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बैंक बैलेंस व गाड़ियों का फर्जी मालिक बन लिया गेहूं उठान का टेंडर, ठेकेदार पर केस दर्ज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 21 Apr 2022 11:27 PM IST
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Wheat lifting tender became the fake owner of bank balance and vehicles, case filed against the contractor
संवाद न्यूज एजेंसी
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चरखी दादरी। खरीद सीजन में गेहूं का उठान करने वाली एजेंसी के ठेकेदार पर एक फर्म मालिक ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे टेंडर लेने का आरोप लगाया है। इस संबंध में उसने एसपी कार्यालय में शिकायत दी थी जिसके आधार पर सिटी थाना पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है। पुलिस का तर्क है कि मामले की जांच की जाएगी और जो तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर कार्रवाई होगी।
एसपी कार्यालय में सात अप्रैल को दी शिकायत में कनीना रोड स्थित शिव रोड लाइन्स फर्म के संचालक विपिन मित्तल ने बताया कि छह मार्च 2021 को डीएफएससी ने लेबर और ट्रांसपोर्ट कांट्रेक्ट की निविदा एक अखबार में जारी की थी। इसमें इस कार्य के लिए एजेंसियों से आवेदन आमंत्रित किए गए थे। विपिन मित्तल ने बताया कि राजस्थान निवासी एक व्यक्ति ने भी इसके लिए आवेदन किया था, जबकि वह टेंडर में दी गई बैंक बैलेंस और गाड़ियों का मालिक होने संबंधी शर्तें पूरी नहीं करता था। बैंक खाते में क्रेडिट लिमिट 15 लाख थी जबकि उसने कागजात में हेराफेरी कर इसे डेढ़ करोड़ दिखा दिया।
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शिकायतकर्ता का आरोप है कि बैंक द्वारा दिए गए सोलवेंसी सर्टिफिकेट में भी उसने कांट-छांट करके हेराफेरी की और अपने लेन-देन को ज्यादा दिखा दिया। इसके अलावा ठेकेदार ने ट्रांसपोर्ट के लिए गाड़ियों की फर्जी लिस्ट दी, ताकि कांट्रेक्ट की शर्तों को पूरा कर सके। शिकायतकर्ता का कहना है कि उक्त ठेकेदार ने अधिकारियों से मिलीभगत से ठेका लिया है।
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फर्जी आरसी तैयार करवाने और सरकार को भी चूना लगाने का आरोप
शिकायतकर्ता का कहना है कि शर्त के अनुसार अगर ठेकेदार के पास गाड़ियां कम पड़ती हैं तो उसे प्रति गाड़ी सरकार को 60 हजार रुपये देने होते हैं। अधिकारियों की मिलीभगत से ठेकेदार ने सरकार को चूना लगाया है। शिकायतकर्ता के अनुसार 47 गाड़ियों की जो सूची सौंपी गई थी उसमें से एक भी ठेकेदार के नाम पर नहीं है। कुछ में तो चेसिस व इंजन नंबर भी एक ही दिया गया है और इसके लिए फर्जी आरसी तैयार करवाई गई।
गेहूं के उठान का 1.25 करोड़ रुपये बकाया : मित्तल
शिकायतकर्ता विपिन मित्तल का कहना है कि उनकी फर्म ने भी उठान कार्य के लिए उक्त ठेकेदार को गाड़ियां उपलब्ध करवाई। उनकी गाड़ियों से गेहूं का उठान कर गोदाम तक पहुंचाया गया और इसके सुबूत के तौर पर उनके पास वेयरहाउस की पर्चियां हैं। इसकी एवज में उनकी एक करोड़ 25 लाख रुपये भुगतान राशि बनती थी, लेकिन ठेकेदार ने यह राशि नहीं दी। रुपये मांगने पर धमकी दी गई।
विचार-विमर्श के बाद कमेटी देती है ठेका
जानकारी के मुताबिक लेबर एवं ट्रांसपोर्ट कांट्रेक्ट देने के लिए एक कमेटी गठित की जाती है। इसमें फूड एंड सप्लाई विभाग के अलावा डीसी ऑफिस, वेयर हाउस व हैफेड के अधिकारी शामिल होते हैं। यह कमेटी ही तसल्ली के बाद कांट्रेक्ट पर मुहर लगाती है।

एसपी कार्यालय में इस संबंध में शिकायत सौंपी गई थी। पुलिस ने इस पर संज्ञान लेते हुए ठेकेदार के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है। मामले की जांच की जाएगी और उसके अनुसार ही आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
- बीर सिंह, सिटी थाना प्रभारी
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