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चार मिनट से ज्यादा के भाषण पर आठ मिनट हंगामा
जींद/ब्यूरो
Updated Mon, 23 Sep 2013 09:35 PM IST
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शहीद दिवस पर कांग्रेस की नीतियां लोगों तक पहुंचाने के लिए सोमवार को आयोजित की गई बैठक में कांग्रेसी आपस में ही भिड़ गए। जुबान से शुरू हुई कहासुनी हाथापाई तक जा पहुंची। बात इतने तक भी नहीं रुकी। कुछ कार्यकर्ताओं ने कुर्सी उठाकर एक दूसरे पर फेंकने के लिए प्रयास किया। लेकिन कुछ वरिष्ठ कांग्रेसियों ने बीच बचाव करवाकर उन्हें शांत करवाया।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक सुबह 11 बजे पार्टी कार्यालय में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की बैठक शुरू हुई। बैठक की अध्यक्षता जिला प्रधान जसबीर देशवाल कर रहे थे। करीब पौने बारह बजे जिला महासचिव राजेंद्र सिंह चहल को बोलने के लिए चार मिनट का समय दिया गया। लेकिन उन्होंने अपना भाषण निर्धारित समय में पूरा करने की बजाय अधिक समय लगा दिया। इस पर वरिष्ठ नेता राजबीर कटारिया ने उनका विरोध कर दिया। कटारिया ने महासचिव से कहा कि जब चार-पांच मिनट का समय निर्धारित है तो ज्यादा समय क्यों लिया जा रहा है।
इतना सुनते ही चहल बिफर गए और कहा कि कटारिया कौन होते हैं, समय निर्धारित करने वाले। इस पर कटारिया का पारा चढ़ गया और वह महासचिव की तरफ लपके। दोनों की हाथापाई हो गई। उन्होंने कहा कि वक्ता ज्यादा है तो फिर समय ज्यादा लेने वाले राजेंद्र कौन हैं।
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यह सिलसिला करीब सात आठ मिनट तक चलता रहा। इसके बाद जिलाध्यक्ष जसबीर देशवाल ने महासचिव राजेंद्र सिंह चहल को शांत रहने के लिए सहमत किया। इस तरह से कांग्रेसियों के आपस में भिड़ने की कोई जिले में कोई पहली घटना नहीं है। तकरीबन एक महीने पहले कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष फूलचंद मुलाना के सामने भी कांग्रेसी आपस में भिड़ गए थे और स्थिति यहां तक हो चली थी कि मुलाना को बैठक में बोलने नहीं दिया था।
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पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक सुबह 11 बजे पार्टी कार्यालय में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं की बैठक शुरू हुई। बैठक की अध्यक्षता जिला प्रधान जसबीर देशवाल कर रहे थे। करीब पौने बारह बजे जिला महासचिव राजेंद्र सिंह चहल को बोलने के लिए चार मिनट का समय दिया गया। लेकिन उन्होंने अपना भाषण निर्धारित समय में पूरा करने की बजाय अधिक समय लगा दिया। इस पर वरिष्ठ नेता राजबीर कटारिया ने उनका विरोध कर दिया। कटारिया ने महासचिव से कहा कि जब चार-पांच मिनट का समय निर्धारित है तो ज्यादा समय क्यों लिया जा रहा है।
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इतना सुनते ही चहल बिफर गए और कहा कि कटारिया कौन होते हैं, समय निर्धारित करने वाले। इस पर कटारिया का पारा चढ़ गया और वह महासचिव की तरफ लपके। दोनों की हाथापाई हो गई। उन्होंने कहा कि वक्ता ज्यादा है तो फिर समय ज्यादा लेने वाले राजेंद्र कौन हैं।
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यह सिलसिला करीब सात आठ मिनट तक चलता रहा। इसके बाद जिलाध्यक्ष जसबीर देशवाल ने महासचिव राजेंद्र सिंह चहल को शांत रहने के लिए सहमत किया। इस तरह से कांग्रेसियों के आपस में भिड़ने की कोई जिले में कोई पहली घटना नहीं है। तकरीबन एक महीने पहले कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष फूलचंद मुलाना के सामने भी कांग्रेसी आपस में भिड़ गए थे और स्थिति यहां तक हो चली थी कि मुलाना को बैठक में बोलने नहीं दिया था।