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निवर्तमान सरपंच बोले-जब गांव का विकास अटका तो पंचायत दिवस मनाने के कोई मायने नहीं
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समसपुर गांव की गली में भरा दूषित पानी।
- फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। गांधी जी कहते थे कि देश की आत्मा गांव में बसती है, लेकिन जिले के गांवों का विकास पिछले एक वर्ष से अटका हुआ है। समय पूरा होने के बाद भी पिछले एक साल से पंचायत चुनाव लेकर असमंजस है और गांव के चौधर जनप्रतिनिधियों की जगह अधिकारियों के पास है। आलम यह है कि पंचायत का कार्यकाल पूरा होने के समय जो विकास कार्य पाइपलाइन में थे, वो ठंडे बस्ते में चले गए। छोटी समस्याओं का समाधान करवाने के लिए भी ग्रामीण पंचायत विभाग कार्यालय के चक्कर काटने को विवश हैं।
राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर जब निवर्तमान सरपंचों से बात की गई तो उनका कहना है कि पंचायत चुनाव नहीं होने व गांवों में विकास कार्य अधूरे रहने पर उनके लिए पंचायत दिवस के कोई मायने नहीं हैं। पंचायत दिवस की सार्थकता तभी मानी जाती है, जब किसी पंचायत के अधीन लोगों के पास सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हों। इनका कहना है कि सरकार को जल्द चुनाव करवाने चाहिए, ताकि अधूरे विकास कार्यों को पूरा करवाया जा सके। उन्होंने कहा कि ग्रामीण छोटी व बड़ी समस्याएं लेकर आज भी निवर्तमान सरपंचों के पास लेकर ही पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है। किसी गांव में टेंडर होने के बाद काम शुरू नहीं हो सके तो कहीं बीच में ही काम रुके हुए हैं। ऐसे में गांवों की प्रगति विकास कार्यों के बिना रुकी है।
पंचायतों का कार्यकाल पूरा होने के बाद अटके विकास कार्य
केस:1- चरखी आंबेडकर भवन में नहीं हुआ रंग रोगन, नाले का निर्माण भी अटका
चरखी, के निवर्तमान सरपंच गुलजारी को कहना है कि सरकार को जल्द ही पंचायत चुनाव करवाने चाहिए। पंचायत दिवस के सही मायने तब हैं जब लोगों की मूलभूत समस्याओं का समाधान हो। गांव में आंबेडकर भवन तो बनकर तैयार हो गया है, लेकिन रंग व पेंट का काम अधूरा रह गया। फिरनी पर दूषित पानी का नाला नहीं बन सका जबकि टेंडर हो चुके हैं। तालाब का काम भी रुका हुआ है। पंचायत चुनाव जल्द हो या फिर निवर्तमान सरपंच को अस्थायी शक्तियां दी जाएं।
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केस:2- पांडवान में पेयजल लाइन बिछाने का काम पड़ा अधूरा
गांव पांडवान के निवर्तमान सरपंच राजकरण का कहना है कि गांव में पीने के पानी की समस्या का समाधान नहीं हो सका है। ग्राम पंचायत ने पेयजल लाइन की योजना पास करवाई थी, लेकिन कार्यकाल पूरा होने के बाद यह योजना परवान नहीं चढ़ पाई। सरकार को जल्द पंचायत चुनाव करवाने चाहिए और तब तक अधूरे कार्यों को जल्द पूरा करवाना चाहिए। लोगों की समस्याओं का समय पर समाधान हो तो ही हमारे लिए पंचायत दिवस मनाने के मायने हैं।
केस:3- बलाली में कब्जा हटाने का काम अधूरा
बलाली के पूर्व सरपंच सोमबीर ने कहना है कि सरकार को पंचायत चुनाव जल्द करवाने चाहिए। ग्रामीण आज भी निवर्तमान सरपंच के पास अपनी समस्याएं लेकर पहुंच रहे हैं। गांव में अवैध कब्जे हटवाने का काम अधूरा रह गया। दूषित पानी निकासी का नाला नहीं बन सका। जोहड़ पाइप लाइन का काम भी नहीं हो सका है। लोगों की मूलभूत जरूरतें तो पूरी होनी चाहिए। अब तो जल्द चुनाव करवाने चाहिए। गांवों की प्रगति रुकी हुई है।
केस:4- महराणा में फिरनी निर्माण कार्य पड़ा अधूरा
महराणा के निवर्तमान सरपंच भूपेंद्र सिंह ने बताया कि गांव की पश्चिमी दिशा में फिरनी निर्माण का कार्य पूरा नहीं हो सका। दूषित पानी की निकासी का सपना भी अधूरा रह गया। पंचायत दिवस की सार्थकता तभी है जब लोगों की हर प्रकार की समस्याओं का समाधान हो। सरकार को चुनाव जल्द करवाने चाहिए, ताकि गांवों में विकास कार्य शुरू हो सकें। गांव में फिरनी कार्य पूरा करवाने के अलावा भी कई विकास कार्यों की दरकार है।
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राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर जब निवर्तमान सरपंचों से बात की गई तो उनका कहना है कि पंचायत चुनाव नहीं होने व गांवों में विकास कार्य अधूरे रहने पर उनके लिए पंचायत दिवस के कोई मायने नहीं हैं। पंचायत दिवस की सार्थकता तभी मानी जाती है, जब किसी पंचायत के अधीन लोगों के पास सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हों। इनका कहना है कि सरकार को जल्द चुनाव करवाने चाहिए, ताकि अधूरे विकास कार्यों को पूरा करवाया जा सके। उन्होंने कहा कि ग्रामीण छोटी व बड़ी समस्याएं लेकर आज भी निवर्तमान सरपंचों के पास लेकर ही पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है। किसी गांव में टेंडर होने के बाद काम शुरू नहीं हो सके तो कहीं बीच में ही काम रुके हुए हैं। ऐसे में गांवों की प्रगति विकास कार्यों के बिना रुकी है।
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पंचायतों का कार्यकाल पूरा होने के बाद अटके विकास कार्य
केस:1- चरखी आंबेडकर भवन में नहीं हुआ रंग रोगन, नाले का निर्माण भी अटका
चरखी, के निवर्तमान सरपंच गुलजारी को कहना है कि सरकार को जल्द ही पंचायत चुनाव करवाने चाहिए। पंचायत दिवस के सही मायने तब हैं जब लोगों की मूलभूत समस्याओं का समाधान हो। गांव में आंबेडकर भवन तो बनकर तैयार हो गया है, लेकिन रंग व पेंट का काम अधूरा रह गया। फिरनी पर दूषित पानी का नाला नहीं बन सका जबकि टेंडर हो चुके हैं। तालाब का काम भी रुका हुआ है। पंचायत चुनाव जल्द हो या फिर निवर्तमान सरपंच को अस्थायी शक्तियां दी जाएं।
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केस:2- पांडवान में पेयजल लाइन बिछाने का काम पड़ा अधूरा
गांव पांडवान के निवर्तमान सरपंच राजकरण का कहना है कि गांव में पीने के पानी की समस्या का समाधान नहीं हो सका है। ग्राम पंचायत ने पेयजल लाइन की योजना पास करवाई थी, लेकिन कार्यकाल पूरा होने के बाद यह योजना परवान नहीं चढ़ पाई। सरकार को जल्द पंचायत चुनाव करवाने चाहिए और तब तक अधूरे कार्यों को जल्द पूरा करवाना चाहिए। लोगों की समस्याओं का समय पर समाधान हो तो ही हमारे लिए पंचायत दिवस मनाने के मायने हैं।
केस:3- बलाली में कब्जा हटाने का काम अधूरा
बलाली के पूर्व सरपंच सोमबीर ने कहना है कि सरकार को पंचायत चुनाव जल्द करवाने चाहिए। ग्रामीण आज भी निवर्तमान सरपंच के पास अपनी समस्याएं लेकर पहुंच रहे हैं। गांव में अवैध कब्जे हटवाने का काम अधूरा रह गया। दूषित पानी निकासी का नाला नहीं बन सका। जोहड़ पाइप लाइन का काम भी नहीं हो सका है। लोगों की मूलभूत जरूरतें तो पूरी होनी चाहिए। अब तो जल्द चुनाव करवाने चाहिए। गांवों की प्रगति रुकी हुई है।
केस:4- महराणा में फिरनी निर्माण कार्य पड़ा अधूरा
महराणा के निवर्तमान सरपंच भूपेंद्र सिंह ने बताया कि गांव की पश्चिमी दिशा में फिरनी निर्माण का कार्य पूरा नहीं हो सका। दूषित पानी की निकासी का सपना भी अधूरा रह गया। पंचायत दिवस की सार्थकता तभी है जब लोगों की हर प्रकार की समस्याओं का समाधान हो। सरकार को चुनाव जल्द करवाने चाहिए, ताकि गांवों में विकास कार्य शुरू हो सकें। गांव में फिरनी कार्य पूरा करवाने के अलावा भी कई विकास कार्यों की दरकार है।