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क्लेम रिजेक्ट में खेल पर नपेंगे बीमा कंपनी के अधिकारी भी

Fri, 11 Oct 2013 09:24 PM IST
जींद/ब्यूरो
जींद/ब्यूरो Updated Fri, 11 Oct 2013 09:24 PM IST
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claim rejected, officers get penalty
जिला उपभोक्ता फोरम ने एक मामले की सुनवाई करते हुए बीमा कंपनी को 2 लाख 75 हजार 500 रुपये की क्लेम राशि 10 फीसदी ब्याज सहित अदा करने के आदेश दिए। ब्याज भी उस दिन से देना होगा, जिस दिन बीमा कंपनी ने क्लेम रिजेक्ट किया था। इसके अलावा अदालत ने बीमा कंपनी के अधिकारियों पर भी अलग से जुर्माना ठोका। क्लेम रिजेक्ट करने वाले अधिकारियों को 30 हजार रुपये का जुर्माना अदा करना होगा।
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इस केस के दौरान फोरम ने टिप्पणी की कि बीमा कंपनियाें ने अपना यह ध्येय बना लिया है कि किस तरह से उपभोक्ता को ज्यादा से ज्यादा परेशान किया जाए। व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने के लिए अब यह जरूरी हो गया है कि अधिकारियों पर नियमानुसार जुर्माना किया जाए।
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भटनागर कालोनी के वीरेंद्र सिंह ने 12 जुलाई को स्थायी लोक अदालत में केस दायर किया था। इसमें उसने कहा था कि उसने 8 जून 2012 को अपनी मारुति स्विफ्ट कार के लिए ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी से बीमा पॉलिसी खरीदी। पॉलिसी 7 जून, 2013 तक मान्य थी।
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23 सितंबर, 2012 को इंटल गांव के पास उसकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई और इसमें उसको भी चोट आई। इसमें उसके साथ उसका दोस्त भी था। उसने पूरे दस्तावेज जमा करवा बीमा कंपनी से क्लेम मांगा। कंपनी ने 2 लाख 75 हजार 500 रुपये बीमित राशि देने की बात कही और उससे सहमति भी ले ली।

लेकिन फिर कंपनी ने पैसा देने से मना कर दिया। वीरेंद्र सिंह ने कोर्ट की शरण ली। कोर्ट ने पूरे मामले की सुनवाई 3 माह में ही पूरी कर बीमा कंपनी को दोषी पाया। कोर्ट ने बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह उपभोक्ता को पूरे 2 लाख 75 हजार 500 रुपये की रकम 10 फीसदी ब्याज सहित अदा करे। ब्याज भी उस दिन से देना होगा, जिस दिन बीमा कंपनी ने क्लेम रिजेक्ट किया था।


इसके अलावा अदालत ने बीमा कंपनी के अधिकारियों पर भी अलग से जुर्माना ठोका। क्लेम रिजेक्ट करने वाले अधिकारियों को 30 हजार रुपये का जुर्माना अदा करना होगा।
उपभोक्ता के वकील विनोद बंसल ने बताया कि यह फैसला गैर जिम्मेदार अधिकारियों और पटरी से उतरे सिस्टम को सुधारने में अहम भूमिका अदा करेगा।
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