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Charkhi Dadri News: सरकारी पोर्टल बाढड़ा और हंसावास को गांव में बता रहा न शहर में, लोग परेशान
Sun, 16 Jun 2024 03:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sun, 16 Jun 2024 03:24 AM IST
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बाढड़ा स्थित मुख्य क्रांतिकारी चौक।
बाढड़ा। बाढड़ा नगर पालिका का दर्जा दिसंबर 2022 में खत्म करने के बावजूद पंचायत चुनाव नहीं करवाए गए। चुनाव न होने से आमजन को कई परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। विकास कार्य नहीं हो पा रहे हैं। सरकारी पोर्टल बाढड़ा और हंसावास को गांव में बता रहा न शहर में। इससे लोग परेशान हैं।
जनमत संग्रह की रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने नगर पालिका का दर्जा खत्म किया था। पिछले आठ माह से प्रशासन केवल वार्डबंदी और मतदाता सूची तैयार करने में ही व्यस्त है जबकि लोगों ने पंचायत चुनाव जल्द करवाने की मांग की है।
बाढड़ा ग्राम पंचायत को वर्ष 2021 में नगरपालिका का दर्जा दिया गया था लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण बाद में नगरपालिका का दर्जा खत्म कर फिर से पंचायत का दर्जा बहाल किया गया।
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व्यापार मंडल अध्यक्ष संदीप सिंटी ने कहा कि 29 जून 2022 को दोनों ग्राम पंचायतों को नगरपालिका में शामिल किया गया था लेकिन ग्रामीणों के विरोध बाद हुए जनमत संग्रह के आधार पर सरकार ने 16 दिसंबर 2022 को नगरपालिका का दर्जा खत्म कर दिया था। तब से इन दोनों गांवों को ग्राम पंचायत का दर्जा मिल गया है। इसलिए बीडीपीओ को इन गांवों का प्रशासक नियुक्त किया गया है लेकिन इन दोनों गांवों को सरकारी पोर्टल पर न तो गांव दर्शाया जा रहा है और न ही नगरपालिका। लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन को इन दोनों गांवों में नई पंचायतों का गठन जल्द करना चाहिए।
वहीं, एसडीएम सुरेश दलाल ने कहा कि गांव बाढड़ा और हंसावास खुर्द में नई पंचायतों के गठन के लिए उपमंडल प्रशासन मुस्तैदी से जुटा है। गांव बाढड़ा के 18 और हंसावास खुर्द के आठ वार्डों की नई मतदाता सूची तैयार कर डीडीपीओ के माध्यम से राज्य मुख्यालय भेजी गई है। वहां से वार्डों के आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होते ही चुनाव की तैयारियां शुरू हो जाएंगी।
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जनमत संग्रह की रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने नगर पालिका का दर्जा खत्म किया था। पिछले आठ माह से प्रशासन केवल वार्डबंदी और मतदाता सूची तैयार करने में ही व्यस्त है जबकि लोगों ने पंचायत चुनाव जल्द करवाने की मांग की है।
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बाढड़ा ग्राम पंचायत को वर्ष 2021 में नगरपालिका का दर्जा दिया गया था लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण बाद में नगरपालिका का दर्जा खत्म कर फिर से पंचायत का दर्जा बहाल किया गया।
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व्यापार मंडल अध्यक्ष संदीप सिंटी ने कहा कि 29 जून 2022 को दोनों ग्राम पंचायतों को नगरपालिका में शामिल किया गया था लेकिन ग्रामीणों के विरोध बाद हुए जनमत संग्रह के आधार पर सरकार ने 16 दिसंबर 2022 को नगरपालिका का दर्जा खत्म कर दिया था। तब से इन दोनों गांवों को ग्राम पंचायत का दर्जा मिल गया है। इसलिए बीडीपीओ को इन गांवों का प्रशासक नियुक्त किया गया है लेकिन इन दोनों गांवों को सरकारी पोर्टल पर न तो गांव दर्शाया जा रहा है और न ही नगरपालिका। लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन को इन दोनों गांवों में नई पंचायतों का गठन जल्द करना चाहिए।
वहीं, एसडीएम सुरेश दलाल ने कहा कि गांव बाढड़ा और हंसावास खुर्द में नई पंचायतों के गठन के लिए उपमंडल प्रशासन मुस्तैदी से जुटा है। गांव बाढड़ा के 18 और हंसावास खुर्द के आठ वार्डों की नई मतदाता सूची तैयार कर डीडीपीओ के माध्यम से राज्य मुख्यालय भेजी गई है। वहां से वार्डों के आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होते ही चुनाव की तैयारियां शुरू हो जाएंगी।