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पुलिस को हाइटेक बनाएगा डीआरडीओ: बच नहीं पाएंगे साइबर अपराधी, प्रशासनिक कार्यालयों के कंप्यूटर नहीं होंगे हैक

Wed, 10 May 2023 11:44 AM IST
नवीन दलाल बृजेन्द्र गौड़, चंडीगढ़
बृजेन्द्र गौड़, चंडीगढ़ Published by: नवीन दलाल Updated Wed, 10 May 2023 11:44 AM IST
सार

चंडीगढ़ के एसपी (क्राइम एवं साइबर) केतन बंसल ने कहा कि इस सेंटर को पुलिस खुद चलाएगी। उन्होंने बताया कि लगभग दो दिशा से इस सेंटर को बनाने के प्रयास चल रहे थे। चंडीगढ़ के लिए यह बड़ी उपलब्धि है। डिफेंस रिसर्च एवं डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) शुरू में सेंटर को संचालित करेगा।

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DRDO will make police hi tech, Cyber criminals will able to escape
cyber crime laptop - फोटो : istock

विस्तार

चंडीगढ़ सेक्टर-18 में जल्द ही देश का पहला साइबर ऑपरेशंस एंड सिक्योरिटी बनकर तैयार होगा। इससे चेहरा अपराधियों को पकड़ना और आसान हो जाएगा। साथ ही अपराधी प्रशासनिक कार्यालयों के कंप्यूटर सिस्टम भी हैक नहीं कर सकेंगे।

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चंडीगढ़ में 88 करोड़ की लागत से बन रहा देश का पहला साइबर ऑपरेशंस एंड सिक्योरिटी सेंटर
चंडीगढ़ के एसपी (क्राइम एवं साइबर) केतन बंसल ने कहा कि इस सेंटर को पुलिस खुद चलाएगी। उन्होंने बताया कि लगभग दो दिशा से इस सेंटर को बनाने के प्रयास चल रहे थे। चंडीगढ़ के लिए यह बड़ी उपलब्धि है। डिफेंस रिसर्च एवं डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीआरडीओ) शुरू में सेंटर को संचालित करेगा और पुलिस के जवानों को प्रशिक्षण देकर इसे पुलिस विभाग के हवाले करेगा।
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हैकिंग की स्थिति में अलर्ट जारी करेगा
इस सेंटर में एक ट्रेनिंग लैब भी बनाई जाएगी। यह सेंटर हैकर्स से निपटने में अहम रोल अदा करेगा। चंडीगढ़ प्रशासन के विभिन्न विभागों से जुड़ी जानकारी को सेंटर से जोड़ा जाएगा। ऐसे में विभागों के कंप्यूटर आदि को हैक करने की कोशिशों को रोका जा सकेगा। कंप्यूटर को एक ऑपरेटिंग सिस्टम (ओएस) भी जोड़ा जाएगा जो हैकिंग की स्थिति में अलर्ट जारी करेगा। वहीं कई प्रकार के डाटा के विश्लेषण के साथ जटिल साइबर केसों को सुलझाया जाएगा।
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गृह मंत्रालय से राशि जारी
सेंटर का निर्माण 88 करोड़ रुपये से होना है। इस बजट में से 22.35 करोड़ रुपये गृह मंत्रालय से जारी किए जा चुके हैं। यह रकम आगे डीआरडीओ को भेज दी गई है। प्रशासक बीएल पुरोहित की मंजूरी के बाद इस दिशा में काम शुरू हुआ है।

प्रिडिक्टिव पुलिसिंग पर होगा काम
सेंटर में एक सोशल मीडिया सेल भी बनाया जाएगा। इसके जरिए किसी प्रकार की अफवाह या जानकारी पर शुरू से नजर रखी जाएगी और इसे पुलिस के हेल्पलाइन नंबर 112 के साथ जोड़ा जाएगा। ऐसे में पुलिस तुरंत कार्रवाई कर पाएगी। सेंटर प्रिडिक्टिव पुलिसिंग पर भी काम करेगा। इसके तहत उन जगहों और रैली, धरना आदि पर खास नजर रखी जाएगी, जहां अपराध होने की आशंका अधिक हो। ऐसे में पुलिस तेजी से प्रतिक्रिया कर पाएगी। इसके जरिए पुलिस को पहले ही बता दिया जाएगा कि किस जगह गश्त करने से अपराध को रोका जा सकता है।

डीआरडीओ के इन-हाउस सॉफ्टवेयर लगेंगे

पुलिस के एक बड़े अधिकारी ने बताया कि जिस जगह यह सेंटर बनाया जाएगा, वहां ज्यादा निर्माण कार्य की संभावना नहीं है और ज्यादातर खर्च सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर पर ही आएगा। डीआरडीओ के कई अपने इन-हाउस सॉफ्टवेयर ही हैं, जो यहां लगेंगे। छह महीने के भीतर यह सेंटर बन कर तैयार हो जाएगा। सेंटर चेहरा पहचान प्रणाली (फेशियल रेक्गनिशन सिस्टम) पर भी काम करेगा। संदिग्ध और आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों का डाटा शहर में लगाए गए हाई-रेजोल्यूशन कैमरों से जोड़ा जाएगा। ऐसे में किसी भी संदिग्ध की जानकारी प्राप्त होते ही अलर्ट जारी किया जाएगा। इसके बाद पुलिस उसे तुरंत पकड़ पाएगी।

पड़ोसी राज्यों को भी मिलेगी मदद
इस सेंटर के बनने से पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों को भी साइबर अपराधों को सुलझाने और जानकारी का आदान-प्रदान करना आसान होगा। बता दें कि चंडीगढ़ ज्वाइंट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन टीम का नोडल सेंटर है। गृह मंत्रालय ने इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर के तहत इस टीम को बनाया था। इसका मकसद साइबर अपराधों और अपराधियों से जुड़ा डाटा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच साझा करना था। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायतों का विश्लेषण करने के आधार पर चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा (मेवात बेल्ट), पंजाब, उत्तराखंड, झारखंड (जामतारा बेल्ट), जम्मू एंव कश्मीर तथा लद्दाख के लिए कोऑर्डिनेशन टीमें बनाई गई थीं।

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