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Charkhi Dadri News: छह करोड़ की परियोजना से गांव भागवी के लोगों को मिलेगी जलभराव से निजात
Sat, 17 May 2025 01:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sat, 17 May 2025 01:13 AM IST
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गांव भागवी में खेतों से बिछाई जा रही पाइप लाइन। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। गांव भागवी में दो दशक से चली आ रही खेतों में जलभराव की समस्या का 6 करोड़ के बजट से अब स्थायी तौर पर समाधान होगा। खासकर मानसून के मौसम में यह गांव सबसे ज्यादा प्रभावित रहा है।
गांव में करीब 500 एकड़ क्षेत्र में हर साल जलभराव होता है। प्रतिवर्ष किसान एक करोड़ का नुकसान झेलते हैं। इसके मद्देनजर अब सिंचाई विभाग पाइपलाइन डालकर समस्या का समाधान करेगा।
भागवी में अब गांव की सीमा से 10 इंच चौड़ी पाइपलाइन बिछाई जा रही है। इसके माध्यम से पानी की निकासी बधवाना डिस्ट्रीब्यूटरी में की जाएगी। वैसे तो जलभराव वाले कई गांवों में पानी निकासी की व्यवस्था की जा रही है। सबसे ज्यादा बजट गांव भागवी पर ही खर्च होने जा रहा है। यहां अलग-अलग भागाें से पाइपलाइनें बिछाई जा रही हैं। ताकि, गांव के चारों ओर स्थित रकबे से पानी की निकासी आसानी हो सके।
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इस गांव में रबी के मौसम में गेहूं की बिजाई ज्यादा मात्रा में होती है। सरसों की बिजाई कम होती है। इसी प्रकार, खरीफ के मौसम में किसान मजबूरीवश धान की रोपाई करते हैं। कारण यह कि जलभराव होने पर अन्य फसलें खराब हो जाती हैं।
ऐसे में किसान पर दोहरी मार पड़ती है। किसान की खरीफ के मौसम की फसल जलभराव से खत्म हो जाती है। दिसंबर माह तक जलभराव बने रहने की वजह से अगली रबी की फसल की बिजाई भी पूरे रकबे में नहीं हो पाती है। गांव के अधिकतर लोग खेती-बाड़ी करते हैं। ऐसे में खेती यानी आजीविका को बचाना जरूरी हो गया था।
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चरखी दादरी। गांव भागवी में दो दशक से चली आ रही खेतों में जलभराव की समस्या का 6 करोड़ के बजट से अब स्थायी तौर पर समाधान होगा। खासकर मानसून के मौसम में यह गांव सबसे ज्यादा प्रभावित रहा है।
गांव में करीब 500 एकड़ क्षेत्र में हर साल जलभराव होता है। प्रतिवर्ष किसान एक करोड़ का नुकसान झेलते हैं। इसके मद्देनजर अब सिंचाई विभाग पाइपलाइन डालकर समस्या का समाधान करेगा।
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भागवी में अब गांव की सीमा से 10 इंच चौड़ी पाइपलाइन बिछाई जा रही है। इसके माध्यम से पानी की निकासी बधवाना डिस्ट्रीब्यूटरी में की जाएगी। वैसे तो जलभराव वाले कई गांवों में पानी निकासी की व्यवस्था की जा रही है। सबसे ज्यादा बजट गांव भागवी पर ही खर्च होने जा रहा है। यहां अलग-अलग भागाें से पाइपलाइनें बिछाई जा रही हैं। ताकि, गांव के चारों ओर स्थित रकबे से पानी की निकासी आसानी हो सके।
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इस गांव में रबी के मौसम में गेहूं की बिजाई ज्यादा मात्रा में होती है। सरसों की बिजाई कम होती है। इसी प्रकार, खरीफ के मौसम में किसान मजबूरीवश धान की रोपाई करते हैं। कारण यह कि जलभराव होने पर अन्य फसलें खराब हो जाती हैं।
ऐसे में किसान पर दोहरी मार पड़ती है। किसान की खरीफ के मौसम की फसल जलभराव से खत्म हो जाती है। दिसंबर माह तक जलभराव बने रहने की वजह से अगली रबी की फसल की बिजाई भी पूरे रकबे में नहीं हो पाती है। गांव के अधिकतर लोग खेती-बाड़ी करते हैं। ऐसे में खेती यानी आजीविका को बचाना जरूरी हो गया था।