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Fatehabad : गुरु घर से रिश्तों के साथ सुधर रहीं पाकिस्तान के नरोवाल जिले की आर्थिक परिस्थितियां, मिली पहचान

Wed, 31 Jan 2024 05:38 AM IST
दुष्यंत शर्मा कपिल शर्मा, फतेहाबाद
कपिल शर्मा, फतेहाबाद Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 31 Jan 2024 05:38 AM IST
सार

करतारपुर साहिब गुरुद्वारा भारतीय बॉर्डर से मात्र साढ़े चार किलोमीटर दूर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नरोवाल जिले के करतारपुर में स्थापित है। करतारपुर साहिब गुरुद्वारे ने नरोवाल जिले को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है।

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Economic conditions of Narowal district of Pakistan are improving with relations with Guru Ghar
करतारपुर साहिब गुरुद्वारा। - फोटो : फाइल

विस्तार

प्रथम पातशाही गुरु नानक देव के पावन सानिध्य का अहसास करवाता पाकिस्तान स्थित करतारपुर साहिब गुरुद्वारा रिश्तों के साथ-साथ आर्थिक परिस्थितियों को भी सुधार रहा है। करतारपुर साहिब गुरुद्वारा भारतीय बॉर्डर से मात्र साढ़े चार किलोमीटर दूर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नरोवाल जिले के करतारपुर में स्थापित है। करतारपुर साहिब गुरुद्वारे ने नरोवाल जिले को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है।

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गुरु नानक देव की समाधि पर अरदास करने हर महीने भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर बने कॉरिडोर से 15 हजार श्रद्धालु जाते हैं। प्रत्येक श्रद्धालु से पाकिस्तान सरकार 20 डॉलर फीस लेती है। इस तरह हर महीने दो करोड़ 49 लाख रुपये की आमदनी होती है। इस हिसाब से सालाना करीब 30 करोड़ रुपये की आमदनी भारत की तरफ से जाने वाले श्रद्धालुओं से होती है।
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भारतीय सीमा पर बने कॉरिडोर के अलावा पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों से भी श्रद्धालु इस गुरुद्वारे में पहुंचते हैं। रावी नदी के पास बने करतारपुर साहिब गुरुद्वारे को मूल रूप से गुरुद्वारा दरबार साहिब के नाम से जाना जाता है। सिखों का यह प्रमुख धार्मिक स्थल है, जहां गुरु नानक देव ने अपने जीवन के अंतिम 16 वर्ष बिताए थे।  
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सौम्य व्यवहार और शानदार सफाई व्यवस्था
करतारपुर साहिब गुरुद्वारे के गेट से लेकर अलग-अलग स्थानों पर कार्यरत कर्मचारियों का श्रद्धालुओं के साथ सौम्य व्यवहार दिल जीत लेता है। गुरुद्वारे के विशाल प्रांगण में शानदार सफाई व्यवस्था है। यहां गुरु नानक देवजी की कब्र और समाधि के अलावा कुआं भी है, जिसमें से खुद गुरु नानक देव पानी निकालते थे। इसी कुएं के पानी का प्रयोग वे खेती में भी करते थे।

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