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Charkhi Dadri News: खोरड़ा के ग्रामीणों एवं चकबंदी कमेटी के सदस्यों ने चकबंदी प्रक्रिया में अनियमितताओं के लगाए आरोप
Thu, 03 Sep 2026 01:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Thu, 03 Sep 2026 01:11 AM IST
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उपायुक्त कार्यालय में ज्ञापन देने पहुंचे गांव खोरड़ा के ग्रामीण।
- फोटो : 1
बाढड़ा। गांव खोरड़ा के ग्रामीणों एवं चकबंदी कमेटी के सदस्यों ने चकबंदी प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए उपायुक्त के नाम डीआरओ को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2017 से चल रही चकबंदी प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हुई है। चकबंदी नियमों की अनदेखी की जा रही है।
विजय खोरड़ा व राजकुमार की अगुवाई में ग्रामीणों ने डीआरओ डॉ. राजकुमार भौरिया को सौंपे ज्ञापन में आरोप लगाया कि चकबंदी की कागज प्रक्रिया गांव में नहीं करके तहसील बाढड़़ा में पूरी की गई। मसावर्ती कमेटी के सदस्यों को बैठकों की लिखित सूचना नहीं दी गई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्धारित नियमों के विपरीत कुछ लोगों को अधिक भूमि मनपसंद स्थानों पर दी गई और कुछ लोगों को जरूरत से अधिक रास्ते उपलब्ध करवाए गए हैं। इसके अलावा पंचायत और गोचर भूमि को भी अलग-अलग हिस्सों में बांटने और कुछ प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं। ग्रामीणों ने चकबंदी के दौरान हुए जमीनी तबादलों, पंचायत व गोचर भूमि से संबंधित मामलों की जांच करवाने की मांग की है। उनका कहना है कि चकबंदी में कथित अनियमितताओं से गांव का भाईचारा प्रभावित हो रहा है। भविष्य में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ग्रामीणों ने उपायुक्त से चकबंदी प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच करवाकर त्रुटियों को समयबद्ध तरीके से दूर करवाने की मांग की है।
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विजय खोरड़ा व राजकुमार की अगुवाई में ग्रामीणों ने डीआरओ डॉ. राजकुमार भौरिया को सौंपे ज्ञापन में आरोप लगाया कि चकबंदी की कागज प्रक्रिया गांव में नहीं करके तहसील बाढड़़ा में पूरी की गई। मसावर्ती कमेटी के सदस्यों को बैठकों की लिखित सूचना नहीं दी गई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्धारित नियमों के विपरीत कुछ लोगों को अधिक भूमि मनपसंद स्थानों पर दी गई और कुछ लोगों को जरूरत से अधिक रास्ते उपलब्ध करवाए गए हैं। इसके अलावा पंचायत और गोचर भूमि को भी अलग-अलग हिस्सों में बांटने और कुछ प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं। ग्रामीणों ने चकबंदी के दौरान हुए जमीनी तबादलों, पंचायत व गोचर भूमि से संबंधित मामलों की जांच करवाने की मांग की है। उनका कहना है कि चकबंदी में कथित अनियमितताओं से गांव का भाईचारा प्रभावित हो रहा है। भविष्य में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ग्रामीणों ने उपायुक्त से चकबंदी प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच करवाकर त्रुटियों को समयबद्ध तरीके से दूर करवाने की मांग की है।
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