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Charkhi Dadri News: सिंचाई विभाग पर वन अपराध रिपोर्ट दर्ज
Wed, 12 Mar 2025 10:44 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Wed, 12 Mar 2025 10:44 PM IST
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सिंचाई विभाग की ओर से की गई जमीन की खोदाई। संवाद
अमर उजाला एक्सकलूसिव:
फोटो 05
बौंदकलां क्षेत्र में पाइपलाइन बिछाने के लिए जेसीबी से जमीन की खोदाई करता श्रमिक। संवाद
फोटो: 06
सिंचाई विभाग की ओर से की गई जमीन की खोदाई। संवाद
-वन विभाग के अधिकारियों का तर्क : बौंदकलां क्षेत्र में बिना अनुमति लिए पाइपलाइन बिछाने का काम कराया शुरू, सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने जमीन वन विभाग की न बताकर आरोप को नकारा
जगदीप सिंह
चरखी दादरी। बिना अनुमति के वन क्षेत्र में पाइपलाइन दबा रहे सिंचाई विभाग के कर्मचारियों पर वन विभाग ने एफओआर (वन अपराध रिपोर्ट) दर्ज करवाई है। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वन क्षेत्र में बिना अनुमति लिए पाइपलाइन दबाने के चलते विभाग की ओर से सिंचाई विभाग पर यह कार्रवाई की गई है। वहीं, सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने इस आरोप को नकारा है।
अधिकारियों की मानें तो वन विभाग के अधिकार क्षेत्र की जमीन पर कोई भी कार्य शुरू करने से पहले संबंधित विभाग से अनुमति लेने का प्रावधान है। इसके अलावा एनपीवी व नेट प्रजेंट वेल्यू देना होता है, लेकिन, सिंचाई विभाग ने कार्य शुरू करने से पहले वन विभाग से किसी भी प्रकार की एनओसी लेना उचित नहीं समझा।
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आगामी मानसून सीजन में बाढ़ से निपटने के लिए सिंचाई विभाग बौंद डिस्ट्रीब्यूटरी के साथ 10 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाने का कार्य कर रहा है। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि सिंचाई विभाग वन क्षेत्र में पाइपलाइन दबाने का कार्य कर रहा है। इससे प्राकृतिक पौधों के नष्ट होने की आशंका बनी रहती है।
उन्होंने बताया कि वन क्षेत्र में किसी भी विभाग की ओर से कार्य शुरू करने से पहले एनओसी लेना जरूरी होता है, लेकिन, सिंचाई विभाग ने बिना एनओसी के ही कार्य शुरू करवा दिया। ऐसा करना वन विभाग के नियमों के विपरीत है।
उन्होंने बताया कि नियमों के अनुसार, वन क्षेत्र के अधीन आने वाली जमीन पर होने वाले कार्य के बदले विभाग को बदले की जमीन देने का प्रावधान है। ताकि, वन विभाग इस क्षेत्र में पौधे रोपित कर नष्ट हुए पेड़ों और पौधों की क्षतिपूर्ति कर सके। वन विभाग ने कई बार सिंचाई विभाग को अवगत कराया, लेकिन, संज्ञान न लेने पर एफओआर दर्ज करवानी पड़ी है।
- बौंदकलां खंड के गांवों में होता है जलभराव
बौंदकलां खंड के गांवों में मानसून के दौरान अधिक बारिश आने पर जलभराव हो जाता है। यहां तक कि नौबत ग्रामीणों के पलायन तक पहुंच जाती है। इसके मद्देनजर सिंचाई विभाग यहां पाइपलाइन डाल रहा है। ताकि, बाढ़ जैसी स्थिति न बनने पाए।
- 2 हजार से अधिक पौधे नष्ट होने की आशंका
सरकार जहां पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिए हर साल करोड़ों रुपये खर्च कर पौधे रोपित करवाती है। वहीं, वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो सिंचाई विभाग की 10 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन परियोजना से करीब दो हजार पौधे नष्ट होंगे। अगर सिंचाई विभाग समय रहते सभी नियमों के अनुरूप कार्य शुरू करता तो शायद नष्ट हुए पौधों के बराबर पौधे लगाकर क्षतिपूर्ति करने का प्रयास हो सकता था।
वर्सन:
हम अपने अधिकार क्षेत्र में पाइपलाइन बिछाने का कार्य कर रहे हैं। वन विभाग को अपनी जमीन का भी पता नहीं है। हमने वन विभाग को पत्राचार के माध्यम से कार्य से अवगत करवा दिया है।
-गौरव कुमार, एक्सईएन, सिंचाई विभाग, बौंदकलां डिस्ट्रीब्यूटरी
वर्सन:
वन क्षेत्र में कोई भी कार्य शुरू करने से पहले हर विभाग को नियम के अनुसार एनओसी लेना होता है। सिंचाई विभाग ने पाइपलाइन बिछाने से पहले कोई भी पत्राचार नहीं किया। अपनी मर्जी से पाइपलाइन बिछाने का कार्य शुरू कर दिया। ऐसा करना नियमों के खिलाफ है। हमने नियमों का पालन करते हुए सिंचाई विभाग के खिलाफ एफओआर दर्ज करवाई है।
-हेमंत पारिक, रेंज अधिकारी, चरखी दादरी वन विभाग
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फोटो 05
बौंदकलां क्षेत्र में पाइपलाइन बिछाने के लिए जेसीबी से जमीन की खोदाई करता श्रमिक। संवाद
फोटो: 06
सिंचाई विभाग की ओर से की गई जमीन की खोदाई। संवाद
-वन विभाग के अधिकारियों का तर्क : बौंदकलां क्षेत्र में बिना अनुमति लिए पाइपलाइन बिछाने का काम कराया शुरू, सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने जमीन वन विभाग की न बताकर आरोप को नकारा
जगदीप सिंह
चरखी दादरी। बिना अनुमति के वन क्षेत्र में पाइपलाइन दबा रहे सिंचाई विभाग के कर्मचारियों पर वन विभाग ने एफओआर (वन अपराध रिपोर्ट) दर्ज करवाई है। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वन क्षेत्र में बिना अनुमति लिए पाइपलाइन दबाने के चलते विभाग की ओर से सिंचाई विभाग पर यह कार्रवाई की गई है। वहीं, सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने इस आरोप को नकारा है।
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अधिकारियों की मानें तो वन विभाग के अधिकार क्षेत्र की जमीन पर कोई भी कार्य शुरू करने से पहले संबंधित विभाग से अनुमति लेने का प्रावधान है। इसके अलावा एनपीवी व नेट प्रजेंट वेल्यू देना होता है, लेकिन, सिंचाई विभाग ने कार्य शुरू करने से पहले वन विभाग से किसी भी प्रकार की एनओसी लेना उचित नहीं समझा।
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आगामी मानसून सीजन में बाढ़ से निपटने के लिए सिंचाई विभाग बौंद डिस्ट्रीब्यूटरी के साथ 10 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाने का कार्य कर रहा है। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि सिंचाई विभाग वन क्षेत्र में पाइपलाइन दबाने का कार्य कर रहा है। इससे प्राकृतिक पौधों के नष्ट होने की आशंका बनी रहती है।
उन्होंने बताया कि वन क्षेत्र में किसी भी विभाग की ओर से कार्य शुरू करने से पहले एनओसी लेना जरूरी होता है, लेकिन, सिंचाई विभाग ने बिना एनओसी के ही कार्य शुरू करवा दिया। ऐसा करना वन विभाग के नियमों के विपरीत है।
उन्होंने बताया कि नियमों के अनुसार, वन क्षेत्र के अधीन आने वाली जमीन पर होने वाले कार्य के बदले विभाग को बदले की जमीन देने का प्रावधान है। ताकि, वन विभाग इस क्षेत्र में पौधे रोपित कर नष्ट हुए पेड़ों और पौधों की क्षतिपूर्ति कर सके। वन विभाग ने कई बार सिंचाई विभाग को अवगत कराया, लेकिन, संज्ञान न लेने पर एफओआर दर्ज करवानी पड़ी है।
- बौंदकलां खंड के गांवों में होता है जलभराव
बौंदकलां खंड के गांवों में मानसून के दौरान अधिक बारिश आने पर जलभराव हो जाता है। यहां तक कि नौबत ग्रामीणों के पलायन तक पहुंच जाती है। इसके मद्देनजर सिंचाई विभाग यहां पाइपलाइन डाल रहा है। ताकि, बाढ़ जैसी स्थिति न बनने पाए।
- 2 हजार से अधिक पौधे नष्ट होने की आशंका
सरकार जहां पर्यावरण को बढ़ावा देने के लिए हर साल करोड़ों रुपये खर्च कर पौधे रोपित करवाती है। वहीं, वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो सिंचाई विभाग की 10 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन परियोजना से करीब दो हजार पौधे नष्ट होंगे। अगर सिंचाई विभाग समय रहते सभी नियमों के अनुरूप कार्य शुरू करता तो शायद नष्ट हुए पौधों के बराबर पौधे लगाकर क्षतिपूर्ति करने का प्रयास हो सकता था।
वर्सन:
हम अपने अधिकार क्षेत्र में पाइपलाइन बिछाने का कार्य कर रहे हैं। वन विभाग को अपनी जमीन का भी पता नहीं है। हमने वन विभाग को पत्राचार के माध्यम से कार्य से अवगत करवा दिया है।
-गौरव कुमार, एक्सईएन, सिंचाई विभाग, बौंदकलां डिस्ट्रीब्यूटरी
वर्सन:
वन क्षेत्र में कोई भी कार्य शुरू करने से पहले हर विभाग को नियम के अनुसार एनओसी लेना होता है। सिंचाई विभाग ने पाइपलाइन बिछाने से पहले कोई भी पत्राचार नहीं किया। अपनी मर्जी से पाइपलाइन बिछाने का कार्य शुरू कर दिया। ऐसा करना नियमों के खिलाफ है। हमने नियमों का पालन करते हुए सिंचाई विभाग के खिलाफ एफओआर दर्ज करवाई है।
-हेमंत पारिक, रेंज अधिकारी, चरखी दादरी वन विभाग