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अब तक डेंगू के 17 तो मलेरिया के 12 केस मिले पॉजिटिव
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डेंगू के सैंपल की जांच करता लैब टेक्नीशियन।
- फोटो : CharkhiDadri
जिले में अब तक डेंगू के 17 और मलेरिया के 12 पॉजिटिव केस मिले हैं। मंगलवार तक डेंगू के 40 सैंपल जांचे गए थे, जबकि मलेरिया की 62977 स्लाइड तैयार की गई थीं। वर्ष 2018 के आंकड़ों की बात करें तो डेंगू के 34 और मलेरिया के 30 मामले सामने आए थे। विभाग के अधिकारियों का दावा है कि स्थिति नियंत्रण में है और लारवा मिलने पर मकान मालिक को नोटिस दिए जा रहे हैं। अधिकारियों का तर्क है कि नोटिस देने के साथ ही पानी का बर्तन भी खाली करवा दिया जाता है।
शहर में सीवर व्यवस्था ठप होने के चलते जगह-जगह दूषित पानी भरा हुआ है। पानी जमा होने के कारण मच्छरों की भरमार भी है और लोगों में बीमारियां फैलने का डर बना हुआ है। अब अगर अस्पताल की ओपीडी की बात करें तो आजकल यह करीब पंद्रह फीसदी बढ़ी है। सिविल की ओपीडी पर 450 से बढ़कर 530 से 580 तक पहुंच गई है। ज्यादातर मामले वायरल के सामने आ रहे हैं। सिविल अस्पताल में मलेरिया टेस्ट की सुविधा पहले से ही थी, जबकि डेंगू टेस्ट की सुविधा करीब डेढ़ माह पहले ही शुरू हुई है। अब सिविल अस्पताल में चौबीस घंटे के अंदर डेंगू की रिपोर्ट दे दी जाती है। डिप्टी सीएमओ चंचल तोमर ने बताया कि मंगलवार पांच नवंबर तक डेंगू के चालीस सैंपलों की जांच की गई थी, जिसमें से 17 पॉजिटिव पाए गए।
उन्होंने बताया कि इन 17 में से तीन केस ऐसे हैं जिन्हें दादरी जिले के लारवा से डेंगू हुआ है और बाकी डेंगू पीड़ित दूसरे शहरों में रहते हैं। उन्होंने अपनी जांच दादरी सिविल अस्पताल में करवाई है। उन सबका उपचार विभाग की निगरानी में चल रहा है। चंचल तोमर ने बताया कि सिविल अस्पताल में दवाओं का स्टॉक पूरा है। उन्होंने बताया कि विभागीय टीमें लगातार जांच कर रही हैं और मकान में रखे बर्तनों में लारवा मिलने पर मकान मालिकों को नोटिस दिए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पांच नवंबर तक 1027 लोगों को लारवा मिलने पर नोटिस दिए जा चुके हैं। हालांकि अब तक किसी का चालान नहीं काटा गया है।
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मलेरिया से पीड़ित हैं तीन शहर के तो नौ गांवों के रहने वाले
डिप्टी सीएमओ ने बताया कि सिविल अस्पताल की लैब में जनवरी से लेकर नवंबर तक 62 हजार 977 स्लाइड तैयार की गई हैं। गत सितंबर से पांच नवंबर तक 12 केस मलेरिया पॉजिटिव मिले हैं। उन्होंने बताया कि इनमें से तीन केस शहर के हैं, जबकि नौ मरीज अलग-अलग गांव के रहने वाले हैं। अब तक शहर की किसी कॉलोनी या किसी गांव से डेंगू पीड़ित दो केस सामने नहीं आए हैं। ऐसे में लोगों के लिए घबराने वाली बात नहीं है और स्थिति विभाग के नियंत्रण में है।
डेंगू की जांच के लिए नहीं देेने पड़ेंगे 600 रुपये, चिकनगुनिया टेस्ट की सुविधा अभी नहीं
सिविल अस्पताल में डेंगू टेस्ट की सुविधा गत सितंबर माह से ही शुरू की गई है। इससे पहले आशंकित मरीजों के सैंपल लेकर जांच के लिए भिवानी सिविल अस्पताल भेजे जाते थे और रिपोर्ट चार से पांच दिन बाद मिलती थी। ऐसे में लोग प्राइवेट तौर पर ही अपना टेस्ट कराते थे और उन्हें इसके बदले 600 रुपये चुकाने पड़ते थे। वहीं सिविल अस्पताल में एलाइजा रीडर मशीन सीएमओ विरेंद्र यादव कार्यभार संभालते ही इंस्टॉल करवा चुके हैं। उन्होंने डेंगू जांच की सुविधा देकर मरीजों को राहत दी है। अभी भी चिकनगुनिया टेस्ट की सुविधा के लिए जिले के मरीजों को इंतजार करना होगा।
नोडल अधिकारी एवं डिप्टी सीएमओ चंचल तोमर ने बताया कि स्थिति विभाग के नियंत्रण में हैं और घबराने जैसी कोई बात नहीं है। इस सीजन में डेंगू के 17 और मलेरिया के 12 केस मिले हैं। पिछले साल यह आंकड़ा 34 और 30 था। पीड़ितों का विभाग की निगरानी में उपचार चल रहा है।
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शहर में सीवर व्यवस्था ठप होने के चलते जगह-जगह दूषित पानी भरा हुआ है। पानी जमा होने के कारण मच्छरों की भरमार भी है और लोगों में बीमारियां फैलने का डर बना हुआ है। अब अगर अस्पताल की ओपीडी की बात करें तो आजकल यह करीब पंद्रह फीसदी बढ़ी है। सिविल की ओपीडी पर 450 से बढ़कर 530 से 580 तक पहुंच गई है। ज्यादातर मामले वायरल के सामने आ रहे हैं। सिविल अस्पताल में मलेरिया टेस्ट की सुविधा पहले से ही थी, जबकि डेंगू टेस्ट की सुविधा करीब डेढ़ माह पहले ही शुरू हुई है। अब सिविल अस्पताल में चौबीस घंटे के अंदर डेंगू की रिपोर्ट दे दी जाती है। डिप्टी सीएमओ चंचल तोमर ने बताया कि मंगलवार पांच नवंबर तक डेंगू के चालीस सैंपलों की जांच की गई थी, जिसमें से 17 पॉजिटिव पाए गए।
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उन्होंने बताया कि इन 17 में से तीन केस ऐसे हैं जिन्हें दादरी जिले के लारवा से डेंगू हुआ है और बाकी डेंगू पीड़ित दूसरे शहरों में रहते हैं। उन्होंने अपनी जांच दादरी सिविल अस्पताल में करवाई है। उन सबका उपचार विभाग की निगरानी में चल रहा है। चंचल तोमर ने बताया कि सिविल अस्पताल में दवाओं का स्टॉक पूरा है। उन्होंने बताया कि विभागीय टीमें लगातार जांच कर रही हैं और मकान में रखे बर्तनों में लारवा मिलने पर मकान मालिकों को नोटिस दिए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पांच नवंबर तक 1027 लोगों को लारवा मिलने पर नोटिस दिए जा चुके हैं। हालांकि अब तक किसी का चालान नहीं काटा गया है।
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मलेरिया से पीड़ित हैं तीन शहर के तो नौ गांवों के रहने वाले
डिप्टी सीएमओ ने बताया कि सिविल अस्पताल की लैब में जनवरी से लेकर नवंबर तक 62 हजार 977 स्लाइड तैयार की गई हैं। गत सितंबर से पांच नवंबर तक 12 केस मलेरिया पॉजिटिव मिले हैं। उन्होंने बताया कि इनमें से तीन केस शहर के हैं, जबकि नौ मरीज अलग-अलग गांव के रहने वाले हैं। अब तक शहर की किसी कॉलोनी या किसी गांव से डेंगू पीड़ित दो केस सामने नहीं आए हैं। ऐसे में लोगों के लिए घबराने वाली बात नहीं है और स्थिति विभाग के नियंत्रण में है।
डेंगू की जांच के लिए नहीं देेने पड़ेंगे 600 रुपये, चिकनगुनिया टेस्ट की सुविधा अभी नहीं
सिविल अस्पताल में डेंगू टेस्ट की सुविधा गत सितंबर माह से ही शुरू की गई है। इससे पहले आशंकित मरीजों के सैंपल लेकर जांच के लिए भिवानी सिविल अस्पताल भेजे जाते थे और रिपोर्ट चार से पांच दिन बाद मिलती थी। ऐसे में लोग प्राइवेट तौर पर ही अपना टेस्ट कराते थे और उन्हें इसके बदले 600 रुपये चुकाने पड़ते थे। वहीं सिविल अस्पताल में एलाइजा रीडर मशीन सीएमओ विरेंद्र यादव कार्यभार संभालते ही इंस्टॉल करवा चुके हैं। उन्होंने डेंगू जांच की सुविधा देकर मरीजों को राहत दी है। अभी भी चिकनगुनिया टेस्ट की सुविधा के लिए जिले के मरीजों को इंतजार करना होगा।
नोडल अधिकारी एवं डिप्टी सीएमओ चंचल तोमर ने बताया कि स्थिति विभाग के नियंत्रण में हैं और घबराने जैसी कोई बात नहीं है। इस सीजन में डेंगू के 17 और मलेरिया के 12 केस मिले हैं। पिछले साल यह आंकड़ा 34 और 30 था। पीड़ितों का विभाग की निगरानी में उपचार चल रहा है।