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रफ्तार का कहर: सवा तीन माह के अंदर 38 हादसों में 30 लोगों ने गंवाई जान, 26 हुए घायल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 12 May 2022 11:30 PM IST
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The havoc of speed: 30 people lost their lives in 38 accidents within three and a half months, 26 were injured
सड़क हादसे में क्षतिग्रस्त वाहन। - फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। वर्ष 2022 में दादरी जिले में रफ्तार का कहर देखने को मिला है। पिछले सवा तीन माह के अंदर जिले में 30 सड़क हादसे हुए हैं, जिनमें 30 लोगों की मौत हुई है जबकि 26 घायल हुए हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि इनमें से 40 फीसदी हादसों का कारण बेलगाम डंपर बने हैं। जिले में एक फरवरी से लेकर 12 मई तक डंपरों के चलते 16 हादसे हुए हैं और इन्हीं हादसों में सबसे अधिक मौतें हुई हैं। ज्यादातर सड़क हादसों का कारण तेज रफ्तार बनी है, जिसने कई परिवारों को जीवन भर का दर्द दिया है।
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जिले की अगर बात करें तो प्रतिदिन पांच हजार से अधिक डंपर भवन निर्माण सामग्री लेकर अलग-अलग क्रशर जोन से गुरुग्राम और दिल्ली समेत कई शहरों के लिए चलते हैं। कई डंपरों के स्टेयरिंग तो नौसिखिया संभालते हैं जो खुद के साथ दूसरों की जान पर भी भारी पड़ रहे हैं। संवाददाता ने 2022 में हुए सड़क हादसों की पड़ताल की तो सामने आया कि सबसे अधिक हादसे दादरी-बाढड़ा रोड पर हुए हैं। पिछले दो दिनों में इस मार्ग पर हुए दो बड़े हादसे इसका ताजा उदाहरण हैं।
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जिले की अगर बात करें तो जनवरी में कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। वहीं, फरवरी माह में सात हादसे हुए जिनमें तीन लोगों की मौत हुई जबकि चार घायल हुए। फरवरी में हुए हादसों में से दो का कारण डंपर बने हैं। वहीं, मार्च की अगर बात करें तो कुल 13 हादसे हुए। इनमें 11 लोगों की मौत हुई जबकि 12 घायल हुए। मार्च में चार हादसे डंपरों की वजह से हुए जिनमें चार लोगों की मौत हुई। वहीं, अप्रैल में आठ हादसे हुए, जिनमें पांच लोगों की मौत हुई जबकि पांच घायल हुए। अप्रैल में चार हादसे ट्रैक्टरों व दो डंपरों की वजह से हुए। वहीं, मई की अगर बात करें तो 12 दिनों के अंदर 10 हादसे हुए हैं। इनमें 11 लोगों की मौत हुई है जबकि आठ घायल हुए हैं। मई में डंपरों के कारण चार हादसे हुए हैं जिनमें तीन हादसे ऐसे हैं जिनमें दो या इससे अधिक लोगों की मौत हुई है। संवाद
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- बंद कमरे में होती है सड़क सुरक्षा की बातें
सड़क हादसों को रोकने के लिए जिला प्रशासन समय-समय पर रोड सेफ्टी कमेटी की बैठक ली जाती है। बैठक में बंद कमरे के अंदर सड़क हादसों को रोकने पर मंथन के साथ योजना तो तैयार की जाती है, लेकिन धरातल पर इन योजनाओं को परवान नहीं चढ़ाया जाता। इसका खामियाजा लोगों को हादसों में जान गंवाकर भुगतना पड़ता है।
- इन हादसों से जानिए सड़कों पर डंपरों के रूप में दौड़ रहे यमदूत
1- 2 मई को कलियाणा-मंदौली बाईपास पर दो ट्रकों की भिड़त में दो लोगों की मौत हुई।
2- 11 मई को अटेला कलां के समीप डंपर की टक्कर से दुग्ध वाहन सवार दो लोगों की मौत हुई।
3- 12 मई को अटेला कलां के समीप डंपर की टक्कर से कार सवार दो महिलाओं व एक युवक की मौत हुई।
4- 19 अप्रैल को डांडमा के समीप ट्रक की टक्कर से बाइक सवार व्यक्ति की मौत हुई।
5- 4 मार्च को ट्रक की टक्कर से बाइक सवार युवक ने दम तोड़ दिया।
6- 14 मार्च को पिचोपा कलां क्रशर जोन में डंपर की टक्कर से श्रमिक की मौत हुई।
7- 17 मार्च को सेक्टर-8 के समीप डंपर की टक्कर से बाइक सवार की मौत हुई।
8- 20 मार्च को दादरी-रोहतक मार्ग पर बस की टक्कर से ऑटो सवार तीन लोगों की मौत हुई।
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