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डीयू के छात्रों ने उठाया अरावली की वादियों को बचाने का बीड़ा
धर्मेंद्र कौशिक/अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Tue, 15 Mar 2016 10:54 AM IST
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अरावली की वादी
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अरावली की वादियों का आस्तित्व बचाने के लिए हाथ बढने लगे हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र शहर की सेव अरावली संस्था के साथ मिलकर खोई हुई पहचान वापस लाने का बीड़ा उठाया है। संस्था की मदद से विश्वविद्यालय के वनस्पति विभाग के छात्रों की टीम जल्द ही सर्वे शुरू करने जा रही है। इसके आधार पर ऐसे स्थान चिन्ह्ति किए जाएंगे जहां खनन हुआ और हरियाली को तबाह किया गया। सर्वे के आधार पर वादियों को बचाने का एक्शन प्लान तैयार किया जाएगा।
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बढ़ते शहरीकरण के प्रभाव के कारण अरावली की सुंदरता पर ग्रहण लगता जा रहा है। पहले तटबंधों के कारण अरावली की पानी से भरी झीलें और हरियाणा पूरे एनसीआर के सैलानियों को अपनी तरफ आकर्षित किया करती थीं। लेकिन इन हसीन वादियों के बीच हुए निर्माणों ने प्राकृतिक स्त्रोतों को तबाह कर दिया है। हरियाली को लीलकर मैदान में तब्दील कर दिया।
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हरियाली पर रहेगा फोकस
दिल्ली विश्वविद्यालय के वनस्पति विभाग के छात्र अभिषेक के नेतृत्व में टीम अक्सर अरावली का दौरा करती रहती है। अरावली के बिगड़े स्वरूप को देखकर टीम ने अरावली पर मंडरा रहे खतरे से निपटने की ठानी है। अभिषेक ने बताया कि अरावली को उसके वास्तविक स्वरूप में लाने के लिए सबसे ज्यादा जोर हरियाली पर रहेगा। इसके लिए यहां नर्सरी स्थापित करने की कवायद की जा रही है। छात्रों की पूरी टीम इस काम में जुट गई है।
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गांवों से ली जा रही मदद
अरावली की खोई सुंदरता को वापस लाने के लिए एक तरफ सर्वे की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है तो वहीं जमीनी स्तर पर काम शुरू कर दिया गया है। अरावली सेव संसथा के कैलाश बिधुड़ी ने बताया कि वादियों में नर्सरी बनाने के लिए आसपास के गांवों से खाद एकत्रित की जा रही है। वन विभाग भी इस काम में मदद कर रहा है। इसके बाद विश्वविद्यालय के छात्रों की टीम नर्सरी स्थापित कर काटे गए पेड़ों के स्थान पर नए पेड़ लगाएगी।
लेकिन प्रशासन क्यों खामोश
अवैध खनन, पेड़ कटाई, पत्थरों की चोरी से अरावली का सीना लगातार छलनी हो रहा है। प्रशासनिक अनदेखी और राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते अरावली की वादियों पर ग्रहण सा लगता जा रहा है। अवैध खनन ने सुंदर वादियों को खतरनाक बना दिया है। गहरे गड्ढे होने के चलते पहाड़ झीलों में तब्दील हो गए हैं, जहां अकसर हादसे होते रहते हैं।
-11000 हेक्टेयर में गुडग़ांव में फैला है अरावली क्षेत्र
-3600 हेक्टेयर फरीदाबाद में फैला है अरावली क्षेत्र