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जमीन अधिग्रहण के विरोध में दस ने मांगी इच्छा मृत्यु
खरखौदा (सोनीपत)/ब्यूरो
Updated Mon, 18 Nov 2013 10:54 PM IST
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आईएमटी भूमि अधिग्रहण से संबंधित दस गांवों के किसानों ने पंचायत में सरकार के खिलाफ संघर्ष का बिगुल बजा दिया।
सोमवार को गांव कुंडल में शिव मंदिर के पास बलबीर राणा, विनोद राणा, रामचंद्र राणा और हंसराज की अध्यक्षता में किसानों की पंचायत हुई। इसमें सर्वसम्मति से दस गांवों की जमीन को नई भूमि अधिग्रहण नीति के तहत शामिल नहीं करने तक कब्जा नहीं देने का फैसला लिया गया। पंचायत में महिलाओं ने भी शिरकत की। महिलाओं सहित दस ग्रामीणों ने राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु की मांग की।
किसानों ने फैसला लिया कि किसानों द्वारा उक्त भूमि पर फसल की रोपाई की गई है, उसे किसी भी सूरत में उजाड़ने नहीं देंगे। नई भूमि अधिग्रहण में शामिल न किए जाने के विरोध में निरंतर संघर्ष जारी रहेगा। इस संघर्ष में अगर किसान की जान जाती है तो प्रदेश सरकार को 25 लाख रुपये मुआवजा देना होगा और मृतक का उसके गांव में बुत भी लगाना होगा। अगर प्रदेश सरकार ऐसा नहीं करती है तो दस गांवों के किसान चंदा उगाही कर पीड़ित किसान के परिवार को 25 लाख रुपये की राशि देंगे और गांव में अपने खर्च पर उसका बुत भी लगाएंगे। इसके बाद सरकार को सबक सिखाया जाएगा।
उपजाऊ भूमि का न करें अधिग्रहण : चोटीवाल
भारतीय किसान यूनियन के महासचिव वीरेंद्र चोटीवाल ने कहा कि केंद्र सरकार किसान विरोधी नीतियों को अपनाकर किसानों को उजाड़ने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि उपजाऊ भूमि का अधिग्रहण रोकना चाहिए। दूसरी तरफ जो भूमि आईएमटी के लिए चयनित की गई है उसका मुआवजा नई भूमि अधिग्रहण नीति के मुताबिक दिया जाना चाहिए। उन्हाेंने कहा कि किसी भी सरकार को हक नहीं बनता कि वे फसल का उजाड़ें। पंचायत में इंद्र सिंह, बजे सिंह, मेहर सिंह, हरिओम, सोमवती, शीला, शकुंतला, सावित्री, गीता, जगबीर, रोहतास और राज सिंह आदि मौजूद रहे।
जमीन हड़पने की साजिश
सोमवार को गांव कुंडल में हुई पंचायत में महिलाओं ने भी हिस्सा लिया और सरकार की नीतियों को किसान विरोधी बताते हुए उन्हें बदलने की मांग की। फसलों को उजाड़ने का विरोध जताते हुए गांव की 6 महिलाओं और 4 पुरुषों ने राष्ट्रपति व पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से रजिस्ट्री व ई-मेल के जरिये इच्छा मृत्यु की इजाजत देने की मांग की है। कुंडल गांव से सोमवती, कमलेश, शकुंतला, शीला, राजवंती, बंसीलाल, हरीचंद, सुरेंद्र व नवीन का कहना है कि प्रदेश सरकार दस गांव के किसानों की जमीन हड़पने की कोशिश कर रही है। किसानों की भूमि पर अभी तक कब्जा नहीं किया गया है, इसलिए किसानों को नई नीति के अनुरूप मुआवजा वितरित किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि प्रदेश सरकार ने किसानों की जमीन को नई भूमि अधिग्रहण नीति में शामिल नहीं किया है।
इतनी जमीन का अधिग्रहण
सरकार ने आईएमटी विकसित करने के लिए क्षेत्र के दस गांवों की 3303 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था। इसमें से 500 एकड़ जमीन के मालिक किसानों ने कोई आपत्ति नहीं की। वहीं, बाकी जमीन पर किसान उस पर लगे ट्यूबवेल, कमरों, पेड़ों आदि के भी मुआवजे की मांग कर रहे हैं। यदि इस जमीन को नई भूमि अधिग्रहण नीति के तहत शामिल किया जाता है तो मुआवजा कई गुना बढ़ जाएगा।
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सोमवार को गांव कुंडल में शिव मंदिर के पास बलबीर राणा, विनोद राणा, रामचंद्र राणा और हंसराज की अध्यक्षता में किसानों की पंचायत हुई। इसमें सर्वसम्मति से दस गांवों की जमीन को नई भूमि अधिग्रहण नीति के तहत शामिल नहीं करने तक कब्जा नहीं देने का फैसला लिया गया। पंचायत में महिलाओं ने भी शिरकत की। महिलाओं सहित दस ग्रामीणों ने राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु की मांग की।
किसानों ने फैसला लिया कि किसानों द्वारा उक्त भूमि पर फसल की रोपाई की गई है, उसे किसी भी सूरत में उजाड़ने नहीं देंगे। नई भूमि अधिग्रहण में शामिल न किए जाने के विरोध में निरंतर संघर्ष जारी रहेगा। इस संघर्ष में अगर किसान की जान जाती है तो प्रदेश सरकार को 25 लाख रुपये मुआवजा देना होगा और मृतक का उसके गांव में बुत भी लगाना होगा। अगर प्रदेश सरकार ऐसा नहीं करती है तो दस गांवों के किसान चंदा उगाही कर पीड़ित किसान के परिवार को 25 लाख रुपये की राशि देंगे और गांव में अपने खर्च पर उसका बुत भी लगाएंगे। इसके बाद सरकार को सबक सिखाया जाएगा।
उपजाऊ भूमि का न करें अधिग्रहण : चोटीवाल
भारतीय किसान यूनियन के महासचिव वीरेंद्र चोटीवाल ने कहा कि केंद्र सरकार किसान विरोधी नीतियों को अपनाकर किसानों को उजाड़ने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि उपजाऊ भूमि का अधिग्रहण रोकना चाहिए। दूसरी तरफ जो भूमि आईएमटी के लिए चयनित की गई है उसका मुआवजा नई भूमि अधिग्रहण नीति के मुताबिक दिया जाना चाहिए। उन्हाेंने कहा कि किसी भी सरकार को हक नहीं बनता कि वे फसल का उजाड़ें। पंचायत में इंद्र सिंह, बजे सिंह, मेहर सिंह, हरिओम, सोमवती, शीला, शकुंतला, सावित्री, गीता, जगबीर, रोहतास और राज सिंह आदि मौजूद रहे।
जमीन हड़पने की साजिश
सोमवार को गांव कुंडल में हुई पंचायत में महिलाओं ने भी हिस्सा लिया और सरकार की नीतियों को किसान विरोधी बताते हुए उन्हें बदलने की मांग की। फसलों को उजाड़ने का विरोध जताते हुए गांव की 6 महिलाओं और 4 पुरुषों ने राष्ट्रपति व पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से रजिस्ट्री व ई-मेल के जरिये इच्छा मृत्यु की इजाजत देने की मांग की है। कुंडल गांव से सोमवती, कमलेश, शकुंतला, शीला, राजवंती, बंसीलाल, हरीचंद, सुरेंद्र व नवीन का कहना है कि प्रदेश सरकार दस गांव के किसानों की जमीन हड़पने की कोशिश कर रही है। किसानों की भूमि पर अभी तक कब्जा नहीं किया गया है, इसलिए किसानों को नई नीति के अनुरूप मुआवजा वितरित किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि प्रदेश सरकार ने किसानों की जमीन को नई भूमि अधिग्रहण नीति में शामिल नहीं किया है।
इतनी जमीन का अधिग्रहण
सरकार ने आईएमटी विकसित करने के लिए क्षेत्र के दस गांवों की 3303 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था। इसमें से 500 एकड़ जमीन के मालिक किसानों ने कोई आपत्ति नहीं की। वहीं, बाकी जमीन पर किसान उस पर लगे ट्यूबवेल, कमरों, पेड़ों आदि के भी मुआवजे की मांग कर रहे हैं। यदि इस जमीन को नई भूमि अधिग्रहण नीति के तहत शामिल किया जाता है तो मुआवजा कई गुना बढ़ जाएगा।