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बारिश से मंडी में भीगा दो हजार क्विंटल बाजरा
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चरखी दादरी। अधिकारियों और खरीद एजेंसी की लापरवाही के चलते शनिवार को दादरी मंडी में किसानों की मेहनत पानी में भीगती नजर आई। मंडी परिसर में खुले आसमान तले पड़ा करीब दो हजार क्विंटल बाजरा और कपास की 40 गांठें भीग गईं। बारिश शुरू होने के बाद ही श्रमिकों ने कपास की गांठों और बिना ढकी पड़ी बाजरे की ढेरियों को संभाला। मंडी प्रधान रामकुमार रिटोलिया ने पुष्टि करते हुए बताया कि मंडी में करीब दो हजार क्विंटल बाजरा बारिश से भीगा है।
शनिवार सुबह से शुरू हुई बारिश देर शाम तक जारी रही। इसके कारण दादरी मंडी में फसल की आवक भी अन्य दिनों के मुकाबले कम देखने को मिली।
दादरी मंडी में शनिवार को शाम की शिफ्ट में बाजरे की खरीदी की गई। इससे पहले अधूरे प्रबंध किसानों की मेहनत पर भारी पड़े। अगर समय रहते खरीदे गए बाजरे का उठान हो जाता तो ढेरियां भीगने की नौबत नहीं आती। हालांकि बारिश के करीब दो घंटे बाद श्रमिकों ने खुले में पड़े बाजरे की सुध ली और इसे टीन शेड के नीचे रखने की जहमत उठाई।
एक से लेकर सात अक्तूबर तक की बात करें तो एजेंसी और आढ़तियों ने करीब 1450 किसानों से पचास हजार क्विंटल बाजरे की खरीद की है। इनमें से एजेंसी ने 1257 किसानों से करीब 37 हजार क्विंटल बाजरा खरीदा है जबकि बाकी किसानों ने आढ़तियों को अपना बाजरा बेचा है। उठान की अगर स्थिति देखें तो हैफेड ने अब तक 16 हजार क्विंटल का उठान कराया है जबकि करीब 21 हजार क्विंटल बाजरा अभी भी मंडी में है।
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दादरी के अलावा अन्य केंद्रों पर खरीद शून्य
दादरी के अलावा अन्य नौ केंद्रों पर बाजरे की खरीद नहीं हो रही है। बाढड़ा में सिर्फ एक दिन 427 क्विंटल बाजरा की खरीद की गई थी जबकि अन्य आठ केंद्रों पर एक भी दिन फसल खरीद नहीं हुई है। इसके कारण दादरी ब्लॉक के अलावा अन्य ब्लॉक के किसान अपनी फसल एजेंसी को बेचने के लिए दादरी तक की दूरी नाप रहे हैं।
बारिश एकाएक होने से करीब दो हजार क्विंटल बाजरा मंडी में भीगा है। बारिश शुरू होने के कुछ देर बाद ही श्रमिकों ने बाजरा टीन शेड के नीचे रख दिया था।
रामकुमार रिटोलिया, प्रधान, अनाज मंडी
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शनिवार सुबह से शुरू हुई बारिश देर शाम तक जारी रही। इसके कारण दादरी मंडी में फसल की आवक भी अन्य दिनों के मुकाबले कम देखने को मिली।
दादरी मंडी में शनिवार को शाम की शिफ्ट में बाजरे की खरीदी की गई। इससे पहले अधूरे प्रबंध किसानों की मेहनत पर भारी पड़े। अगर समय रहते खरीदे गए बाजरे का उठान हो जाता तो ढेरियां भीगने की नौबत नहीं आती। हालांकि बारिश के करीब दो घंटे बाद श्रमिकों ने खुले में पड़े बाजरे की सुध ली और इसे टीन शेड के नीचे रखने की जहमत उठाई।
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एक से लेकर सात अक्तूबर तक की बात करें तो एजेंसी और आढ़तियों ने करीब 1450 किसानों से पचास हजार क्विंटल बाजरे की खरीद की है। इनमें से एजेंसी ने 1257 किसानों से करीब 37 हजार क्विंटल बाजरा खरीदा है जबकि बाकी किसानों ने आढ़तियों को अपना बाजरा बेचा है। उठान की अगर स्थिति देखें तो हैफेड ने अब तक 16 हजार क्विंटल का उठान कराया है जबकि करीब 21 हजार क्विंटल बाजरा अभी भी मंडी में है।
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दादरी के अलावा अन्य केंद्रों पर खरीद शून्य
दादरी के अलावा अन्य नौ केंद्रों पर बाजरे की खरीद नहीं हो रही है। बाढड़ा में सिर्फ एक दिन 427 क्विंटल बाजरा की खरीद की गई थी जबकि अन्य आठ केंद्रों पर एक भी दिन फसल खरीद नहीं हुई है। इसके कारण दादरी ब्लॉक के अलावा अन्य ब्लॉक के किसान अपनी फसल एजेंसी को बेचने के लिए दादरी तक की दूरी नाप रहे हैं।
बारिश एकाएक होने से करीब दो हजार क्विंटल बाजरा मंडी में भीगा है। बारिश शुरू होने के कुछ देर बाद ही श्रमिकों ने बाजरा टीन शेड के नीचे रख दिया था।
रामकुमार रिटोलिया, प्रधान, अनाज मंडी