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Charkhi Dadri News: दुर्घटनाग्रस्त वाहन का कंपनी ने बीमा क्लेम किया था खारिज, उपभोक्ता न्यायालय ने क्लेम और हर्जाने के साथ 4.94 लाख रुपये चुकाने के दिए आदेश

Sat, 07 Feb 2026 12:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Sat, 07 Feb 2026 12:32 AM IST
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The company had rejected the insurance claim for the accident vehicle; the consumer court ordered payment of Rs 4.94 lakh along with the claim and damages
चरखी दादरी। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने वाहन का बीमा क्लेम खारिज करने और सेवा में कोताही बरतने के एक मामले में बीमा कंपनी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने बीमा कंपनी को निर्देश दिया कि वह शिकायतकर्ता को सर्वेयर द्वारा आकलित राशि, पार्किंग शुल्क, मुआवजा और कानूनी खर्च सहित करीब 4.94 लाख रुपये (ब्याज के अतिरिक्त) का भुगतान करे।
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यह था मामला
गांव निहालगढ़ निवासी संदीप कुमार ने अपनी महिंद्रा बोलेरो गाड़ी का बीमा चोलामंडलम कंपनी से करवाया था। 13 फरवरी 2023 को गांव रामबास से निहालगढ़ आते समय गांव सेहलंग-आकोदा रोड पर एक नीलगाय सामने आने से गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई। शिकायतकर्ता के अनुसार, बीमा कंपनी के एजेंट के निर्देश पर गाड़ी को ठीक करवाने के लिए भिवानी स्थित एक वर्कशॉप में रखा गया। यहां करीब 70 दिनों तक गाड़ी खड़ी रही। इसके बावजूद न तो कंपनी ने क्लेम पास किया और न ही गाड़ी की मरम्मत करवाई जिसके बाद शिकायतकर्ता को 18 हजार रुपये पार्किंग शुल्क जमा करवाकर गाड़ी वापस लेनी पड़ी और जेब से पांच लाख रुपये खर्च कर दूसरी जगह मरम्मत करवानी पड़ी।
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कंपनी की दलीलों को किया खारिज
बीमा कंपनी ने गूगल टाइमलाइन की विसंगतियों, एफआईआर की कमी और दुर्घटना के समय चालक की मौजूदगी पर संदेह जताते हुए नो क्लेम घोषित कर दिया था। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष मंजीत सिंह नरयाल ने मामले की सुनवाई के दौरान कंपनी की इन दलीलों को तकनीकी खामियां बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि गूगल टाइमलाइन एक सहायक उपकरण है। इसे निर्णायक कानूनी सबूत नहीं माना जा सकता। खासकर तब जब अस्पताल के रिकॉर्ड और मेडिकल रिपोर्ट पुष्टि करते हों कि दुर्घटना के दिन घायलों का उपचार हुआ था।
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आयोग ने ये दिए आदेश
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बीमा कंपनी को सर्वेयर द्वारा निर्धारित की गई 4,51,231 रुपये की राशि नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देने के आदेश दिए। साथ ही शिकायतकर्ता से वसूले गए 18 हजार रुपये वापस करने के भी आदेश दिए। इनके अलावा शिकायतकर्ता को मानसिक पीड़ा के लिए 15 हजार रुपये और मुकदमेबाजी के खर्च के तौर पर 10 हजार रुपये का भुगतान करने के भी आदेश दिए। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि 45 दिनों के अंदर इस आदेश की पालना न होने पर ब्याज दर को बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दिया जाएगा।
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