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सीएम से लेकर विजिलेंस विभाग से शिकायत
हरियाणा
Updated Sat, 21 Sep 2013 12:27 AM IST
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कुरुक्षेत्र में नगर के मेन एरिया में पिछले चार साल से करोड़ों रुपये की भूमि को रामभरोसे छोड़ना अब नगर परिषद थानेसर के गले की फांस बन सकता है।
‘अमर उजाला’ द्वारा इस मामले को उठाने के बाद शुक्रवार को कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड (केडीबी) के सदस्य जयनारायण शर्मा ने इस मामले की लिखित शिकायत और खबर की कॉपी हरियाणा के राज्यपाल, सीएम और स्टेट विजिलेंस को भेजी है। शर्मा नगर परिषद थानेसर के वाइस चेयरमैन रह चुके हैं। उनके अनुसार यह मामला अवैध निर्माण का नहीं, बल्कि करोड़ों की भूमि के गोलमाल का है।
आज तक न तो इस भूमि का कब्जा लिया गया और न ही इसकी फर्जी रजिस्ट्रियां कोर्ट में पेश करने वालों पर नगर परिषद ने मामला दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि निचली अदालतों से लेकर हाईकोर्ट तक ने माना था कि भूमि पर मालिकाना हक नगर परिषद का है।
उन्होंने नगर परिषद की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर नगर परिषद ने इस भूमि को हड़पने के लिए भूमाफिया के सहारे क्यों छोड़ दिया। जबकि यह जमीन निगम के दफ्तर के ठीक सामने है। गौैरतलब है कि इस जमीन पर दुकानें बनाने के लिए निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया गया था। इस भूमि पर एक के बाद एक दुकानों की दीवारें खिंचती रहीं, लेकिन नगर परिषद के अधिकारी और जनप्रतिनिधि आंखें मूंद कर बैठे रहे।
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भूमि के हक के लिए अदालत में केस हुआ था दायर
शहर में थानेसर नगर परिषद कांप्लेक्स के समक्ष कच्चे घेर में स्थित एक हजार गज से अधिक भूमि पर करीब एक दर्जन खोखे थे। इन खोखों में कारोबार कर रहे लोग वर्ष 1996 से पहले नगर परिषद को तहबाजारी जमा कराते थे। परिषद ने वर्ष 1996 में जब तहबाजारी जुटाना शुरू की थी तो एक दुकानदार ईश्वर चंद ने इस भूमि पर अपना मालिकाना हक जताया था। ईश्वर चंद ने अदालत में नगर परिषद पर मुकदमा दायर किया था और अन्य खोखे वालों की रजिस्ट्रियां भी बतौर गवाही अदालत में पेश की। ईश्वर चंद का का दावा था कि वे और अन्य खोखे वाले इस भूमि के मालिक हैं। लेकिन साक्ष्यों के अभाव में ये रजिस्ट्रियां फर्जी साबित हुईं और अदालत ने इस भूमि का मालिकाना हक नगर परिषद थानेसर को माना था। वहीं, कब्जे का मामला अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद भी भूमि पर हुए अवैध निर्माण को अभी तक गिराया नहीं गया।
हाईकोर्ट ने भी माना, भूमि का मालिक नगर परिषद
अदालत के नगर परिषद के हक में हुए फैसले के खिलाफ ईश्वर चंद ने सेशन कोर्ट में अपील दायर की थी। लेकिन सेशन कोर्ट ने भी 13 मई 2003 को उनकी अपील खारिज कर दी। सेशन कोर्ट में अपील खारिज होने के बाद ईश्वर चंद ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अर्जी दी, लेकिन हाईकोर्ट ने भी वर्ष 2009 में उनकी अपील खारिज कर नगर परिषद थानेसर को ही इस भूमि का मालिक माना था।
मालिक थे तो क्यों दे रहे थे तहबाजारी?
नगर परिषद की भूमि की रजिस्ट्री अपने नाम करा चुके ईश्वर चंद से अदालत ने सवाल किया था कि यदि यह भूमि निजी संपत्ति थी तो वह नगर परिषद में तहबाजारी किस लिए दे रहे थे? कोर्ट ने ईश्वर चंद से पूछा था कि
जिस व्यक्ति ने ईश्वर चंद के नाम रजिस्टरी कराई थी, उसके पास यह जमीन कैसे आई? जिसके बाद साक्ष्य न मिलने पर अदालत ने नगर परिषद के हक में फैसला दिया था।
नप ने अब तक भूमि का कब्जा नहीं लिया
हाईकोर्ट के फैसले के बाद ड्यूटी मैजिस्ट्रेट ने ईश्वर चंद की दुकान को सील करके कब्जा कमेटी को दिलवा दिया था। यह दुकान आज तक सील है, लेकिन इस खोखे के आसपास स्थित अन्य जगह का कब्जा पिछले चार साल का समय बीत जाने के बावजूद नगर परिषद थानेसर आज तक नहीं ले सकी।
चार साल से हाथ धरे बैठी परिषद
वर्ष 2009 में हाईकोर्ट ने भी इस भूमि का नगर परिषद को ही मालिक माना था। नगर के बीच इलाके में स्थित एक हजार गज से अधिक इस भूमि को पिछले चार वर्षों से राम भरोसे क्यों छोड़ा हुआ है? ये सवाल अब उठने लगे हैं। क्या नगर परिषद मिलीभगत से यह भूमि किसी ओर को देना चाहती है? और ऐसा किस कीमत पर हो रहा है? छोटी-छोटी बातों पर परिषद की बैठक में हो-हल्ला करने वाले नगर पार्षद चुप्पी क्यों साधे हुए हैं? यदि परिषद की भूमि यूं ही खुर्द-बुर्द होती रही तो भविष्य में नप के पास आमदन के स्रोत क्या होंगे?
करोड़ों रुपये की भूमि
नगर के जिस इलाके में यह एक हजार गज से अधिक जगह है, वहां कलेक्टर रेट भले हजारों में हो, लेकिन वास्तविक और मार्केट वैल्यू लाखों रुपये गज है। कुछ लोगों का कहना है कि यदि कब्जा करने वालों पर नगर परिषद इतना ही मेहरबान है तो ऐसे लोगों को परिषद कहीं भी दुकान अलॉट कर सकती है।
‘नोटिस दिया गया है, ढहाने के निर्देश ईओ देंगे’
नगर परिषद के बिल्डिंग इंस्पेक्टर अजय कुमार ने बताया कि मामला संज्ञान में आने के बाद शुक्रवार को नोटिस चस्पा किए गए हैं। कब्जा गिराने के लिए आदेश देना उनके कार्यक्षेत्र में नहीं है। नगर परिषद के एग्जीक्यूटिव आफिसर एमएस जगत के निर्देश पर ही कार्रवाई होगी।
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‘अमर उजाला’ द्वारा इस मामले को उठाने के बाद शुक्रवार को कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड (केडीबी) के सदस्य जयनारायण शर्मा ने इस मामले की लिखित शिकायत और खबर की कॉपी हरियाणा के राज्यपाल, सीएम और स्टेट विजिलेंस को भेजी है। शर्मा नगर परिषद थानेसर के वाइस चेयरमैन रह चुके हैं। उनके अनुसार यह मामला अवैध निर्माण का नहीं, बल्कि करोड़ों की भूमि के गोलमाल का है।
आज तक न तो इस भूमि का कब्जा लिया गया और न ही इसकी फर्जी रजिस्ट्रियां कोर्ट में पेश करने वालों पर नगर परिषद ने मामला दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि निचली अदालतों से लेकर हाईकोर्ट तक ने माना था कि भूमि पर मालिकाना हक नगर परिषद का है।
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उन्होंने नगर परिषद की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर नगर परिषद ने इस भूमि को हड़पने के लिए भूमाफिया के सहारे क्यों छोड़ दिया। जबकि यह जमीन निगम के दफ्तर के ठीक सामने है। गौैरतलब है कि इस जमीन पर दुकानें बनाने के लिए निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया गया था। इस भूमि पर एक के बाद एक दुकानों की दीवारें खिंचती रहीं, लेकिन नगर परिषद के अधिकारी और जनप्रतिनिधि आंखें मूंद कर बैठे रहे।
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भूमि के हक के लिए अदालत में केस हुआ था दायर
शहर में थानेसर नगर परिषद कांप्लेक्स के समक्ष कच्चे घेर में स्थित एक हजार गज से अधिक भूमि पर करीब एक दर्जन खोखे थे। इन खोखों में कारोबार कर रहे लोग वर्ष 1996 से पहले नगर परिषद को तहबाजारी जमा कराते थे। परिषद ने वर्ष 1996 में जब तहबाजारी जुटाना शुरू की थी तो एक दुकानदार ईश्वर चंद ने इस भूमि पर अपना मालिकाना हक जताया था। ईश्वर चंद ने अदालत में नगर परिषद पर मुकदमा दायर किया था और अन्य खोखे वालों की रजिस्ट्रियां भी बतौर गवाही अदालत में पेश की। ईश्वर चंद का का दावा था कि वे और अन्य खोखे वाले इस भूमि के मालिक हैं। लेकिन साक्ष्यों के अभाव में ये रजिस्ट्रियां फर्जी साबित हुईं और अदालत ने इस भूमि का मालिकाना हक नगर परिषद थानेसर को माना था। वहीं, कब्जे का मामला अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद भी भूमि पर हुए अवैध निर्माण को अभी तक गिराया नहीं गया।
हाईकोर्ट ने भी माना, भूमि का मालिक नगर परिषद
अदालत के नगर परिषद के हक में हुए फैसले के खिलाफ ईश्वर चंद ने सेशन कोर्ट में अपील दायर की थी। लेकिन सेशन कोर्ट ने भी 13 मई 2003 को उनकी अपील खारिज कर दी। सेशन कोर्ट में अपील खारिज होने के बाद ईश्वर चंद ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अर्जी दी, लेकिन हाईकोर्ट ने भी वर्ष 2009 में उनकी अपील खारिज कर नगर परिषद थानेसर को ही इस भूमि का मालिक माना था।
मालिक थे तो क्यों दे रहे थे तहबाजारी?
नगर परिषद की भूमि की रजिस्ट्री अपने नाम करा चुके ईश्वर चंद से अदालत ने सवाल किया था कि यदि यह भूमि निजी संपत्ति थी तो वह नगर परिषद में तहबाजारी किस लिए दे रहे थे? कोर्ट ने ईश्वर चंद से पूछा था कि
जिस व्यक्ति ने ईश्वर चंद के नाम रजिस्टरी कराई थी, उसके पास यह जमीन कैसे आई? जिसके बाद साक्ष्य न मिलने पर अदालत ने नगर परिषद के हक में फैसला दिया था।
नप ने अब तक भूमि का कब्जा नहीं लिया
हाईकोर्ट के फैसले के बाद ड्यूटी मैजिस्ट्रेट ने ईश्वर चंद की दुकान को सील करके कब्जा कमेटी को दिलवा दिया था। यह दुकान आज तक सील है, लेकिन इस खोखे के आसपास स्थित अन्य जगह का कब्जा पिछले चार साल का समय बीत जाने के बावजूद नगर परिषद थानेसर आज तक नहीं ले सकी।
चार साल से हाथ धरे बैठी परिषद
वर्ष 2009 में हाईकोर्ट ने भी इस भूमि का नगर परिषद को ही मालिक माना था। नगर के बीच इलाके में स्थित एक हजार गज से अधिक इस भूमि को पिछले चार वर्षों से राम भरोसे क्यों छोड़ा हुआ है? ये सवाल अब उठने लगे हैं। क्या नगर परिषद मिलीभगत से यह भूमि किसी ओर को देना चाहती है? और ऐसा किस कीमत पर हो रहा है? छोटी-छोटी बातों पर परिषद की बैठक में हो-हल्ला करने वाले नगर पार्षद चुप्पी क्यों साधे हुए हैं? यदि परिषद की भूमि यूं ही खुर्द-बुर्द होती रही तो भविष्य में नप के पास आमदन के स्रोत क्या होंगे?
करोड़ों रुपये की भूमि
नगर के जिस इलाके में यह एक हजार गज से अधिक जगह है, वहां कलेक्टर रेट भले हजारों में हो, लेकिन वास्तविक और मार्केट वैल्यू लाखों रुपये गज है। कुछ लोगों का कहना है कि यदि कब्जा करने वालों पर नगर परिषद इतना ही मेहरबान है तो ऐसे लोगों को परिषद कहीं भी दुकान अलॉट कर सकती है।
‘नोटिस दिया गया है, ढहाने के निर्देश ईओ देंगे’
नगर परिषद के बिल्डिंग इंस्पेक्टर अजय कुमार ने बताया कि मामला संज्ञान में आने के बाद शुक्रवार को नोटिस चस्पा किए गए हैं। कब्जा गिराने के लिए आदेश देना उनके कार्यक्षेत्र में नहीं है। नगर परिषद के एग्जीक्यूटिव आफिसर एमएस जगत के निर्देश पर ही कार्रवाई होगी।