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Fatehabad News: जिले में एग्रीस्टैक के तहत 3.68 लाख किसानों का पंजीकरण होगा
Tue, 30 Dec 2025 11:04 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Tue, 30 Dec 2025 11:04 PM IST
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कृषि और राजस्व विभाग के अधिकारियों की समीक्षा बैठक लेते उपायुक्त डा. विवेक भारती। सूचना विभाग
फतेहाबाद। जिले में किसान रजिस्ट्री एग्रीस्टैक के अंतर्गत 3 लाख 68 हजार किसानों का पंजीकरण ओटीपी आधारित आधार प्रमाणीकरण से किया जाएगा। इस प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से उपायुक्त डॉ. विवेक भारती ने मंगलवार को अपने कार्यालय में कृषि, राजस्व तथा सूचना एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की।
उपायुक्त डॉ. विवेक भारती ने स्पष्ट किया कि एग्रीस्टैक को पीएम-किसान समेत अन्य लाभार्थी योजनाओं से जोड़ा जाएगा, जिससे किसानों तक सरकारी लाभ लक्षित और पारदर्शी तरीके से पहुंच सकें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपसी समन्वय के साथ पंजीकरण कार्य को प्राथमिकता दें और किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो।
उन्होंने बताया कि एग्रीस्टैक कृषि क्षेत्र के लिए एक व्यापक डिजिटल इकोसिस्टम है, जिसका उद्देश्य किसानों का समग्र डेटाबेस तैयार करना है। इस डेटाबेस में किसान की पहचान, भूमि रिकॉर्ड, आय, ऋण स्थिति, फसल विवरण और बीमा इतिहास जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां सुरक्षित रूप से दर्ज होंगी। इससे योजनाओं का लाभ किसानों तक तेजी और सरलता से पहुंचाया जा सकेगा।
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उपायुक्त ने बताया कि जिले में पंजीकरण कार्य शुरू हो चुका है। प्रत्येक तहसील में प्रतिदिन अधिक से अधिक गांवों को कवर करने के निर्देश दिए गए हैं। कृषि और राजस्व विभाग की टीमें अपने-अपने क्षेत्रों में समयबद्ध तरीके से पंजीकरण पूरा करेंगी, ताकि कोई भी पात्र किसान इस प्रक्रिया से वंचित न रहे।
एग्रीस्टैक के लाभों पर विस्तार से चर्चा करते हुए उपायुक्त ने कहा कि केंद्र सरकार की मंशा किसानों के लिए सेवाओं, सब्सिडी, ऋण और बाजार तक पहुंच को सरल बनाना है। इसी उद्देश्य से डिजिटल और केंद्रीकृत कृषि डेटा प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है। पंजीकृत किसानों के लिए विभिन्न सेवाओं के एकीकरण और लाभों की पारदर्शी डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षित एपीआई प्रणाली लागू की गई है।
उन्होंने बताया कि भूमि और आय से जुड़े सत्यापित आंकड़ों के आधार पर बैंक और वित्तीय संस्थान कम कागजी औपचारिकताओं के साथ किसान क्रेडिट कार्ड और कृषि ऋण शीघ्र स्वीकृत कर सकेंगे। समय पर ऋण मिलने से किसान बीज, खाद, कीटनाशक और अन्य कृषि इनपुट की लागत को आसानी से प्रबंधित कर पाएंगे।
फसल बीमा योजनाओं, विशेषकर पीएमएफबीवाई, में नामांकन की प्रक्रिया भी सरल हो सकेगी। भूमि, फसल और मौसम से जुड़ा डेटा पहले से डिजिटल रूप में उपलब्ध रहने से बीमा दावों का सत्यापन और भुगतान तेजी से किया जा सकेगा। बैठक में एसडीएम राजेश कुमार, जिला राजस्व अधिकारी श्याम लाल, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. राजेश सिहाग, डीआईओ सिकंदर सहित कृषि और राजस्व विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।
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उपायुक्त डॉ. विवेक भारती ने स्पष्ट किया कि एग्रीस्टैक को पीएम-किसान समेत अन्य लाभार्थी योजनाओं से जोड़ा जाएगा, जिससे किसानों तक सरकारी लाभ लक्षित और पारदर्शी तरीके से पहुंच सकें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आपसी समन्वय के साथ पंजीकरण कार्य को प्राथमिकता दें और किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो।
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उन्होंने बताया कि एग्रीस्टैक कृषि क्षेत्र के लिए एक व्यापक डिजिटल इकोसिस्टम है, जिसका उद्देश्य किसानों का समग्र डेटाबेस तैयार करना है। इस डेटाबेस में किसान की पहचान, भूमि रिकॉर्ड, आय, ऋण स्थिति, फसल विवरण और बीमा इतिहास जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां सुरक्षित रूप से दर्ज होंगी। इससे योजनाओं का लाभ किसानों तक तेजी और सरलता से पहुंचाया जा सकेगा।
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उपायुक्त ने बताया कि जिले में पंजीकरण कार्य शुरू हो चुका है। प्रत्येक तहसील में प्रतिदिन अधिक से अधिक गांवों को कवर करने के निर्देश दिए गए हैं। कृषि और राजस्व विभाग की टीमें अपने-अपने क्षेत्रों में समयबद्ध तरीके से पंजीकरण पूरा करेंगी, ताकि कोई भी पात्र किसान इस प्रक्रिया से वंचित न रहे।
एग्रीस्टैक के लाभों पर विस्तार से चर्चा करते हुए उपायुक्त ने कहा कि केंद्र सरकार की मंशा किसानों के लिए सेवाओं, सब्सिडी, ऋण और बाजार तक पहुंच को सरल बनाना है। इसी उद्देश्य से डिजिटल और केंद्रीकृत कृषि डेटा प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है। पंजीकृत किसानों के लिए विभिन्न सेवाओं के एकीकरण और लाभों की पारदर्शी डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षित एपीआई प्रणाली लागू की गई है।
उन्होंने बताया कि भूमि और आय से जुड़े सत्यापित आंकड़ों के आधार पर बैंक और वित्तीय संस्थान कम कागजी औपचारिकताओं के साथ किसान क्रेडिट कार्ड और कृषि ऋण शीघ्र स्वीकृत कर सकेंगे। समय पर ऋण मिलने से किसान बीज, खाद, कीटनाशक और अन्य कृषि इनपुट की लागत को आसानी से प्रबंधित कर पाएंगे।
फसल बीमा योजनाओं, विशेषकर पीएमएफबीवाई, में नामांकन की प्रक्रिया भी सरल हो सकेगी। भूमि, फसल और मौसम से जुड़ा डेटा पहले से डिजिटल रूप में उपलब्ध रहने से बीमा दावों का सत्यापन और भुगतान तेजी से किया जा सकेगा। बैठक में एसडीएम राजेश कुमार, जिला राजस्व अधिकारी श्याम लाल, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. राजेश सिहाग, डीआईओ सिकंदर सहित कृषि और राजस्व विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।