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प्रॉपर्टी टैक्स में ‘कंफ्यूजन’

Sun, 20 Oct 2013 07:58 PM IST
राहुल श्याम, फरीदाबाद
राहुल श्याम, फरीदाबाद Updated Sun, 20 Oct 2013 07:58 PM IST
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property tax confusion

सवाल नंबर-1: पुराने बकायेदारों को किस तारीख से पहले मिलेगी छूट

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सवाल नंबर-2: मार्केट में ऊपरी मंजिल की दुकानों पर कितना टैक्स
सवाल नंबर-3: 300 वर्ग गज से अधिक पर (रिहायशी) कितना बढ़ेगा बोझ

नगर निगम को मिले प्रॉपर्टी टैक्स के नोटिफिकेशन में कई ‘कंफ्यूजन’ हैं, जिससे प्रॉपर्टी टैक्स वसूलने पर फिर पेंच फंस गया है। नोटिफिकेशन के अध्ययन में निगम अधिकारियों के सामने कई विसंगतियां सामने आई हैं, जब तक यह स्पष्ट नहीं हो जाती, निगम टैक्स वसूल नहीं कर सकेगा। निगम प्रशासन इन विसंगतियों को स्पष्ट करने के लिए प्रदेश सरकार को पत्र लिखेगा। निगम प्रशासन ने प्रॉपर्टी टैक्स वसूली की प्रक्रिया चालू करने की सभी तैयारियां कर ली थीं। लेकिन नोटिफिकेशन के अध्ययन में कुछ विसंगतियां सामने आने के बाद अभी इस पर ‘कंफ्यूजन’ दूर किया जाएगा। यह दिक्कत फरीदाबाद एवं गुड़गांव दोनों शहरों में है।

ये हैं विसंगतियां
1 : नोटिफिकेशन में पिछले बकायेदारों को रिझाने और उनसे अधिक से अधिक टैक्स वसूलने के लिए छूट का प्रावधान तो है। लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि किस तिथि तक उन्हें इस छूट का लाभ दिया जाएगा।
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2: रिहायशी इलाकों में 300 वर्गगज से अधिक साइज के प्लॉट पर किस दर से टैक्स बढ़ेगा यह स्पष्ट नहीं है। निगम अधिकारियों का कहना है कि पहले की नीति में सर्कल रेट के हिसाब से कॉलोनी व सेक्टरों में अलग-अलग दर लागू की गई थी, लेकिन इस नीति में कुछ स्पष्ट नहीं है। 300 वर्गगज तक एक रुपये प्रति वर्गगज की दर पर टैक्स लेने का प्रावधान है।
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3 : नोटिफिकेशन में जिस महत्वपूर्ण बिंदु पर विसंगति बनी हुई है, वह पहली मंजिल पर दुकानों के संबंध में है। नीति में भू-तल पर स्थित दुकानों के बारे में तो टैक्स का प्रावधान है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि जिन बाजारों में प्रथम व द्वितीय तल पर भी दुकानें चल रही हैं, उन पर किस दर से टैक्स लागू होगा।
4-जो प्रॉपर्टी किराये पर दी गई है या जिसमें किरायेदार रहते हैं उस पर टैक्स की दर अभी स्पष्ट नहीं है।

नोटिफिकेशन के कुछ बिंदुओं पर भ्रम की स्थिति है, जिन्हें दूर करने के लिए सरकार को पत्र लिखा जाएगा। ताकि प्रॉपर्टी टैक्स वसूलने में परेशानी न हो।
बीएस पंवार, क्षेत्रीय एवं कर अधिकारी, नगर निगम

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