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आईएमटी की जमीन से कब्जा न छोड़ने पर अड़े किसान

Thu, 14 Nov 2013 11:04 PM IST
खरखौदा (सोनीपत)/ब्यूरो
खरखौदा (सोनीपत)/ब्यूरो Updated Thu, 14 Nov 2013 11:04 PM IST
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 Farmers Mahapanchayat in sonepat
आईएमटी के लिए अधिगृहीत जमीन पर कब्जा लेना प्रशासन के लिए सिरदर्द बना हुआ है। दस गांवों के किसान जमीन और उस पर लगे संसाधनों व पेड़ों का पूरा मुआवजा न मिलने तक कब्जा न देने पर अड़े हुए हैं।
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इस वजह से तनाव का माहौल भी बना हुआ है। प्रशासन और किसानों के बीच बैठकों का दौर चल रहा है, लेकिन अभी तक बात सिरे नहीं चढ़ी है। बुधवार को किसानों ने कब्जा लेने आई टीम पर पथराव करने के साथ-साथ जाम लगा दिया था, जिसके बाद टीम बैरंग लौट गई थी।
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सरकार ने आईएमटी विकसित करने के लिए क्षेत्र के दस गांवों की 3303 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था। इसमें से 500 एकड़ जमीन के मालिक किसानों ने कोई आपत्ति नहीं की। वहीं, बाकी जमीन पर किसान उस पर लगे ट्यूबवेल, कमरों, पेड़ों आदि के भी मुआवजे की मांग कर रहे हैं। वहीं, कई किसानों का कहना है कि उन्हें पूरा मुआवजा नहीं मिला है।
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अधिकारियों से मिले किसान
किसानों का एक दल वीरवार को खरखौदा विश्राम ग्रह में अधिकारियों से मिला और आईएमटी से संबंधित भूमि का पूरा मुआवजा मिलने तक कब्जा लेने की कार्रवाई को रोकने की अपील की। प्रशासन ने किसानों से कहा कि अभी जमीनों की बाड़बंदी को हटाकर जमीनों का आपस में मिलान करने दें। अधिकारियों ने कहा कि इस दौरान फसल खराब नहीं होने दी जाएगी।

महापंचायत में चेताया, आज फिर होगी बैठक
किसानों ने लगभग तीन बजे कुंडल गांव में एक महापंचायत की। महापंचायत में पूर्व सरपंच रामचंद्र सोहटी, विनोद राणा, शमशेर सिंह, महेंद्र सिंह, हंसराज राणा, अजीत राणा व अशोक आदि मौजूद रहे। सोहटी ने बताया कि पंचायत में सभी दस गांवों के किसानों ने हिस्सा लिया। पंचायत में किसानों ने कुएं, ट्यूबवेल, कोठरों और वृक्षों के मुआवजे के साथ-साथ 20 हजार रुपये प्रति एकड़ की मांग की। अलग से मिलने वाली राशि का भुगतान नहीं होने तक जमीनों पर कब्जा नहीं देने का फैसला लिया गया। किसानों ने खरखौदा तहसीलदार, सोनीपत डीआरओ और मुख्यमंत्री को भी शिकायत भेजी है। महापंचायत में शुक्रवार को दोबारा से पंचायत कर अंतिम फैसला लेने का निर्णय लया गया। एसडीएम खरखौदा वीरेंद्र सहरावत ने बताया कि किसानों से बातचीत की जा रही है। जल्द मसला सुलझा लिया जाएगा।



आईएमटी विकसित करने के लिए जमीन का अधिग्रहण किया जा चुका है। किसानों को मुआवजा दिया जा चुका है, जिसका रह गया है वो डीआरओ के पास आवेदन करें। विकास के काम में बाधा नहीं पड़नी चाहिए।
- डॉ. चंद्रशेखर, उपायुक्त, सोनीपत

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