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Charkhi Dadri News: स्वयं सहायता समूह बना महिलाओं की ताकत, 14 हजार को मिला आत्मनिर्भरता का सहारा
Thu, 16 Apr 2026 12:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Thu, 16 Apr 2026 12:00 AM IST
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कार्यक्रम में मौजूद स्वयं सहायता समूह की महिलाएं।
- फोटो : 1
चरखी दादरी। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में स्वयं सहायता समूह एक मजबूत सहारा बनकर उभर रहा हैं। जिले में करीब 14 हजार महिलाओं को इन समूहों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का कार्य किया जा रहा है। समूहों के माध्यम से महिलाएं न केवल आमदनी के नए-नए तरीके सीख रही हैं, बल्कि समाज में अपनी एक अलग पहचान भी बना रही हैं।
स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं सिलाई, कढ़ाई, डेयरी, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण और छोटे-छोटे व्यवसायों के जरिए आय अर्जित कर रही हैं। पहले जहां कई महिलाएं घर तक सीमित थीं। अब वे अपने हुनर के दम पर परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। समूहों में नियमित बैठकों के जरिए उन्हें बचत, निवेश और ऋण प्रबंधन की भी जानकारी दी जाती है जिससे उनकी आर्थिक समझ भी मजबूत हो रही है। प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा भी इन समूहों को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों में महिलाओं को आधुनिक तकनीकों, मार्केटिंग और उत्पाद गुणवत्ता सुधार के बारे में जानकारी दी जाती है, ताकि वे अपने उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचा सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वयं सहायता समूह महिलाओं के सशक्तिकरण का एक प्रभावी माध्यम बन चुके हैं।
वर्सन:
स्वयं सहायता समूह न केवल आर्थिक मजबूती देते हैं, बल्कि महिलाओं को सामाजिक रूप से भी मजबूत बना रहा है। हम महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं और उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं।
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- शिवांशु मिश्रा, जिला कार्यक्रम प्रबंधक
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स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं सिलाई, कढ़ाई, डेयरी, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण और छोटे-छोटे व्यवसायों के जरिए आय अर्जित कर रही हैं। पहले जहां कई महिलाएं घर तक सीमित थीं। अब वे अपने हुनर के दम पर परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। समूहों में नियमित बैठकों के जरिए उन्हें बचत, निवेश और ऋण प्रबंधन की भी जानकारी दी जाती है जिससे उनकी आर्थिक समझ भी मजबूत हो रही है। प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा भी इन समूहों को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों में महिलाओं को आधुनिक तकनीकों, मार्केटिंग और उत्पाद गुणवत्ता सुधार के बारे में जानकारी दी जाती है, ताकि वे अपने उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचा सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वयं सहायता समूह महिलाओं के सशक्तिकरण का एक प्रभावी माध्यम बन चुके हैं।
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वर्सन:
स्वयं सहायता समूह न केवल आर्थिक मजबूती देते हैं, बल्कि महिलाओं को सामाजिक रूप से भी मजबूत बना रहा है। हम महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं और उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं।
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- शिवांशु मिश्रा, जिला कार्यक्रम प्रबंधक