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Charkhi Dadri News: बणी पुनर्वास योजना के तहत नौ गांवों की शामलात जमीन होगी हरी-भरी, 55 हेक्टेयर पर 27,500 पौधे रोपित करेगा वन विभाग
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संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। इस मानसून सीजन में वन विभाग नौ गांवों की शामलात भूमि को हरा-भरा बनाएगा। इसके तहत 55 हेक्टेयर भूमि पर साढ़े 27 हजार विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपित किए जाएंगे। विभाग ने धरातल पर कवायद शुरू कर दी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मानसून की पहली बारिश आते ही पौधरोपण शुरू कर दिया जाएगा। गड्ढे खोदने समेत अन्य तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में विलुप्त होती जा रही बणी (शामलात भूमि) का पुनर्वास करने के लिए वन विभाग ने कवायद तेज कर दी है। योजना के तहत वन विभाग पौधरोपण के बाद अगले तीन साल तक इनकी स्वयं देखभाल करेगा। विभाग की योजना अनुसार दादरी खंड़ के गांव सांजरवास में 10 और बाढड़ा ब्लॉक के गांव लाडावास में 17 हेक्टेयर जमीन पर बणी पुनर्वास योजना के तहत पौधरोपण किया जाएगा।
विभागीय अधिकारियों की मानें तो बणी पुनर्वास मुहिम के तहत ग्राम पंचायतों से पौधरोपण के लिए प्रस्ताव मांगे गए थे। इसके बाद विभिन्न गांवों की ओर से इस संबंध में प्रस्ताव दिए गए। इन प्रस्तावों पर संज्ञान लेकर विभाग ने नौ गांवों की शामलात भूमि का पौधरोपण के लिए चयन किया। अधिकारियों का तर्क है कि कुछ गांवों में धरातल पर काम शुरू करवा दिया गया है।
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इन प्रजाति की लगेंगी पौध
बणी पुनर्वास योजना के तहत वन विभाग जामून, लेसवा, शीशम, बरगद, पीपल, नीम, कैर, सफेदा,जांटी व आयुर्वेदिक पौध लगाएगा। प्रति हेक्टेयर जमीन पर 500 पौधे रोपित किए जाएंगे।
सांवड़ में 5000 तो लाडावास में लगेंगे 8500 पौधें
सावड़ ग्राम पंचायत की 10 हेक्टेयर भूमि पर वन विभाग करीब पांच हजार पौध लगाएगा। इसके अलावा बाढड़ा खंड के लाडावास गांव की शामलात जमीन पर करीब साढ़े 8 हजार पौधें लगाए जाएंगे। सात अन्य गांव की शामलात भूमि पर करीब 14 हजार पौध लगाई जाएंगी।
हमने बणी पुनर्वास योजना के तहत गांव सांवड़ व लाडावास में कार्य शुरू करवा दिया है। ग्राम पंचायत की ओर से चिह्नित कर दी गई शामलात जमीन पर पौधरोपण किया जाएगा। इसके बाद अगले तीन साल तक विभाग ही इनकी देखभाल करेगा। - नवल किशोर, जिला वन अधिकारी
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चरखी दादरी। इस मानसून सीजन में वन विभाग नौ गांवों की शामलात भूमि को हरा-भरा बनाएगा। इसके तहत 55 हेक्टेयर भूमि पर साढ़े 27 हजार विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपित किए जाएंगे। विभाग ने धरातल पर कवायद शुरू कर दी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मानसून की पहली बारिश आते ही पौधरोपण शुरू कर दिया जाएगा। गड्ढे खोदने समेत अन्य तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में विलुप्त होती जा रही बणी (शामलात भूमि) का पुनर्वास करने के लिए वन विभाग ने कवायद तेज कर दी है। योजना के तहत वन विभाग पौधरोपण के बाद अगले तीन साल तक इनकी स्वयं देखभाल करेगा। विभाग की योजना अनुसार दादरी खंड़ के गांव सांजरवास में 10 और बाढड़ा ब्लॉक के गांव लाडावास में 17 हेक्टेयर जमीन पर बणी पुनर्वास योजना के तहत पौधरोपण किया जाएगा।
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विभागीय अधिकारियों की मानें तो बणी पुनर्वास मुहिम के तहत ग्राम पंचायतों से पौधरोपण के लिए प्रस्ताव मांगे गए थे। इसके बाद विभिन्न गांवों की ओर से इस संबंध में प्रस्ताव दिए गए। इन प्रस्तावों पर संज्ञान लेकर विभाग ने नौ गांवों की शामलात भूमि का पौधरोपण के लिए चयन किया। अधिकारियों का तर्क है कि कुछ गांवों में धरातल पर काम शुरू करवा दिया गया है।
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इन प्रजाति की लगेंगी पौध
बणी पुनर्वास योजना के तहत वन विभाग जामून, लेसवा, शीशम, बरगद, पीपल, नीम, कैर, सफेदा,जांटी व आयुर्वेदिक पौध लगाएगा। प्रति हेक्टेयर जमीन पर 500 पौधे रोपित किए जाएंगे।
सांवड़ में 5000 तो लाडावास में लगेंगे 8500 पौधें
सावड़ ग्राम पंचायत की 10 हेक्टेयर भूमि पर वन विभाग करीब पांच हजार पौध लगाएगा। इसके अलावा बाढड़ा खंड के लाडावास गांव की शामलात जमीन पर करीब साढ़े 8 हजार पौधें लगाए जाएंगे। सात अन्य गांव की शामलात भूमि पर करीब 14 हजार पौध लगाई जाएंगी।
हमने बणी पुनर्वास योजना के तहत गांव सांवड़ व लाडावास में कार्य शुरू करवा दिया है। ग्राम पंचायत की ओर से चिह्नित कर दी गई शामलात जमीन पर पौधरोपण किया जाएगा। इसके बाद अगले तीन साल तक विभाग ही इनकी देखभाल करेगा। - नवल किशोर, जिला वन अधिकारी