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Charkhi Dadri News: क्यूआर कोड स्कैन कर पता लगा सकते हैं एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों की प्रमाणिकता

Tue, 14 May 2024 02:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Tue, 14 May 2024 02:44 AM IST
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You can find out the authenticity of NCERT textbooks by scanning the QR code.
 शहर स्थित बुक शॉप से पुस्तक खरीदते ग्राहक। संवाद
क्यूआर कोड स्कैन कर पता लगा सकते हैं एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों की प्रमाणिकता
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संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। विद्यार्थी और अभिभावक एनसीईआरटी की पाठ्य पुस्तकों की प्रमाणिकता की पहचान क्यूआर कोड से कर सकते हैं। आजकल बाजारों में नकली व निजी प्रकाशकों की पुस्तकों की भरमार है और इसके मद्देनजर क्यूआर कोर्ड स्कैन करना सही विकल्प है।



सरकार व विभाग की ओर से सभी स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकें पढ़ाए जाने के निर्देश हैं। एक अप्रैल से नया शैक्षिक सत्र शुरू हो चुका है। पुस्तकों की बिक्री भी इस समय बढ़ रही है। बाजारों, प्राइवेट शिक्षण संस्थाओं में एनसीईआरटी की पुस्तकों के बजाय प्राइवेट पब्लिशर की किताबें पढ़ाने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। कई सालों से यह सिलसिला चला आ रहा है। प्राइवेट शिक्षण संस्थाओं में निजी डीलर सीधे तौर पर कमिशन पर अनुबंध कर लेते हैं। शिक्षा विभाग व सरकार इस मामले में सख्ती से पेश आ रही है। एनसीईआरटी की पुस्तकों की पहचान क्यूआर कोड से आसानी से की जा सकती है। कई पब्लिशर एनसीईआरटी की तर्ज पर वैसी ही पुस्तकें तैयार कर लेते हैं, जिनकी पहचान नहीं हो पाती है। आजकल मूल पुस्तक के बजाय गाइड एवं सॉल्व पुस्तकों का भी ज्यादा कैरेज है। निजी पब्लिशर्स ने बाजारों में गाइड बिक्री के लिए उतार रखी हैं। मूल पुस्तक के बिना विद्यार्थी को टॉपिक की गहराई का संपूर्ण ज्ञान नहीं हो पाता है। विद्यार्थी गाइड से प्रश्न के उत्तर रटने का प्रयास करते हैं, जिससे वे मूल ज्ञान से भटक जाते हैं।
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विभाग भी सतर्क, उड़नदस्ता मारता है छापे



शिक्षा विभाग भी इसके लिए सतर्क है। समय-समय पर पुस्तकों की जांच की जाती है। मुख्यमंत्री उड़नस्ता भी समय-समय पर पुस्तक भंडार पर छापा कार्रवाई करता है। जिले में मौजूदा सत्र में 29670 विद्यार्थी सरकारी और करीब 42 हजार प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे हैं। जिले में 368 सरकारी व करीब पौने दो सौ प्राइवेट स्कूल हैं।
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स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकें ही पढ़ाए जाने का प्रावधान है। सभी शिक्षण संस्था प्रबंधक इस पर विशेष ध्यान दें। विद्यार्थी मूल पुस्तक का अध्ययन करें। क्यू आर कोड स्कैन करने से पुस्तक की असलियत का पता चल सकता है। - ज्ञानेंद्र सिंह, कार्यकारी डीईओ, चरखी दादरी
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