विंटर प्लान फेल: दिवाली के बाद हरियाणा की हवा में घुला जहर, धारूहेड़ा फिर देश में सबसे प्रदूषित
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तमाम तैयारियों व एक नवंबर से लागू विंटर एक्शन प्लान के बावजूद हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ गए हैं। 20 अक्तूबर से 2 नवंबर तक हरियाणा का कोई न कोई शहर देशभर में सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल रहा है।
विस्तार
हरियाणा की हवा में दिवाली के बाद से जहर घुलने लगा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तमाम तैयारियों व एक नवंबर से लागू विंटर एक्शन प्लान के बावजूद हालात सुधरने के बजाय और बिगड़ गए हैं। 20 अक्तूबर से 2 नवंबर तक हरियाणा का कोई न कोई शहर देशभर में सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल रहा है। रविवार को धारूहेड़ा की वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 434 दर्ज किया गया जो खतरनाक श्रेणी में है। वहीं नौ अन्य शहरों की हवा भी बेहद खराब श्रेणी में दर्ज की गई है।
रविवार को देश के बेहद खराब श्रेणी में शामिल 23 शहरों में 9 हरियाणा के हैं। इनमें बहादुरगढ़ 313, बल्लभगढ़ 319, गुरुग्राम 357, जींद 314, कैथल 341, करनाल 348, कुरुक्षेत्र 344, पंचकूला 308 और यमुनानगर 320 शामिल हैं। इस श्रेणी में टॉप दो राजस्थान का भिवाड़ी 376 व राजधानी दिल्ली 366 हैं। एक नवंबर को रोहतक 389 एक्यूआई व 31 अक्तूबर को भिवानी एक्यूआई 406 के साथ देशभर में सबसे प्रदूषित रहा था। लगातार तीसरे दिन हरियाणा के ही शहर की हवा देश में सबसे दूषित है। खराब श्रेणी में भी छह शहर हैं। भिवानी का एक्यूआई 256, चरखीदादरी 288, मानेसर 289, नारनौल 216, पानीपत 288 व सोनीपत का 284 है।
कागजों पर सख्ती, जमीनी असर गायब
हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एक नवंबर से विंटर एक्शन प्लान लागू किया था। इसके तहत पराली जलाने, निर्माण कार्यों, औद्योगिक उत्सर्जन और धूल नियंत्रण के लिए सख्त कदम उठाने का दावा किया गया है। रात में गश्त (नाइट पेट्रोलिंग) बढ़ाने और पराली जलाने वालों पर कार्रवाई के आदेश दिए गए। परंतु एक दिन बाद ही आंकड़े बता रहे हैं कि प्लान का असर धरातल पर नजर नहीं आ रहा।
प्रदूषण बढ़ने के कारण
पीजीआई चंडीगढ़ में सामुदायिक चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर रविंद्र खैवाल ने बताया कि धारूहेड़ा औद्योगिक क्षेत्र होने और बॉर्डर क्षेत्र होने के कारण ज्यादा प्रदूषित चल रहा है। पराली जलाने के मामलों में भी वृद्धि हुई है। दिल्ली, पंजाब व राजस्थान की प्रदूषित हवा भी बॉर्डर जिलों को प्रभावित कर रही है।
बोर्ड ने कहा-पिछले साल के मुकाबले कम है प्रदूषण
प्रदूषण रोकने के लिए जिला स्तर पर अधिकारियों की ड्यूटी निर्धारित है। हालांकि पिछले साल के मुकाबले प्रदेश में प्रदूषण का स्तर कम है। किसी-किसी जिले में प्रदूषण का स्तर लगातार ज्यादा आने की वजह आ रही है कि वहां एक्यूआई मॉनिटरिंग मशीन उसी जगह लगी है, जहां प्रदूषण के कारण ज्यादा हैं, जो आसपास के क्षेत्र को नहीं प्रभावित कर रहे। -निर्मल कश्यप, एयर सेल प्रमुख, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।