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Charkhi Dadri News: 13 साल में सुशीला और मंजूबाला ने 1750 बच्चों करवाई सुरक्षित डिलीवरी
Fri, 12 May 2023 12:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Fri, 12 May 2023 12:00 AM IST
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चरखी दादरी। स्वास्थ्य विभाग में सेवाएं देने वालीं स्टाफ नर्सों के लिए नर्सिंग-डे का विशेष महत्व है। जिले की बात करे तो सिविल अस्पताल में तैनात स्टाफ नर्स सुशीला पिछले 13 वर्षों की सेवाकाल में लगभग 1000 डिलीवरी करवा चुकी हैं जबकि इसी अस्पताल की नर्सिंग ऑफिसर मंजूबाला भी 750 डिलीवरी अब तक करवा चुकी हैं। इन दोनों को काफी अनुभव है। ऑपरेशन से होने वाली डिलीवरी को भी ये नॉर्मल डिलीवरी के तौर पर करवा चुकी हैं।
बता दें कि नर्सिंग दिवस नोबल नर्सिंग सेवा की शुरुआत करने वालीं फ्लोरेंस नाइटिंगले के जन्मदिवस पर दुनियाभर में मनाते हैं। फ्लोरेंस को विश्व की पहली नर्स माना जाता है। उन्होंने क्रीमियन युद्ध के दौरान घायल ब्रिटिश सैनिकों की लालटेन लेकर देखभाल की थी। इस वजह से उन्हें लेडी विद द लैंप भी कहा गया। जिला अस्पताल में पिंकी, मंजू, सनीता, संतरा सहित लगभग 40 नर्स काम कर रही हैं।
- एक डिलीवरी सुशीला का ताउम्र रहेगी याद
स्टाफ नर्स सुशीला ने बताया कि उसको नौकरी करते हुए 13 वर्ष हो गए हैं। इस दौरान उसकी अधिकतम ड्यूटी लेबर रूम में ही रही है। वह 13 वर्षों में लगभग 1000 डिलीवरी करवा चुकी हैं। सबसे खास बात यह रही है कि उनके पास कोई मेटरनल डेथ नहीं हुई है (यानि डिलीवरी के दौरान किसी प्रसूता की मौत)। सुशीला ने बताया कि अस्पताल में आई हंसावास की गर्भवती महिला बीपी एवं हाइपरटेंशन की शिकार थी। डिलीवरी के दौरान अचानक वह बेसुध हो गई। उसकी पल्स भी उन्हें महसूस नहीं हो रही थी। उसे एक बार के लिए लगा कि गर्भवती महिला की मौत हो गई। इससे वह घबरा गई थी। इस दौरान चिकित्सक को बुलाकर लेकर आए तो चंद मिनटों में उसकी पल्स वापस आई और उसकी बॉडी हरकत करने लगी।
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- 10 साल से स्वास्थ्य विभाग को सेवाएं दे रहीं मंजूबाला
स्टाफ नर्स मंजूबाला ने बताया कि वह अपनी 10 वर्षों की नौकरी में लगभग 750 डिलवरी करवा चुकी है। उनके पास भी कोई मेटरनल डेथ नहीं हुई है। मंजूबाला का कहना है कि हमेशा नर्स का अलर्ट रहना पड़ता है। उन्होंने अपने सेवाकाल के दौरान एक कठिन डिलीवरी कराई है, जो उन्हें याद रहेगी। उन्होंने बताया कि एक गर्भवती महिला की लंबाई छोटी थी जबकि भ्रूण वजन में भारी था, ऐसे स्थिति में चिकित्सक ऑपरेशन ही बताते हैं लेकिन अपने अनुभव के आधार पर उसकी नॉर्मल डिलीवरी करवाई। उन्होंने बताया कि अधिकतर डिलीवरी स्टाफ नर्स ही करवाती हैं, चिकित्सक की जरूरत पड़ने पर ही बुलाया जाता है। स्टाफ नर्स को हर परिस्थिति में काम करना पड़ता है।
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बता दें कि नर्सिंग दिवस नोबल नर्सिंग सेवा की शुरुआत करने वालीं फ्लोरेंस नाइटिंगले के जन्मदिवस पर दुनियाभर में मनाते हैं। फ्लोरेंस को विश्व की पहली नर्स माना जाता है। उन्होंने क्रीमियन युद्ध के दौरान घायल ब्रिटिश सैनिकों की लालटेन लेकर देखभाल की थी। इस वजह से उन्हें लेडी विद द लैंप भी कहा गया। जिला अस्पताल में पिंकी, मंजू, सनीता, संतरा सहित लगभग 40 नर्स काम कर रही हैं।
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- एक डिलीवरी सुशीला का ताउम्र रहेगी याद
स्टाफ नर्स सुशीला ने बताया कि उसको नौकरी करते हुए 13 वर्ष हो गए हैं। इस दौरान उसकी अधिकतम ड्यूटी लेबर रूम में ही रही है। वह 13 वर्षों में लगभग 1000 डिलीवरी करवा चुकी हैं। सबसे खास बात यह रही है कि उनके पास कोई मेटरनल डेथ नहीं हुई है (यानि डिलीवरी के दौरान किसी प्रसूता की मौत)। सुशीला ने बताया कि अस्पताल में आई हंसावास की गर्भवती महिला बीपी एवं हाइपरटेंशन की शिकार थी। डिलीवरी के दौरान अचानक वह बेसुध हो गई। उसकी पल्स भी उन्हें महसूस नहीं हो रही थी। उसे एक बार के लिए लगा कि गर्भवती महिला की मौत हो गई। इससे वह घबरा गई थी। इस दौरान चिकित्सक को बुलाकर लेकर आए तो चंद मिनटों में उसकी पल्स वापस आई और उसकी बॉडी हरकत करने लगी।
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- 10 साल से स्वास्थ्य विभाग को सेवाएं दे रहीं मंजूबाला
स्टाफ नर्स मंजूबाला ने बताया कि वह अपनी 10 वर्षों की नौकरी में लगभग 750 डिलवरी करवा चुकी है। उनके पास भी कोई मेटरनल डेथ नहीं हुई है। मंजूबाला का कहना है कि हमेशा नर्स का अलर्ट रहना पड़ता है। उन्होंने अपने सेवाकाल के दौरान एक कठिन डिलीवरी कराई है, जो उन्हें याद रहेगी। उन्होंने बताया कि एक गर्भवती महिला की लंबाई छोटी थी जबकि भ्रूण वजन में भारी था, ऐसे स्थिति में चिकित्सक ऑपरेशन ही बताते हैं लेकिन अपने अनुभव के आधार पर उसकी नॉर्मल डिलीवरी करवाई। उन्होंने बताया कि अधिकतर डिलीवरी स्टाफ नर्स ही करवाती हैं, चिकित्सक की जरूरत पड़ने पर ही बुलाया जाता है। स्टाफ नर्स को हर परिस्थिति में काम करना पड़ता है।