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जलघर टैंक में पहुंचने से पहले ही जन स्वास्थ्य विभाग के नाले से चोरी हो रहा नहरी पानी
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जलघर का वाटर स्टोरेज टैंक।
- फोटो : CharkhiDadri
जलघर के मेन नालेे से किसानों द्वारा पानी की चोरी करने की वजह से शहर के मेन जलघर में पानी नहीं पहुंच पा रहा है। जनस्वास्थ्य विभाग ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को पानी की चोरी रुकवाने के लिए पत्र लिखा है। नहरों में पिछले 15 दिनों से लगातार पानी चल रहा है, लेकिन पानी की चोरी होने पर वाटर टैंक नहीं भर पा रहे हैं। विभाग के अधिकारी बार-बार किसानों को पानी की चोरी करने से रोकते हैं, लेकिन बारिश न होने कारण किसान सिंचाई के लिए पानी की चोरी करने से बाज नहीं आ रहे हैं।
शहर में वैसे ही पेयजल संकट बना रहता है। अब नहरों में पानी छोड़ने के बाद भी जलघर तक नहीं पहुंच पा रहा है। शहर के मेन चंपापुरी जलघर में लोहारू नहर से माइनर एवं नाले के जरिये पानी डाला जाता है। नहर से जलघर तक लंबाई काफी है। रास्ते में किसानों के खेत पड़ते हैं। इन किसानों ने धान व अन्य फसलों की बिजाई कर रखी है। पिछले कई दिनों से बारिश न होने के कारण फसलों में सिंचाई की जरूरत है। ऐसे में किसान जलघर को जाने वाली माइनर में से साइफन व इंजन आदि के जरिये पानी का उठान कर रहे हैं। इसकी वजह से पानी जलघर में नहीं पहुंच पाता। चंपापुरी जलघर में चार वाटर टैंक बने हुए हैं, जबकि 15 दिनों में दो ही टैंक भर पाते हैं। जन स्वास्थ्य विभाग के नाले से नहरी पानी चोरी होने के कारण अन्य दो टैंक खाली रह जाते हैं।
जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की नहीं सुनतेे
जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारी आए दिन साइट पर जाकर इन किसानों को पानी की चोरी करने से रोकते हैं, लेकिन किसान मान नहीं रहे हैं। खासकर रात के समय पानी का उठान किया जा रहा है। जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारी रात के समय भी साइट का दौरा कर रहे हैं। लेकिन किसान अधिकारियों के लौटने पर पीछे से फिर पाइप व इंजन आदि लगाकर पानी का उठान कर लेते हैं।
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सिंचाई विभाग से मांगी मदद द्भअब जनस्वास्थ्य विभाग ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से इसमें हस्तक्षेप करने की मंाग के लिए पत्र लिखा है। पत्र के माध्यम से नहरी पानी की चोरी पर अंकुश लगाने की बात कही गई है, ताकि जलघर में पानी डाला जा सके। शहर के इस मेन चंपापुरी जलघर की पेयजल क्षमता 2450 लाख लीटर है। वैसे ही शहर में पानी की स्टोरेज क्षमता मात्र 10-12 दिन की है। पानी की स्टोरेज क्षमता कम होने की वजह से शहर में एक दिन छोड़कर पानी सप्लाई किया जा रहा है।
जनस्वास्थ्य विभाग के जेई सवंद्र सिंह ने कहा कि जलघर के मेन नाले से किसान पानी की चोरी कर रहे हैं। हमने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को पत्र लिखा है, ताकि पानी की चोरी रुकवाई जा सके। वे लगातार साइट पर जाकर निगरानी भी कर रहे हैं।
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शहर में वैसे ही पेयजल संकट बना रहता है। अब नहरों में पानी छोड़ने के बाद भी जलघर तक नहीं पहुंच पा रहा है। शहर के मेन चंपापुरी जलघर में लोहारू नहर से माइनर एवं नाले के जरिये पानी डाला जाता है। नहर से जलघर तक लंबाई काफी है। रास्ते में किसानों के खेत पड़ते हैं। इन किसानों ने धान व अन्य फसलों की बिजाई कर रखी है। पिछले कई दिनों से बारिश न होने के कारण फसलों में सिंचाई की जरूरत है। ऐसे में किसान जलघर को जाने वाली माइनर में से साइफन व इंजन आदि के जरिये पानी का उठान कर रहे हैं। इसकी वजह से पानी जलघर में नहीं पहुंच पाता। चंपापुरी जलघर में चार वाटर टैंक बने हुए हैं, जबकि 15 दिनों में दो ही टैंक भर पाते हैं। जन स्वास्थ्य विभाग के नाले से नहरी पानी चोरी होने के कारण अन्य दो टैंक खाली रह जाते हैं।
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जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की नहीं सुनतेे
जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारी आए दिन साइट पर जाकर इन किसानों को पानी की चोरी करने से रोकते हैं, लेकिन किसान मान नहीं रहे हैं। खासकर रात के समय पानी का उठान किया जा रहा है। जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारी रात के समय भी साइट का दौरा कर रहे हैं। लेकिन किसान अधिकारियों के लौटने पर पीछे से फिर पाइप व इंजन आदि लगाकर पानी का उठान कर लेते हैं।
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सिंचाई विभाग से मांगी मदद द्भअब जनस्वास्थ्य विभाग ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से इसमें हस्तक्षेप करने की मंाग के लिए पत्र लिखा है। पत्र के माध्यम से नहरी पानी की चोरी पर अंकुश लगाने की बात कही गई है, ताकि जलघर में पानी डाला जा सके। शहर के इस मेन चंपापुरी जलघर की पेयजल क्षमता 2450 लाख लीटर है। वैसे ही शहर में पानी की स्टोरेज क्षमता मात्र 10-12 दिन की है। पानी की स्टोरेज क्षमता कम होने की वजह से शहर में एक दिन छोड़कर पानी सप्लाई किया जा रहा है।
जनस्वास्थ्य विभाग के जेई सवंद्र सिंह ने कहा कि जलघर के मेन नाले से किसान पानी की चोरी कर रहे हैं। हमने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को पत्र लिखा है, ताकि पानी की चोरी रुकवाई जा सके। वे लगातार साइट पर जाकर निगरानी भी कर रहे हैं।