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Charkhi Dadri News: खुद का भवन है न स्थायी सहायक प्रोफेसर, दादरी राजकीय महाविद्यालय में 320 सीटों पर अब तक आए महज 75 आवेदन

Wed, 12 Jul 2023 11:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Wed, 12 Jul 2023 11:36 PM IST
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There is no permanent assistant professor's own building, only 75 applications have come so far for 320 seats in Dadri Government College
भैरवी स्थित किसान मॉडल स्कूल जहां अस्थायी रूप से दादरी राजकीय महाविद्यालय चल रहा है।
चरखी दादरी। जिला मुख्यालय पर राजकीय महाविद्यालय खुले दो साल हो चुके हैं, लेकिन यहां अब तक सुविधाएं न्यूनतम दर्जे की ही हैं। महाविद्यालय के पास न तो खुद का भवन है और न ही यहां स्थायी सहायक प्रोफेसर तैनात हैं। कई विषयों के तो यहां शिक्षक ही तैनात नहीं है। दूसरी ओर सरकार कॉलेज खोलने के दो साल बाद भी न तो महाविद्यालय भवन के लिए जगह तलाश पाया है और न ही शिक्षकों की यहां तैनाती की गई है। इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी का नतीजा ये है यहां निर्धारित 320 सीटों अब तक महज 75 ही आवेदन आए हैं। इन हालातों में तो लगातार तीसरे सत्र में भी यहां बीए और बीकॉम संकाय की सीटें खाली रहने का अनुमान है।
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दादरी मुख्यालय पर राजकीय पीजी कॉलेज खोलने की करीब तीन दशक पुरानी मांग तो सरकार ने पूरी कर दी है, लेकिन अब तक यहां शिक्षकों के पद सृजित नहीं किए गए हैं। इसके चलते यह कॉलेज पिछले दो सत्र से डेपुटेशन पर तैनात सहायक प्रोफेसर के सहारे चल रहा है। दरअसल, 2021 के विधानसभा सत्र में दादरी पीजी कॉलेज का मुद्दा उठा था। प्रदेश सरकार ने इसके बाद दादरी को पीजी कॉलेज की सौगात दी थी। पिछले दो सत्र से राजकीय पीजी कॉलेज भैरवी स्थित किसान मॉडल स्कूल के दस कमरों में चल रहा है।
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इसके अलावा कॉलेज में पांच शिक्षक डेपुटेशन और एक्सटेंशन पर तैनात हैं। यहां बीकॉम के शिक्षक ही नहीं है। गत सत्र में बीकॉम संकाय में छात्र संख्या महज 6 ही थी। इसके अलावा यहां जो शिक्षक तैनात हैं उन्हें भिवानी, बौंदकलां और मोखरा से डेपुटेशन पर भेजा गया है।
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- महाविद्यालय में हैं 320 सीटें
दादरी राजकीय महाविद्यालय में बीए और बीकॉम संकाय ही है। बीए में 240 सीटें निर्धारित हैं जबकि बीकॉम में 80 सीटें हैं। गत सत्र में बीकॉम की 74 सीटें खाली रह गई थीं। वहीं, बीए में छात्र संख्या तो ठीकठाक है, लेकिन इसमें भी गत वर्ष में सीटें खाली थीं। इस सत्र के लिए अब तक 75 आवेदन आए हैं और यह संख्या बेहद कम है। सरकार को महाविद्यालय की सुविधाओं में इजाफा करना चाहिए, ताकि युवाओं का रुझान राजकीय महाविद्यालय के प्रति बने।

- सरकार से मांगा 20 करोड़ का बजट
राजकीय पीजी कॉलेज भवन और अन्य सुविधाओं के लिए सरकार से गत वर्ष 20 करोड़ का बजट मांगा गया था। लंबा समय बीतने के बाद भी बजट राशि नहीं मिली है। दूसरी ओर मौजूद भवन में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी बनी है और यहां सुविधाओं का दायरा नहीं बढ़ पा रहा। कॉलेज प्रबंधन समिति ने उपायुक्त से किसान मॉडल स्कूल का पूरा भवन देने की मांग भी गत दिनों ही की है।

- शोपीस बनी लैब

कॉलेज के अंदर ज्योग्राफी व अन्य प्रकार की लैब तो हैं लेकिन विद्यार्थियों को सिखाने के लिए प्राध्यापक नहीं हैं। इसके चलते विद्यार्थी लैब सुविधा का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। ऐसे में ये लैब शोपीस बनकर रह गई है। ये भी कारण है कि युवा यहां दाखिला लेने से कतरा रहे हैं।
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