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पुरातत्व विभाग बनावाली में 36 एकड़ जमीन पर करेगा खुदाई
Updated Fri, 24 Aug 2018 12:30 AM IST
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पुरातत्व विभाग बनावाली में 36 एकड़ जमीन पर करेगा खुदाई
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। उप मंडलाधीश सतबीर सिंह जांगु व जिला राजस्व अधिकारी विजेंद्र भारद्वाज ने पुरातत्व विभाग द्वारा अधिसूचित प्राचीन स्थल बनावाली का दौरा किया। उन्होंने किसानों से बातचीत की। पुरातत्व विभाग इस स्थल पर 36 एकड़ जमीन पर खुदाई और अन्य गतिविधियां संचालित करेगा। इसके लिए पुरातत्व विभाग ने सरकार से जमीन की मांग की है।
विजेंद्र भारद्वाज ने बताया कि प्राचीन स्थल बनावाली की थेह जमीन और इसके साथ लगती प्रस्तावित खुदाई जमीन किसानों की है। यह कुल जमीन 36 एकड़ बनती है, जिसमें से 15.50 एकड़ में थेह मौजूद है। पुरातत्व विभाग ने प्राचीन स्थल बनावाली को सांस्कृतिक क्रम चयनित किया है। यहां पर पूर्व हड़प्पा, बारा और उत्तर हड़प्पा कालीन संग्रह के अवशेष मिले हैं। यहां पर सुनियोजित घर, जोकि पक्की और सांचों में ढली ईंटों से बने हैं। यहां पर अंडाकार तथा गोलाकार चूल्हे, कांच के संग्रह में पतली तथा हलकी काले रंग की वस्तुएं जैसे मर्तबान व कलश है।
इस स्थल की ऐतिहासिक और पुरातत्व महत्व देखते हुए भारत सरकार ने सितंबर 1982 को इसे अधिकरण किया था। इस स्थल पर किसी भी प्रकार की खेती, दूसरी गतिविधियां संचालित नहीं की जा सकती। वर्तमान समय में पुरातत्व विभाग अनुसंधान और खुदाई के दृष्टिगत अपनी गतिविधियां शुरू करना चाहता है। जिला प्रशासन से पुरातत्व विभाग ने मांग की है कि इस स्थल की 36 एकड़ जमीन अधिकृत करके दी जाए। एसडीएम और डीआरओ ने किसानों से जमीन पुरातत्व विभाग को देने के बारे में विचार-विमर्श किया। किसानों ने प्रशासन को आश्वस्त किया कि वे राष्ट्रहित में जमीन देने को तैयार है, बशर्ते उन्हें उचित जमीन की राशि और वहां स्थापित मकान और ट्यूबवेल का खर्च दे दिया जाए। इस पर एसडीएम ने राजस्व विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्थल के आसपास रास्तों, मकानों और सिंचाई के लिए प्रयुक्त हुए खालों का सर्वे करें और अपनी एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करें। एसडीएम ने बताया कि अगर किसान सहमति से जमीन देना चाहते हैं तो वे प्रशासन और सरकार के साथ तालमेल रख पुरातत्व विभाग को अपनी जमीन दे सकते हैं। एसडीएम ने किसानों को भी आश्वस्त किया कि उन्हें उचित मुआवजा दिलवाया जाएगा। प्रशासन किसानों को हरसंभव सहायता भी देगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद। उप मंडलाधीश सतबीर सिंह जांगु व जिला राजस्व अधिकारी विजेंद्र भारद्वाज ने पुरातत्व विभाग द्वारा अधिसूचित प्राचीन स्थल बनावाली का दौरा किया। उन्होंने किसानों से बातचीत की। पुरातत्व विभाग इस स्थल पर 36 एकड़ जमीन पर खुदाई और अन्य गतिविधियां संचालित करेगा। इसके लिए पुरातत्व विभाग ने सरकार से जमीन की मांग की है।
विजेंद्र भारद्वाज ने बताया कि प्राचीन स्थल बनावाली की थेह जमीन और इसके साथ लगती प्रस्तावित खुदाई जमीन किसानों की है। यह कुल जमीन 36 एकड़ बनती है, जिसमें से 15.50 एकड़ में थेह मौजूद है। पुरातत्व विभाग ने प्राचीन स्थल बनावाली को सांस्कृतिक क्रम चयनित किया है। यहां पर पूर्व हड़प्पा, बारा और उत्तर हड़प्पा कालीन संग्रह के अवशेष मिले हैं। यहां पर सुनियोजित घर, जोकि पक्की और सांचों में ढली ईंटों से बने हैं। यहां पर अंडाकार तथा गोलाकार चूल्हे, कांच के संग्रह में पतली तथा हलकी काले रंग की वस्तुएं जैसे मर्तबान व कलश है।
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इस स्थल की ऐतिहासिक और पुरातत्व महत्व देखते हुए भारत सरकार ने सितंबर 1982 को इसे अधिकरण किया था। इस स्थल पर किसी भी प्रकार की खेती, दूसरी गतिविधियां संचालित नहीं की जा सकती। वर्तमान समय में पुरातत्व विभाग अनुसंधान और खुदाई के दृष्टिगत अपनी गतिविधियां शुरू करना चाहता है। जिला प्रशासन से पुरातत्व विभाग ने मांग की है कि इस स्थल की 36 एकड़ जमीन अधिकृत करके दी जाए। एसडीएम और डीआरओ ने किसानों से जमीन पुरातत्व विभाग को देने के बारे में विचार-विमर्श किया। किसानों ने प्रशासन को आश्वस्त किया कि वे राष्ट्रहित में जमीन देने को तैयार है, बशर्ते उन्हें उचित जमीन की राशि और वहां स्थापित मकान और ट्यूबवेल का खर्च दे दिया जाए। इस पर एसडीएम ने राजस्व विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्थल के आसपास रास्तों, मकानों और सिंचाई के लिए प्रयुक्त हुए खालों का सर्वे करें और अपनी एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करें। एसडीएम ने बताया कि अगर किसान सहमति से जमीन देना चाहते हैं तो वे प्रशासन और सरकार के साथ तालमेल रख पुरातत्व विभाग को अपनी जमीन दे सकते हैं। एसडीएम ने किसानों को भी आश्वस्त किया कि उन्हें उचित मुआवजा दिलवाया जाएगा। प्रशासन किसानों को हरसंभव सहायता भी देगा।
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