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Charkhi Dadri News: बाल वाटिकाओं में 400 से ज्यादा शिक्षकों की कमी
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चरखी दादरी। जिले में इस सत्र से बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाने के लिए सरकार ने बाल वाटिकाएं शुरू की हैं, लेकिन इनमें शिक्षकों की भारी कम है। इसके चलते सभी छात्र-छात्राओं की प्रतिदिन होमवर्क बुक भी चेक नहीं हो पा रही है।
जिले में 200 राजकीय प्राइमरी स्कूलों में बाल वाटिका-तीन की कक्षाएं लगती हैं, जबकि बाल वाटिका-एक व दो के विद्यार्थियों की कक्षाएं आंगनबाड़ी केंद्र में लगाई जा रही हैं। इन बाल वाटिकाओं में 1014 विद्यार्थियों ने दाखिला ले लिया है। जिले की प्रत्येक बाल वाटिका में शिक्षकों की कमी है। पूरे जिले की बात करें तो बाल वाटिकाओं में 400 से ज्यादा शिक्षकों की कमी है।
शिक्षा विभाग ने इसी शिक्षा सत्र से बाल वाटिका शुरू की हैं, ताकि निजी स्कूलों की तर्ज पर नर्सरी, एलकेजी व यूकेजी कक्षाओं मेंं राजकीय स्कूलों में भी विद्यार्थियों को पढ़ने का अवसर मिल सके। मौजूद शिक्षा सत्र से इन बाल वाटिकाओं को भी ऑनलाइन कर दिया गया है। इन विद्यार्थियों का भी विभाग के एमआईएस पोर्टल पर पूरा विवरण दर्ज किया जा रहा है।
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ये सामान अब तक पहुंच चुका
बाल वाटिकाओं में अब तक काफी सामान पहुंच चुका है। इसमें आकृति खांचा वर्क बुक, झूला, अक्षर ज्ञान के लिए चित्रों पर आधारित वर्क बुक, प्लास्टिक के झूले, बैठने के लिए छोटी चेयर आदि शामिल हैं। संख्या ज्ञान प्राप्ति के लिए रंग-बिरंगी गिनतारा रस्सी मंगवा रखी हैं। सांप-सीढ़ी भी उपलब्ध हैं। लूडो व टैरम के अलावा, संपर्क किट, संपर्क टीवी से विद्यार्थियों को पढ़ाया जा रहा है।
आधारभूत ढांचे में सुधार की जरूरत
आंगनबाड़ी केंद्रों में चल रहीं बाल-वाटिकाओं में आधारभूत ढांचे में सुधार की जरूरत है। इनमें सुविधाएं बढ़ाने की जरूरत है। बाल वाटिका-एक में तीन साल तक बच्चे दाखिल होते हैं। बाल वाटिका-दो में पांच साल तक व बाल वाटिका-तीन में छह साल के बच्चे का दाखिला होता है। प्रत्येक बाल वाटिका में 25 छात्र हैं। छात्र शिक्षक का अनुपात 25:1 निर्धारित किया गया है, लेकिन कुछ को छोड़ किसी भी शिक्षक और सहायक को तैनात नहीं किया गया है।
बाल वाटिकाओं में शिक्षकों की कमी को जल्द ही दूर करवा दिया जाएगा। अन्य शिक्षण सुविधाओं में धीरे-धीरे विस्तार किया जा रहा है। अधिकतर सामान पहुंच चुका है, अभी दाखिला प्रक्रिया चल रही है। - ज्ञानेंद्र सिंह, कार्यकारी डीईओ।
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जिले में 200 राजकीय प्राइमरी स्कूलों में बाल वाटिका-तीन की कक्षाएं लगती हैं, जबकि बाल वाटिका-एक व दो के विद्यार्थियों की कक्षाएं आंगनबाड़ी केंद्र में लगाई जा रही हैं। इन बाल वाटिकाओं में 1014 विद्यार्थियों ने दाखिला ले लिया है। जिले की प्रत्येक बाल वाटिका में शिक्षकों की कमी है। पूरे जिले की बात करें तो बाल वाटिकाओं में 400 से ज्यादा शिक्षकों की कमी है।
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शिक्षा विभाग ने इसी शिक्षा सत्र से बाल वाटिका शुरू की हैं, ताकि निजी स्कूलों की तर्ज पर नर्सरी, एलकेजी व यूकेजी कक्षाओं मेंं राजकीय स्कूलों में भी विद्यार्थियों को पढ़ने का अवसर मिल सके। मौजूद शिक्षा सत्र से इन बाल वाटिकाओं को भी ऑनलाइन कर दिया गया है। इन विद्यार्थियों का भी विभाग के एमआईएस पोर्टल पर पूरा विवरण दर्ज किया जा रहा है।
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ये सामान अब तक पहुंच चुका
बाल वाटिकाओं में अब तक काफी सामान पहुंच चुका है। इसमें आकृति खांचा वर्क बुक, झूला, अक्षर ज्ञान के लिए चित्रों पर आधारित वर्क बुक, प्लास्टिक के झूले, बैठने के लिए छोटी चेयर आदि शामिल हैं। संख्या ज्ञान प्राप्ति के लिए रंग-बिरंगी गिनतारा रस्सी मंगवा रखी हैं। सांप-सीढ़ी भी उपलब्ध हैं। लूडो व टैरम के अलावा, संपर्क किट, संपर्क टीवी से विद्यार्थियों को पढ़ाया जा रहा है।
आधारभूत ढांचे में सुधार की जरूरत
आंगनबाड़ी केंद्रों में चल रहीं बाल-वाटिकाओं में आधारभूत ढांचे में सुधार की जरूरत है। इनमें सुविधाएं बढ़ाने की जरूरत है। बाल वाटिका-एक में तीन साल तक बच्चे दाखिल होते हैं। बाल वाटिका-दो में पांच साल तक व बाल वाटिका-तीन में छह साल के बच्चे का दाखिला होता है। प्रत्येक बाल वाटिका में 25 छात्र हैं। छात्र शिक्षक का अनुपात 25:1 निर्धारित किया गया है, लेकिन कुछ को छोड़ किसी भी शिक्षक और सहायक को तैनात नहीं किया गया है।
बाल वाटिकाओं में शिक्षकों की कमी को जल्द ही दूर करवा दिया जाएगा। अन्य शिक्षण सुविधाओं में धीरे-धीरे विस्तार किया जा रहा है। अधिकतर सामान पहुंच चुका है, अभी दाखिला प्रक्रिया चल रही है। - ज्ञानेंद्र सिंह, कार्यकारी डीईओ।