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Charkhi Dadri News: महिला एवं बाल विकास विभाग की रिपोर्ट में सामने आई हकीकत, कुपोषण के शिकार हैं जच्चा-बच्चा

Fri, 09 Feb 2024 01:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Fri, 09 Feb 2024 01:19 AM IST
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The reality revealed in the report of Women and Child Development Department, mother and child are victims of malnutrition
शहर के मातृ-शिशु अस्पताल में स्वास्थ्य जांच करवाने पहुंची गर्भवती महिला।
चरखी दादरी। दूध-दही के खाना वाले चरखीदादरी जिले में जच्चा-बच्चा कुपोषण के शिकार हैं। कुपोषण की वजह से जिले की हर दूसरी जननी में रक्त की कमी मिल रही है तो हर 10वां बच्चा शारीरिक विकार का शिकार है। इन बच्चों में सबसे बड़ी दिक्कत उम्र के अनुसार कद का नहीं बढ़ना है। इन समस्याओं से निजात पाने के लिए अब महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी बच्चों और महिलाओं को पोषाहार के साथ टीकाकरण के प्रति जागरूक कर रहे हैं।
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महिला एवं बाल विकास विभाग के अनुसार वर्ष 2023 में जिले में आठ हजार महिलाओं ने बच्चों को जन्म दिया। पांच हजार बच्चों का जन्म जिले में जबकि तीन हजार का जन्म जिले से बाहर हुआ। इनमें से डिलीवरी से पहले गर्भावस्था के दौरान 50 फीसदी महिलाओं में खून की कमी पाई गई, वहीं फीसदी महिलाएं ऐसी रहीं जिन्होंने गर्भावस्था के दौरान टीकाकरण पूरा नहीं करवाया। इसके चलते कुछ महिलाओं की डिलीवरी के समय नाजुक हालत भी बन गई। खून की कमी का मुख्य कारण महिलाओं का पोषाहार न लेना भी है। महिलाओं में खून की कमी का असर उनके बच्चे के शारीरिक विकास पर पड़ रहा है। दूसरी ओर बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की बात करें तो महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यकर्ताओं ने जिले में 30008 बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की गई। इनमें से 3132 बच्चों में विभिन्न प्रकार की शारीरिक दिक्कतें मिलीं। 4.57 प्रतिशत बच्चों का कद उम्र के अनुसार नहीं मिला। इसके अलावा 1.97 प्रतिशत बच्चों का कद सामान्य से काफी कम मिला। 0.90 प्रतिशत बच्चों में उम्र के अनुसार वजन नहीं मिला, जबकि 0.32 प्रतिशत बच्चों का वजन काफी कम और 0.19 बच्चों का वजन बेहद कम मिला। संवाद
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जानिये...कितने बच्चों में मिली कौन-सी शारीरिक समस्या
शारीरिक समस्या- बच्चों की संख्या
उम्र के अनुसार कद नहीं- 1374
काफी कम कद- 594
कद के अनुसार वजन नहीं- 272
वजन काफी कम- 97
उम्र के अनुसार वजन नहीं- 276
मोटापा की समस्या- 164
अधिक वजन - 295


बच्चों में कुपोषण के क्या है लक्षण
. अधिक दुबलापन
. त्वचा का ढीला होना
. अत्यधिक पतले हाथ-पैर
. हड्डियां नजर आना
. बच्चे का बार-बार बीमार पड़ना

गर्भवती महिलाओं में यूं दूर कर सकते हैं खून की कमी
आयरन गोलियों का सेवन करें
विटामिन सी से युक्त फल खाएं
गुड़-चना का सेवन करें
पोषाहार का सेवन करें
विभागों की ओर से ये किए जा रहे प्रयास
बच्चों और गर्भवती महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच की जा रही है। महिलाओं में खून की कमी दूर करने के लिए आयरन की गोलियां दी जा रही हैं और चना-गुड़ खाने की सलाह दी जा रही है। वहीं, बच्चों में शारीरिक समस्याओं को दूर करने के लिए पोषाहार के लिए प्रेरित किया जा रहा है। प्रत्येक गर्भवती महिला का पंजीकरण करने पर भी विभाग का फोकस है।
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गत वर्ष के मुकाबले बच्चों के कुपोषण के आंकड़ों में सुधार हुआ है। बच्चों में शारीरिक दिक्कतों को दूर करने के लिए विभाग समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाता है। बच्चों के अभिभावकों की भी काउंसिलिंग की जाती है। 30008 बच्चों में से 3132 में कम कद, कम वजन और मोटापा संबंधी समस्या मिली है। अभिभावकों से अपील है कि बच्चों को पोषाहार दें और जंक फूड से दूर रखें।


-गीता सहारण, सीडीपीओ



गर्भवती महिला की डिलीवरी तक अस्पताल में चार विजिट होती है। जिस गर्भवती महिला में खून की कमी मिलती है उसे 180 आयरन टेबलेट देने के साथ पोषाहार और गुड़-चना के सेवन की सलाह दी जाती है। सभी वर्कर्स को प्रत्येक गर्भवती महिला का पंजीकरण करने के निर्देश भी दिए जा चुके हैं। - डॉ. आशीष मान, डिप्टी सीएमओ
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फोटो 30
शहर के मातृ-शिशु अस्पताल में स्वास्थ्य जांच करवाने पहुंची गर्भवती महिला। संवाद
फोटो 31
आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चे का वजन करते हुए। संवाद
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