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जाखल के तीन राइस शैलरों पर आयकर विभाग का बड़ा सर्वे
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अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद/जाखल। नोटबंदी के दौरान बैंकों में निर्धारित राशि से अधिक जमा करवाने और प्रोपर्टी में इनवेस्ट करने के मामले को लेकर आयकर विभाग की तीन टीमों ने बुधवार सुबह जाखल के तीन राइस सेलरों के यहां दबिश देकर पूरा रिकार्ड खंगाला तथा दस्तावेजों की जांच की। यह आयकर सर्वे आयकर विभाग के प्रधान आयुक्त निरंजन कोहली के निर्देशानुसार किया गया। देर शाम तक 3 टीमों के 15 कर्मचारी व पुलिस के कर्मचारी रिकार्ड चेक करते रहे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नवंबर 2016 में नोटबंदी के दौरान बैंकों में निर्धारित राशि से अधिक जमा करने वाली फर्मों का डेटा आयकर विभाग एनालिसिस कर रहा था। पता चला है कि फतेहाबाद की अनेक फर्में इस डेट स्कू्टनी में आ गई। इन फर्मों ने अपनी सालाना इनकम टैक्स रिटर्न में बैंकों में जमा राशि व निवेश का कम उल्लेख किया था। जबकि वास्तव में इनकी ट्रांजेक्शन काफी अधिक थी। जिसके पहले चरण में आयकर विभाग ने जाखल को सर्विलांस किया। आयकर विभाग की फतेहाबाद, सिरसा व हिसार की 3 टीमों ने बुधवार को ज्वाइंट कमिश्नर हेमंत गुप्ता के नेतृत्व में व्यवसायी मक्खन लाल सिंगला के तीन संस्थानों पर दबिश दी।
टीमों ने एक साथ तीनों संस्थानों पर दबिश देते हुए मेन गेट पर पुलिस का पहरा लगा दिया व बाहर से अंदर किसी को भी नहीं जाने दिया। दोपहर करीब 12 बजे टीमों ने चंडीगढ़ रोड स्थित सिंगला राइस मिल, जाखल कुलां-भूना ओवर ब्रिज के नीचे सिंगला एग्रो फूड्स व गोशाला रोड पर हैफेड एजेंसी से ठेका पर ली गई शंकर राइस मिल पर छापामारी की। विभाग की टीमों ने मिलों से संबंधित सभी दस्तावेज जब्त कर लिए व उनकी जांच आरंभ कर दी।
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छापेमारी की जानकारी मिलते ही जाखल के तमाम राइस मिल उक्त संस्थानों के बाहर जुटना शुरू हो गए। लेकिन इस दौरान पुलिस के कड़े पहरे के चलते किसी भी मिल मालिक को अंदर नहीं जाने दिया गया। आयकर विभाग की टीमों ने सीसीटीवी कैमरों को भी बंद करवाया। फिलहाल अधिकारियों द्वारा छापे में जांच की जा रही है। पता चला है कि नोटबंदी के दो वर्ष बाद आयकर विभाग अब ऐसे चिह्नित उद्यमियों व व्यापारियों के रिकार्ड खंगालना शुरू कर चुका है। नोटबंदी के दौरान धनराशि जमा करने व प्रोपर्टी खरीदने तथा बेचने की पूरी जानकारी विभाग के पास है। अब ऐसे ही तथ्यों को लेकर संदेहास्पद वित्तीय लेनदेन के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।
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फतेहाबाद/जाखल। नोटबंदी के दौरान बैंकों में निर्धारित राशि से अधिक जमा करवाने और प्रोपर्टी में इनवेस्ट करने के मामले को लेकर आयकर विभाग की तीन टीमों ने बुधवार सुबह जाखल के तीन राइस सेलरों के यहां दबिश देकर पूरा रिकार्ड खंगाला तथा दस्तावेजों की जांच की। यह आयकर सर्वे आयकर विभाग के प्रधान आयुक्त निरंजन कोहली के निर्देशानुसार किया गया। देर शाम तक 3 टीमों के 15 कर्मचारी व पुलिस के कर्मचारी रिकार्ड चेक करते रहे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नवंबर 2016 में नोटबंदी के दौरान बैंकों में निर्धारित राशि से अधिक जमा करने वाली फर्मों का डेटा आयकर विभाग एनालिसिस कर रहा था। पता चला है कि फतेहाबाद की अनेक फर्में इस डेट स्कू्टनी में आ गई। इन फर्मों ने अपनी सालाना इनकम टैक्स रिटर्न में बैंकों में जमा राशि व निवेश का कम उल्लेख किया था। जबकि वास्तव में इनकी ट्रांजेक्शन काफी अधिक थी। जिसके पहले चरण में आयकर विभाग ने जाखल को सर्विलांस किया। आयकर विभाग की फतेहाबाद, सिरसा व हिसार की 3 टीमों ने बुधवार को ज्वाइंट कमिश्नर हेमंत गुप्ता के नेतृत्व में व्यवसायी मक्खन लाल सिंगला के तीन संस्थानों पर दबिश दी।
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टीमों ने एक साथ तीनों संस्थानों पर दबिश देते हुए मेन गेट पर पुलिस का पहरा लगा दिया व बाहर से अंदर किसी को भी नहीं जाने दिया। दोपहर करीब 12 बजे टीमों ने चंडीगढ़ रोड स्थित सिंगला राइस मिल, जाखल कुलां-भूना ओवर ब्रिज के नीचे सिंगला एग्रो फूड्स व गोशाला रोड पर हैफेड एजेंसी से ठेका पर ली गई शंकर राइस मिल पर छापामारी की। विभाग की टीमों ने मिलों से संबंधित सभी दस्तावेज जब्त कर लिए व उनकी जांच आरंभ कर दी।
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छापेमारी की जानकारी मिलते ही जाखल के तमाम राइस मिल उक्त संस्थानों के बाहर जुटना शुरू हो गए। लेकिन इस दौरान पुलिस के कड़े पहरे के चलते किसी भी मिल मालिक को अंदर नहीं जाने दिया गया। आयकर विभाग की टीमों ने सीसीटीवी कैमरों को भी बंद करवाया। फिलहाल अधिकारियों द्वारा छापे में जांच की जा रही है। पता चला है कि नोटबंदी के दो वर्ष बाद आयकर विभाग अब ऐसे चिह्नित उद्यमियों व व्यापारियों के रिकार्ड खंगालना शुरू कर चुका है। नोटबंदी के दौरान धनराशि जमा करने व प्रोपर्टी खरीदने तथा बेचने की पूरी जानकारी विभाग के पास है। अब ऐसे ही तथ्यों को लेकर संदेहास्पद वित्तीय लेनदेन के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।