{"_id":"9ce50fdbcb2b6f90b669a3fbc4a8a31e","slug":"farmer-s-name-was-appropriated-subsidy-of-rs-37-500","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसान के नाम 37,500 रुपये की सब्सिडी डकारी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किसान के नाम 37,500 रुपये की सब्सिडी डकारी
बहल/भिवानी/ब्यूरो
Updated Wed, 18 Dec 2013 10:07 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरियाणा के जिला भिवानी के बहल में फर्जी दस्तावेज बनाकर कृषि विभाग के अधिकारियों ने एक किसान के फव्वारा सेट की 37,500 रुपये की सब्सिडी डकार ली।
इसमें फव्वारा सेट कंपनी के कर्मचारियों की मिलीभगत से इंकार नहीं किया जा सकता। हैरानीजनक है कि इस सब्सिडी के लिए किसान ने आवेदन तक नहीं किया और अधिकारियों ने गुपचुप तरीके से रकम हड़प ली।
दूसरी चौंकाने वाली बात यह है कि जिस साल किसान के नाम सब्सिडी दर्शाई गई है, उस वर्ष के दो साल बाद तक किसान के खेत में ट्यूबवेल नहीं था। पीड़ित किसान ने कृषि विभाग के अलावा पुलिस में शिकायत देकर न्याय मांगा है।
भूमि संरक्षण विभाग ने इलाके के गांव सुरपुरा कलां के किसान श्योनारायण के नाम 37,500 रुपये की सब्सिडी 31 मार्च 2011 में जारी की है, लेकिन किसान को इसकी भनक तक नहीं लगी।
विज्ञापन
किसान के नाम सब्सिडी की प्रक्रिया पूरी करने के लिए उसके भाई सूबे सिंह के नाम से जमीन की फर्द निकाली गई। इतना ही नहीं, उसके नाम से तहसील में एफिडेविट बनाया गया और उस पर दो जानकारों के अलावा नोटरी ने अपने हस्ताक्षर भी किए हैं।
जब मामला सामने में आया तो कंपनी से लेकर कृषि विभाग के अधिकारी तक मामले को सुलटाने के लिए किसान की हर बात मानने को तैयार हैं।
आवेदन किया तो पता चला
किसान श्योनारायण ने अपने खेत में दो महीने पहले एक ट्यूबवेल लगवाया है। पानी की सिंचाई के लिए जब उसने फव्वारा सेट लेने की योजना बनाई तो वह भूमि संरक्षण कार्यालय में गया।
वहां, जब उसने फव्वारा सेट के लिए सब्सिडी देने की बात कही तो कार्यालय में मौजूद अधिकारियों ने बताया कि उसके नाम तो वर्ष 2011 में ही 37,500 रुपये की सब्सिडी फव्वारा सेट की एकता कंपनी को जारी की जा चुकी है।
लिहाजा, उसे दोबारा सब्सिडी नहीं मिल सकती है। पीड़ित किसान ने फाइल देखी तो जमीन की फर्द से लेकर एफिडेविट और अन्य सभी कागजात फर्जी लगाए गए हैं।
यही नहीं, उसके नाम से दिए गए एफिडेविट को नोटरी से गलत जानकारी देकर अटेस्ट करवाया गया है।
पुलिस और कृषि विभाग को शिकायत दी
श्योनारायण ने बताया कि जब जमीन का पारिवारिक बंटवारा हुआ तो उसके पिता इंद्राज, माता सरती देवी, भाई सूबे सिंह और उसके हिस्से को लेकर हर एक को 13.5 किला जमीन मिली थी।
उसके भाई ने अपने हिस्से की जमीन पर पहले ही फव्वारा सेट लिया हुआ है। अब उसने आवेदन किया तो उसके हिस्से की जमीन पर फव्वारा सेट पर मिलने वाली अनुदान राशि को किसी दूसरे व्यक्ति को श्योनारायण बनाकर कृषि विभाग और कंपनी के अधिकारियों ने हड़प ली है।
विज्ञापन
इसमें फव्वारा सेट कंपनी के कर्मचारियों की मिलीभगत से इंकार नहीं किया जा सकता। हैरानीजनक है कि इस सब्सिडी के लिए किसान ने आवेदन तक नहीं किया और अधिकारियों ने गुपचुप तरीके से रकम हड़प ली।
दूसरी चौंकाने वाली बात यह है कि जिस साल किसान के नाम सब्सिडी दर्शाई गई है, उस वर्ष के दो साल बाद तक किसान के खेत में ट्यूबवेल नहीं था। पीड़ित किसान ने कृषि विभाग के अलावा पुलिस में शिकायत देकर न्याय मांगा है।
विज्ञापन
भूमि संरक्षण विभाग ने इलाके के गांव सुरपुरा कलां के किसान श्योनारायण के नाम 37,500 रुपये की सब्सिडी 31 मार्च 2011 में जारी की है, लेकिन किसान को इसकी भनक तक नहीं लगी।
विज्ञापन
किसान के नाम सब्सिडी की प्रक्रिया पूरी करने के लिए उसके भाई सूबे सिंह के नाम से जमीन की फर्द निकाली गई। इतना ही नहीं, उसके नाम से तहसील में एफिडेविट बनाया गया और उस पर दो जानकारों के अलावा नोटरी ने अपने हस्ताक्षर भी किए हैं।
जब मामला सामने में आया तो कंपनी से लेकर कृषि विभाग के अधिकारी तक मामले को सुलटाने के लिए किसान की हर बात मानने को तैयार हैं।
आवेदन किया तो पता चला
किसान श्योनारायण ने अपने खेत में दो महीने पहले एक ट्यूबवेल लगवाया है। पानी की सिंचाई के लिए जब उसने फव्वारा सेट लेने की योजना बनाई तो वह भूमि संरक्षण कार्यालय में गया।
वहां, जब उसने फव्वारा सेट के लिए सब्सिडी देने की बात कही तो कार्यालय में मौजूद अधिकारियों ने बताया कि उसके नाम तो वर्ष 2011 में ही 37,500 रुपये की सब्सिडी फव्वारा सेट की एकता कंपनी को जारी की जा चुकी है।
लिहाजा, उसे दोबारा सब्सिडी नहीं मिल सकती है। पीड़ित किसान ने फाइल देखी तो जमीन की फर्द से लेकर एफिडेविट और अन्य सभी कागजात फर्जी लगाए गए हैं।
यही नहीं, उसके नाम से दिए गए एफिडेविट को नोटरी से गलत जानकारी देकर अटेस्ट करवाया गया है।
पुलिस और कृषि विभाग को शिकायत दी
श्योनारायण ने बताया कि जब जमीन का पारिवारिक बंटवारा हुआ तो उसके पिता इंद्राज, माता सरती देवी, भाई सूबे सिंह और उसके हिस्से को लेकर हर एक को 13.5 किला जमीन मिली थी।
उसके भाई ने अपने हिस्से की जमीन पर पहले ही फव्वारा सेट लिया हुआ है। अब उसने आवेदन किया तो उसके हिस्से की जमीन पर फव्वारा सेट पर मिलने वाली अनुदान राशि को किसी दूसरे व्यक्ति को श्योनारायण बनाकर कृषि विभाग और कंपनी के अधिकारियों ने हड़प ली है।