चरखी दादरी: पिता के 40 कॉल करने पर भी नवीन का नहीं उठा फोन, चार घंटे में मोबाइल लोकेशन ट्रेस कर शवों तक पहुंची पुलिस
सदर थाने में दी शिकायत में बेटे का फोन नंबर दिया गया, जिसके आधार पर लोकेशन ट्रेस की और चार घंटे के अंदर दोनों के शव बरामद कर लिए गए।
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चरखी दादरी में प्रेम प्रसंग के चलते आत्महत्या करने वाले रावलधी निवासी युगल तक पहुंचने में पुलिस को तकनीक की काफी मदद मिली। पुलिस ने गुमशुदगी की शिकायत मिलने के चार घंटे के अंदर दोनों के शव खातीवास रोड पर करीब 200 मीटर अंदर चलकर एक खेत से बरामद किए। मृतक युवक के पिता के अनुसार उसने 40 से अधिक कॉल की, लेकिन उसके बेटे का फोन नहीं उठा और उसके बाद थक-हारकर वो पांच बजे सदर थाने में शिकायत देने पहुंचे और करीब नौ बजे दोनों के शव पेड़ पर लगे फंदों से झूलते मिल गए।
मृतक युवक के पिता ने बताया कि उसका बेटा आठ वर्ष से प्लंबर का काम कर रहा था। मंगलवार सुबह 11 बजे तक उसका बेटा घर पर था, जबकि वह लावणी करने गया था। इसके बाद जब वह घर पर आया तो उसका बेटा घर पर नहीं था। पिता ने बताया कि शाम तक जब उसका बेटा नहीं लौटा तो उसे लगा कि काम के सिलसिले में कही रुका होगा।
बुधवार सुबह से लेकर शाम तक उसने बेटे के फोन पर कॉल की, लेकिन एक बार भी फोन रिसीव नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने सदर थाने में दी शिकायत में बेटे का फोन नंबर दिया गया, जिसके आधार पर लोकेशन ट्रेस की और चार घंटे के अंदर दोनों के शव बरामद कर लिए गए। पुलिस ने खातीवास रोड पर सर्च अभियान चलाया और करीब आधे घंटे बाद ही शवों तक पहुंच गई।
मृतका युवती के माता-पिता ने बताया कि उनकी बेटी ने पिछले साल आईटीआई में दाखिला लिया था। इस साल वह घर पर ही रह रही थी। उन्होंने बताया कि उनके चार बेटियां हैं और मृतका दूसरे नंबर की थी। जिस समय उनकी बेटी घर से निकली, उस दौरान पिता मजदूरी पर गया था, जबकि वह भी घर पर नहीं थी।
मृतका की मां ने बताया कि वह रावलधी आईटीआई में सफाई कर्मी है। परिजनों ने भी बुधवार दोपहर बाद तक इंतजार कर शाम को उसकी गुमशुदगी की शिकायत सदर थाना पुलिस को दी। मृतका के परिजनों के अनुसार उनकी बेटी फोन नहीं रखती थी और मृतक युवक के मोबाइल फोन की लोकेशन के आधार पर ही वह पुलिस के साथ बेटी के शव तक पहुंचे।
आत्महत्या करने के ये लगाए जा रहे कयास
चर्चा है कि दोनों एक ही गांव और जाति से थे, इसके चलते उन्हें एक होने का अंदेशा नहीं था। इसके चलते दोनों ने यह कदम उठाया। युवती ने अपने लाल रंग के दुपट्टे से फंदा लगाया, जबकि युवक काले रंग के दुपट्टे के फंदे पर लटकता मिला। उसके पैर से खून भी बह रहा था। इस संबंध में पुलिस का कहना है कि खून का कारण कीकर पर फंदा बांधते समय कांटा चुभना भी हो सकता है, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आएंगे उस आधार पर अगली कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
एक ही डाल पर लगाया फंदा
युवक और युवती ने पेड़ की एक ही डाल पर फंदा लगाया है। दोनों के शव करीब 30 से अधिक घंटों तक पेड़ से लटकते रहे, जिसके चलते वे फूल भी गए। इसके अलावा युवक की गर्दन में तो फंदा अंदर तक धंसा मिला। दोनों की आंखें भी खराब हो चुकी थीं। जमीन और उनके पैरों के बीच दो से तीन फुट का गेप मिला, जबकि फंदे की लंबाई भी दो से ढाई फुट थी। ऐसे में कयास लगाए जा रहे है कि युवक ने पेड़ की डाल पर चढ़कर दोनों फंदे बांधे।
जहां लगाया फंदा, उससे 100 मीटर की दूरी पर बना एक घर
युवक और युवती ने आत्महत्या के लिए ऐसी जगह को चुना जहां लोगों का आना जाना कम रहता है। जिस जगह उन्होंने पेड़ पर फंदा लगाया है, वहां से करीब 100 मीटर की दूरी पर एक ही घर है। जिस पेड़ पर फंदा लगाया गया है वो उस घर से नजर भी नहीं आता। किसी ने उन दोनों को उस तरफ जाते भी नहीं देखा।
युवती के माता-पिता लगाते नजर आई मुंह देखने की गुहार
घंटों तक फंदे पर लटकने से दोनों के शव से दुर्गंध आने लगी और गर्दन खींच जाने के चलते उनके चेहरे भी पहचान में नहीं आ रहे थे। जिस पेड़ पर फंदा लगाया गया उसके चारों तरफ भी कीकरें ही थीं। ऐसे में मौके पर पहुंची युवती की मां और पिता पुलिस व गांव के मौजिज लोगों से एक बार बेटी का मुंह दिखाने की गुहार लगाते नजर आए।
दोनों के शव एक ही डाले पर लटके मिले हैं। मृतक युवक के फोन की लोकेशन ट्रेस कर पुलिस शवों तक पहुंची और देर रात ही एफएसएल टीम को भी मौके पर बुलाया गया। सभी एंगल से मामले की जांच की जाएगी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के तथ्यों के आधार पर पुलिस कार्रवाई अमल में लाएगी। - बलबीर सिंह, एसआई एवं जांच अधिकारी, सदर थाना