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Charkhi Dadri News: 300 साल पुराना है शहर का ऐतिहासिक बड़ा शिव मंदिर, स्वयं प्रकट हुआ था शिवलिंग

Sun, 09 Jul 2023 11:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Sun, 09 Jul 2023 11:56 PM IST
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The historic big Shiva temple of the city is 300 years old, the Shivling itself appeared
शिवलिंग को जलाभिषेक करते श्रद्धालु।
चरखी दादरी। शहर का ऐतिहासिक बड़ा शिव मंदिर तीन सदी के इतिहास का साक्षी है। खास बात ये है कि यहां शिवलिंग स्थापित नहीं किया गया, बल्कि स्वयंभू है। वहीं, 300 वर्षों से श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा के चलते वर्ष में दो बार प्राचीन शिव मंदिर में मेला भी लगता है। मान्यता है कि महाभारत काल से ही दादरी की धरा ऋषि-मुनियों की तपोस्थली रहा है। तीन सदी में अपने भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करने वाले भगवान शिव के मंदिर को भव्य रूप भी श्रद्धालुओं ने दिया है।
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दादरी अपनी स्थापना से ही तेल व्यापार एवं औद्योगिक क्षेत्र में देशभर में प्रसिद्ध रहा है। यहां के व्यापारियों के वंशज आज भी देश-विदेशों से आकर भगवान शिव का आशीर्वाद लेते हैं। जिलेभर के श्रद्धालुओं की आस्था के चलते मंदिर ने तीन सदी में एक साधारण झोपड़ी से भव्य मंदिर का सफर तय किया है। मंदिर में 11 भव्य दरबारों में अनेक देव परिवारों की स्थापना की गई है जो मंदिर को भव्य रूप दे रहे हैं। प्रतिदिन सुबह-शाम करीब 300 श्रद्धालु अपने आराध्य देव भगवान शिव का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। फाल्गुन व सावन माह के दौरान महाशिव रात्रि पर वर्ष में दो बार लगने वाले मेलों में देशभर से श्रद्धालु पहुंचकर शिव का जलाभिषेक करते हैं।
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सावन माह में शहर व जिले के हजारों की संख्या में श्रद्धालु कांवड़ के माध्यम से हरिद्वार, ऋषिकेश, गोमुख से पवित्र गंगाजल लेकर आते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। ऐसी मान्यता है कि 300 वर्ष पूर्व इस मंदिर के क्षेत्र में किसी भी प्रकार की कोई अनहोनी नहीं होती थी जिसके चलते यह स्थान सबसे सुरक्षित स्थान माना जाता था। कोई भी श्रद्धालु यहां से निराश होकर नहीं जाता था। भगवान शिव की कृपा होने से लोगों की आस्था भी लगातार बढ़ती गई। वर्ष 2017 में मंदिर के जीर्णोद्धार के समय प्राचीन मंदिर के अवशेष भी मिले हैं जिससे श्रद्धालुओं की आस्था और अधिक बढ़ती गई। 300 गज में बना यह मंदिर भव्य रूप से सजाया गया है।
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- दो बार होती है पूजा
मंदिर के पुजारी पंडित दिनेश शास्त्री सुबह-शाम दिन में दो बार विशेष पूजा संपन्न कराते हैं जिसमें शहर के श्रद्धालु भाग लेते हैं। वहीं, संचालक रहे रामनिवास फौगाट की दो पीढ़ी लगातार मंदिर में संचालन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। इनकी पहली पीढ़ी में इनके पिता नंबरदार सदाराम मंदिर संचालक का जिम्मा संभालते थे वहीं अब रामनिवास फौगाट द्वारा संचालन की जिम्मेदारी निभाई जा रही है।
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