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जनवरी माह में हुई बारिश व खराब मौसम से सरसों की औसत पैदावार घटी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 01 Apr 2022 12:06 AM IST
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The average yield of mustard decreased due to rain and bad weather in the month of January.
चरखी दादरी। जनवरी माह में अधिक मात्रा में बारिश व करीब 20 दिनों तक लगातार पर्याप्त धूप फसली पौधों को नहीं मिलने से सरसों की औसत पैदावार कम हुई है। यही नहीं, फसल की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव सामने आया है। सरसों की औसत पैदावार सात से आठ क्विंटल प्रति एकड़ आ रही है, जबकि पिछले साल 10 से 12 क्विंटल औसत पैदावार रही थी। जांच लैब रिपोर्ट में भी क्वालिटी कम पाई जा रही है। सरसों के दाने की क्वालिटी मेें काफी गिरावट आई है। खराब मौसम की वजह से दाने का पकाव भी बढ़िया नहीं हो सका। दाने की चमक खत्म हो गई। ऐसे में इसका बाजारी रेट एवं बिक्री पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। मौजूदा रबी सीजन में सरसों का रकबा करीब 70 हजार हेक्टेयर क्षेत्र था।
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पांच से नौ जनवरी को 65 एमएम व उसके बाद 27 से 29 जनवरी को हुई 13 एमएम बारिश जिले में हुई थी। उसके बाद लंबे समय तक धूप नहीं खिलने की वजह से सरसों का पकाव ठीक प्रकार से नहीं हो सका। उसके बाद मार्च में कटाई से 15 दिन पहले तापमान के अचानक बढ़ जाने से सरसों में नुकसान हुआ है। ज्यादा मात्रा में बारिश होने से जिला के तराई वाले क्षेत्रों में जलभराव होने पर दाना की गुणवत्ता में गिरावट आई है। दाना की चमक फिकी हो गई, जिससे तेल की मात्रा भी कम हुई है। इससे आम बाजार में सरसों के दामों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। किसान चांद सिंह, भोलूराम, धारे सिंह, सुरेंद्र कुमार, सुखवीर सिंह का कहना है कि जनवरी माह में बारिश ज्यादा हो गई थी और लंबे समय तक धूप नहीं खिली। इससे सरसों में व्हाइट ट्रस्ट रोग भी लग गया था। इन कारणों से सरसों की इस बार औसत पैदावार कम मिल रही है। इन किसानों का कहना है कि प्रति एकड़ सात से आठ क्विंटल ही पैदावार मिल रही है, जबकि गत वर्ष 10 से 12 क्विंटल प्रति एकड़ तक पैदावार पहुंच गई थी। इससे किसानों को प्रति एकड़ 12 से 15 हजार रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है।
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अब तक हो चुकी 18 हजार क्विंटल सरसों की खरीद -
दादरी जिले में इस सीजन की बात करें तो एक दाना भी सरकारी एजेंसी की ओर से नहीं खरीदा गया है। किसान प्राइवेट तौर पर ही सरसों बेच रहे हैं। अब तक जिले में 600 किसान करीब 18 हजार क्विंटल सरसों बेच चुके हैं। उन्होंने सरसों के भाव 6850 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रहे हैं जबकि सरकारी खरीद रेट 5050 निर्धारित है।
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वर्जन::
इस बार मौसम के प्रतिकूल बने रहने की वजह से औसत पैदावार पर प्रतिकूल असर पड़ा है। दाना की गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ा है। दाना की चमक कम हुई है।
- जितेंद्र सिंह, कृषि विशेषज्ञ।
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