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Charkhi Dadri News: 15 दिन बाद खुले स्कूल, 50 प्रतिशत विद्यार्थी ही पहुंचे, जांचा गया गृहकार्य
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गांव खेड़ी बूरा स्थित राजकीय उच्च विद्यालय में प्रवेश करते विद्यार्थी।
चरखी दादरी। जिले में वीरवार को 15 दिन के शीतकालीन अवकाश के बाद सभी स्कूल खुल गए। इनमें सभी शिक्षक उपस्थित रहे जबकि विद्यार्थियों की उपस्थिति 50 फीसदी रही। शिक्षकों ने विद्यार्थियों का गृह कार्य जांचा और 15 दिन में किया गया अभ्यास भी दोहराया गया। वीरवार सुबह धुंध रही, लेकिन कुछ विद्यार्थियों में अपने दोस्तों से मिलने की खुशी थी और किसी में गृह कार्य पूरा कर सबसे पहले जांच कराने की खुशी थी।
जिले में स्कूलों का समय सुबह 9:30 से सायं 3:30 बजे किया हुआ है। प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों की उपस्थिति बहुत कम रही। शिक्षा विभाग की ओर से प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों को किताबों के साथ व्यावहारिक गृह कार्य भी दिया गया था। इनमें से किताबी गृह कार्य सभी ने किया जबकि व्यावहारिक गृह कार्य करने में केवल 60 फीसदी विद्यार्थी ही आगे आए। वीरवार को शिक्षकों ने गृह कार्य की जांच की और व्यावहारिक कार्य के लिए उनके अभिभावकों से बातचीत की। इस दौरान सभी के अभिभावकों ने विद्यार्थियों के घरेलू कार्य में सहयोग करने की हामी नहीं भरी।
हर साल शिक्षा विभाग की ओर से प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों को कुछ अलग गृह कार्य भी दिया जाता है। इसके तहत विद्यार्थियों ने झाडू-पौछा, बर्तन धोना, दुकान से सामान लाना, अपने दादा-दादी के साथ बैठना और कहानी सुनना, बड़ों का अतिथि सत्कार करना, पौधों में पानी डालना व अपने पूर्वजों के नाम व उनके बारे में जानकारी हासिल करना आदि कार्य किए। वरिष्ठ कक्षाओं के विद्यार्थियों में अच्छा उत्साह दिखा और दोस्तों से बातचीत करते नजर आए। उपस्थिति कम होने के कारण शिक्षक भी पढ़ाने के बजाय उनसे 15 दिन का अनुभव जानते मिले। पहले दिन पढ़ाई की गंभीरता भी कम रही।
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अवकाश के बाद पहले दिन विद्यार्थियों की संख्या कम रही, लेकिन सभी शिक्षकों व विद्यार्थियों में जोश रहा। कक्षाओं का दौरा किया गया और विद्यार्थियों का गृह कार्य भी जांचा गया है।
- नवीन नारा, डीईईओ, दादरी
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जिले में स्कूलों का समय सुबह 9:30 से सायं 3:30 बजे किया हुआ है। प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों की उपस्थिति बहुत कम रही। शिक्षा विभाग की ओर से प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों को किताबों के साथ व्यावहारिक गृह कार्य भी दिया गया था। इनमें से किताबी गृह कार्य सभी ने किया जबकि व्यावहारिक गृह कार्य करने में केवल 60 फीसदी विद्यार्थी ही आगे आए। वीरवार को शिक्षकों ने गृह कार्य की जांच की और व्यावहारिक कार्य के लिए उनके अभिभावकों से बातचीत की। इस दौरान सभी के अभिभावकों ने विद्यार्थियों के घरेलू कार्य में सहयोग करने की हामी नहीं भरी।
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हर साल शिक्षा विभाग की ओर से प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों को कुछ अलग गृह कार्य भी दिया जाता है। इसके तहत विद्यार्थियों ने झाडू-पौछा, बर्तन धोना, दुकान से सामान लाना, अपने दादा-दादी के साथ बैठना और कहानी सुनना, बड़ों का अतिथि सत्कार करना, पौधों में पानी डालना व अपने पूर्वजों के नाम व उनके बारे में जानकारी हासिल करना आदि कार्य किए। वरिष्ठ कक्षाओं के विद्यार्थियों में अच्छा उत्साह दिखा और दोस्तों से बातचीत करते नजर आए। उपस्थिति कम होने के कारण शिक्षक भी पढ़ाने के बजाय उनसे 15 दिन का अनुभव जानते मिले। पहले दिन पढ़ाई की गंभीरता भी कम रही।
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अवकाश के बाद पहले दिन विद्यार्थियों की संख्या कम रही, लेकिन सभी शिक्षकों व विद्यार्थियों में जोश रहा। कक्षाओं का दौरा किया गया और विद्यार्थियों का गृह कार्य भी जांचा गया है।
- नवीन नारा, डीईईओ, दादरी