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Charkhi Dadri News: उपभोक्ता आयोग ने बैंकिंग सेवा में कोताही पर लगाया जुर्माना, अतिरिक्त वसूली लौटाने का आदेश
Sun, 10 May 2026 12:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sun, 10 May 2026 12:21 AM IST
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चरखी दादरी। दादरी जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बैंकिंग सेवा में कोताही और अनुचित व्यापार व्यवहार के मामले में बैंक को आदेश दिया कि वह शिकायतकर्ता से अतिरिक्त वसूली गई राशि ब्याज सहित लौटाए और मानसिक परेशानी के लिए मुआवजा दे।
शिकायतकर्ता संजय कुमार ने बताया कि उन्होंने मई 2022 में एक एजेंसी से आयशर ट्रैक्टर 6,90,000 रुपये में खरीदा। उन्होंने एक लाख 60 हजार रुपये नकद जमा किए और शेष राशि के लिए बैंक से ऋण लिया। शिकायतकर्ता का आरोप था कि बैंक ने उनकी वास्तविक ऋण आवश्यकता 5,11,190 रुपये के बजाय 5,50,000 रुपये का ऋण मंजूर कर उससे अतिरिक्त ब्याज वसूलना शुरू कर दिया, जिससे 38,110 रुपये की अतिरिक्त वसूली हुई।
आयोग के अध्यक्ष मंजीत सिंह नरयाल ने सुनवाई में पाया कि बैंक की ओर से कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ, जिसके कारण मामला एकतरफा घोषित किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और बैंक स्टेटमेंट से स्पष्ट हुआ कि बैंक ने जरूरत से अधिक ऋण मंजूर कर आर्थिक बोझ डाला।
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आयोग ने ट्रैक्टर विक्रेता को इस मामले में जिम्मेदार नहीं माना, क्योंकि उनकी भूमिका केवल बिक्री तक सीमित थी। आयोग ने बैंक को निर्देश दिया कि वह शिकायतकर्ता को 38,110 रुपये की अतिरिक्त राशि 9 फीसदी वार्षिक ब्याज सहित लौटाए। इसके अलावा मानसिक पीड़ा के लिए 5,000 रुपये का मुआवजा दे। कानूनी खर्च के लिए 5,000 रुपये का भुगतान करे। आदेश में कहा कि यदि बैंक 45 दिनों के भीतर आदेश का पालन नहीं करता है तो कुल राशि पर 12% वार्षिक ब्याज देना होगा।
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शिकायतकर्ता संजय कुमार ने बताया कि उन्होंने मई 2022 में एक एजेंसी से आयशर ट्रैक्टर 6,90,000 रुपये में खरीदा। उन्होंने एक लाख 60 हजार रुपये नकद जमा किए और शेष राशि के लिए बैंक से ऋण लिया। शिकायतकर्ता का आरोप था कि बैंक ने उनकी वास्तविक ऋण आवश्यकता 5,11,190 रुपये के बजाय 5,50,000 रुपये का ऋण मंजूर कर उससे अतिरिक्त ब्याज वसूलना शुरू कर दिया, जिससे 38,110 रुपये की अतिरिक्त वसूली हुई।
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आयोग के अध्यक्ष मंजीत सिंह नरयाल ने सुनवाई में पाया कि बैंक की ओर से कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ, जिसके कारण मामला एकतरफा घोषित किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और बैंक स्टेटमेंट से स्पष्ट हुआ कि बैंक ने जरूरत से अधिक ऋण मंजूर कर आर्थिक बोझ डाला।
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आयोग ने ट्रैक्टर विक्रेता को इस मामले में जिम्मेदार नहीं माना, क्योंकि उनकी भूमिका केवल बिक्री तक सीमित थी। आयोग ने बैंक को निर्देश दिया कि वह शिकायतकर्ता को 38,110 रुपये की अतिरिक्त राशि 9 फीसदी वार्षिक ब्याज सहित लौटाए। इसके अलावा मानसिक पीड़ा के लिए 5,000 रुपये का मुआवजा दे। कानूनी खर्च के लिए 5,000 रुपये का भुगतान करे। आदेश में कहा कि यदि बैंक 45 दिनों के भीतर आदेश का पालन नहीं करता है तो कुल राशि पर 12% वार्षिक ब्याज देना होगा।