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Haryana: सरपंच चुनाव का सुप्रीम कोर्ट में हुआ फैसला, हारा हुआ प्रत्याशी जीता, जानें क्या था मामला?
Thu, 14 Aug 2025 09:50 PM IST
शाहिल शर्मा
माई सिटी रिपोर्टर पानीपत
माई सिटी रिपोर्टर पानीपत
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Thu, 14 Aug 2025 09:50 PM IST
सार
ढाई साल की कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मोहित मलिक को विजेता घोषित कर दिया। सरपंच चुनाव का मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा था। ईवीएम में मिले मतों की गणना के बाद मोहित ने बीडीपीओ कार्यालय में शपथ ली।
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मोहित मलिक ने ली सरपंच पद की शपथ
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पानीपत के बुलाना लाखू गांव की चौधर (सरपंच) पद पर ढाई साल की कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मोहित मलिक को विजेता घोषित कर दिया। वीरवार को मोहित ने सरपंच पद की शपथ ले ली। सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम में मिले मतों की गणना के बाद 51 वोटों से मोहित के पक्ष में फैसला सुनाया था। इस फैसले से पहले अब तक कुलदीप सरपंच की भूमिका निभा रहे थे।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, दिपांकर दत्ता और नोंग्मीकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने इस मामले में 11 अगस्त को अपना फैसला दिया था। फैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए थे दो दिन के भीतर मोहित के सरपंच बनने की आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी करने के साथ शपथ दिलाई जाए। डीडीपीओ राजेश शर्मा ने उनको वीरवार को इसराना बीडीपीओ कार्यालय में शपथ दिलवाई।
गांव में हुआ था हंगामा
पंचायती राज संस्थाओं का चुनाव दो नवंबर 2023 को कराया था। ग्राम पंचायत बुआना लाखू में सरपंच पद के लिए मोहित मलिक और कुलदीप में टक्कर थी। पीठासीन अधिकारी ने 51 वोटों से कुलदीप को विजयी घोषित कर दिया था। ग्रामीणों ने हंगामा किया तो प्रशासन की देखरेख में देर रात को पुन: गणना की गई। जिसमें मोहित मलिक को सरपंच घोषित किया। पीठासीन अधिकारी तब तक कुलदीप को सरपंच पद का नियुक्ति पत्र दे चुके थे। उन्होंने मोहित मलिक के नाम का भी सरपंच पद का नियुक्ति पत्र दे दिया। नियमानुसार पीठासीन अधिकारी एक बार में एक को ही नियुक्ति पत्र दे सकते हैं। कुलदीप सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने कार्यकाल में गांव में विकास कराया है। वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं।
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सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, दिपांकर दत्ता और नोंग्मीकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने इस मामले में 11 अगस्त को अपना फैसला दिया था। फैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए थे दो दिन के भीतर मोहित के सरपंच बनने की आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी करने के साथ शपथ दिलाई जाए। डीडीपीओ राजेश शर्मा ने उनको वीरवार को इसराना बीडीपीओ कार्यालय में शपथ दिलवाई।
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गांव में हुआ था हंगामा
पंचायती राज संस्थाओं का चुनाव दो नवंबर 2023 को कराया था। ग्राम पंचायत बुआना लाखू में सरपंच पद के लिए मोहित मलिक और कुलदीप में टक्कर थी। पीठासीन अधिकारी ने 51 वोटों से कुलदीप को विजयी घोषित कर दिया था। ग्रामीणों ने हंगामा किया तो प्रशासन की देखरेख में देर रात को पुन: गणना की गई। जिसमें मोहित मलिक को सरपंच घोषित किया। पीठासीन अधिकारी तब तक कुलदीप को सरपंच पद का नियुक्ति पत्र दे चुके थे। उन्होंने मोहित मलिक के नाम का भी सरपंच पद का नियुक्ति पत्र दे दिया। नियमानुसार पीठासीन अधिकारी एक बार में एक को ही नियुक्ति पत्र दे सकते हैं। कुलदीप सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने कार्यकाल में गांव में विकास कराया है। वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं।
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ईवीएम सही, वोट इधर से उधर जोड़ी
अब तक की जांच में पीठासीन अधिकारी की गलती सामने आई थी। बुआना लाखू गांव में पंचायत चुनाव के दौरान सरपंच पद के लिए 3767 वोट पोल हुए थे। इनमें कुलदीप सिंह को 1000 वोट मिले थे, जबकि मोहित मलिक को 1051 वोट मिले थे। पीठासीन अधिकारी ने मोहित के 51 वोट कुलदीप के खाते में चढ़ा दिए थे। इसे दोनों प्रत्याशियों के परिणाम की अदला-बदली मानी गई थी। इसकी जिला स्तर पर भी जांच की गई थी। जिसमें मोहित के 51 वोट कुलदीप के खाते में देने की बात सामने आई थी। यही बात सुप्रीम कोर्ट छह अगस्त में ईवीएम की दोबारा गणना में सामने आया। उस समय भी पीठासीन अधिकारी ने पहले कुलदीप सिंह और फिर मोहित मलिक को सरपंच घोषित कर दिया था।
ऐसे चला सरपंच का मामला
मोहित मलिक ने बताया कि उनके पिता बाल पहलवान ने 15 साल पहले सरपंच का चुनाव लड़ा था। वे इसमें हार गए थे। वह स्नातक की पढ़ाई के बाद ठेकेदारी करता था। परिवार के लोगों ने उनको सरपंच के लिए तैयार किया। उनके सामने 60 वर्षीय कुलदीप थे। उनके वॉर्ड व बूथ पर ही कुलदीप को विजयी घोषित किया तो उनको शक हुआ। मौके पर गणना के समय गड़बड़ी सामने आ गई थी। इसमें 51 वोटों की हेराफेरी मिली थी। पीठासीन अधिकारी ने उनको नियुक्ति पत्र दे दिया। कुलदीप ने हाईकोर्ट से स्टे ले ली।
अब तक की जांच में पीठासीन अधिकारी की गलती सामने आई थी। बुआना लाखू गांव में पंचायत चुनाव के दौरान सरपंच पद के लिए 3767 वोट पोल हुए थे। इनमें कुलदीप सिंह को 1000 वोट मिले थे, जबकि मोहित मलिक को 1051 वोट मिले थे। पीठासीन अधिकारी ने मोहित के 51 वोट कुलदीप के खाते में चढ़ा दिए थे। इसे दोनों प्रत्याशियों के परिणाम की अदला-बदली मानी गई थी। इसकी जिला स्तर पर भी जांच की गई थी। जिसमें मोहित के 51 वोट कुलदीप के खाते में देने की बात सामने आई थी। यही बात सुप्रीम कोर्ट छह अगस्त में ईवीएम की दोबारा गणना में सामने आया। उस समय भी पीठासीन अधिकारी ने पहले कुलदीप सिंह और फिर मोहित मलिक को सरपंच घोषित कर दिया था।
ऐसे चला सरपंच का मामला
मोहित मलिक ने बताया कि उनके पिता बाल पहलवान ने 15 साल पहले सरपंच का चुनाव लड़ा था। वे इसमें हार गए थे। वह स्नातक की पढ़ाई के बाद ठेकेदारी करता था। परिवार के लोगों ने उनको सरपंच के लिए तैयार किया। उनके सामने 60 वर्षीय कुलदीप थे। उनके वॉर्ड व बूथ पर ही कुलदीप को विजयी घोषित किया तो उनको शक हुआ। मौके पर गणना के समय गड़बड़ी सामने आ गई थी। इसमें 51 वोटों की हेराफेरी मिली थी। पीठासीन अधिकारी ने उनको नियुक्ति पत्र दे दिया। कुलदीप ने हाईकोर्ट से स्टे ले ली।
गांव की सरपंची डेढ़ साल तक बीडीपीओ के पास रही। डिस्टि्रक चुनाव ट्रिब्यूनल ने हाईकोर्ट का फैसला आने तक 2024 में कुलदीप को सरपंच बनाने का फैसला दिया। यहां केस लगातार चल रहा था। कुलदीप की सुप्रीम कोर्ट ने अपील खारिज कर दी और समय तय कर दिया। जिला कोर्ट में मतों की गणना का आदेश दिया। कुलदीप की अपील पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी। वह इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चले गए। सुप्रीम कोर्ट ने अपने सामने छह अगस्त को ईवीएम की गणना की। जिसमें गणना सही मिली। जबकि परिणाम बदले गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त को उनको सरपंच घोषित किया।
बुआना लाखू ग्राम पंचायत के सरपंच का मामला कोर्ट में चल रहा था। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार मोहित मलिक को वीरवार को सरपंच पद की शपथ दिला दी है। -राजेश शर्मा, डीडीपीओ, पानीपत।
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बुआना लाखू ग्राम पंचायत के सरपंच का मामला कोर्ट में चल रहा था। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार मोहित मलिक को वीरवार को सरपंच पद की शपथ दिला दी है। -राजेश शर्मा, डीडीपीओ, पानीपत।
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