक लाख रुपये की सहायता मिली। प्रत्येक सदस्य को आजीविका गतिविधि शुरू करने के लिए 10 हजार रुपये दिए गए। समूह की अन्य महिलाओं ने सैलून, किराना दुकान और कपड़ों से जुड़े छोटे व्यवसाय शुरू किए। गीता देवी ने पति चौधरी चरण सिंह के साथ मधुमक्खी पालन शुरू किया।
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जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुरेश कुमार ने कहा कि गीता देवी की सफलता ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है। आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण, परिवार के सहयोग और निरंतर मेहनत से उन्होंने 12 बक्सों से शुरू किए कारोबार को करीब 500 बक्सों तक पहुंचाया। इस दौरान उन्होंने अपने व्यवसाय के साथ रोजगार के अवसर भी पैदा किए हैं।
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बी-पोलन और बी-वैक्स का भी करते हैं उत्पादन
उनका व्यवसाय केवल शहद उत्पादन तक सीमित नहीं है। वह बी-पोलन और बी-वैक्स का भी उत्पादन करती हैं। सरसों के फूलों से तैयार शहद उनके व्यवसाय का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से मेलों और प्रदर्शनियों में लगाए जाने वाले स्टॉलों पर गीता देवी स्वयं पहुंचती हैं। वह उत्पादों की बिक्री और स्टॉल संचालन की जिम्मेदारी संभालती हैं। इससे उन्हें ग्राहकों तक सीधे पहुंचने और बाजार की मांग समझने का अवसर मिलता है। वह गांव की अन्य महिलाओं को भी स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती हैं।

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12 बक्सों से शुरू किया कारोबार
चौधरी चरण सिंह ने चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार से मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण लिया था। उनके अनुभव और मार्गदर्शन से गीता देवी ने भी इस काम को आगे बढ़ाया। दोनों ने 12 बक्सों से कारोबार शुरू किया। लगातार मेहनत, अनुभव और बाजार की मांग को समझते हुए उन्होंने कारोबार का विस्तार किया। आज उनके पास करीब 500 मधुमक्खी बक्से हैं। मौसम और फूलों की उपलब्धता के अनुसार मधुमक्खियों की कॉलोनियों को अलग-अलग राज्यों में ले जाया जाता है। इससे विभिन्न फसलों और फूलों से अलग-अलग प्रकार का शहद तैयार होता है। वर्तमान में उनके साथ तीन से चार प्रशिक्षित मधुमक्खी पालक नियमित रूप से काम करते हैं। अन्य कार्यों में करीब पांच से छह श्रमिकों को रोजगार मिल रहा है।
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