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अपने भविष्य को संवारने के लिए पांच किमी की दूरी पैदल नाप रहे विद्यार्थी
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फोटो 02 जेवली राजकीय मिडिल स्कूल का मेन गेट।
- फोटो : CharkhiDadri
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दो दशक पहले जेवली गांव में बनाए गए मिडिल स्कूल को शिक्षा विभाग ने अपग्रेड नहीं किया है। नौंवी से बारहवीं तक की पढ़ाई के लिए इस समय 150 छात्र-छात्राएं समीपवर्ती चार गांवों के राजकीय स्कूलों में जाने को विवश हैं। इसके चलते उन्हें चार से पांच किलोमीटर की दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। खासकर छात्राओं को अधिक परेशानियां हो रही हैं। ग्राम पंचायत का कहना है कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों सहित शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा को प्रस्ताव सौंपा जा चुका है लेकिन अब तक स्थिति जस की तस है। ग्रामीणों ने स्कूल को अपग्रेड करने की मांग उठाई है।
जेवली गांव की आबादी करीब 3400 है। गांव में 1999 में मिडिल स्कूल का निर्माण किया गया था। उस समय गांव की आबादी करीब साढ़े अठारह सौ थी। गांव की आबादी बढ़ने पर भी शिक्षा सुविधाओं में इजाफा नहीं हो पाया। स्कूल में आठवीं तक की कक्षाएं इस समय लग रही हैं और स्कूल में छात्र-छात्राओं की संख्या 153 है। पिछले साल स्कूल में 170 छात्र-छात्राएं थीं। इस समय गांव से 30 बच्चे बेरला, 40 बच्चे चांदवास, 50 बच्चे बाढड़ा व 30 बच्चे डालावास स्कूल में जा रहे हैं। ये गांव जेवली से चार से पांच किलोमीटर के दायरे में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को यह दूरी पैदल ही तय करनी पड़ती है और इसके चलते सुबह और दोपहर के समय बच्चे पसीने से लथपथ होकर स्कूल और घर पहुंचते हैं। दूसरे गांव के स्कूलों में जाने से छात्राओं को ज्यादा परेशानियां झेलनी पड़ती है। ग्रामीणों ने बताया कि वाहनों की संख्या भी इन रूटों पर कम है और इसके चलते बच्चों को पैदल ही स्कूल पहुंचना पड़ता है। स्कूल मिडिल तक होने के कारण काफी ग्रामीण अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में भेजने को विवश हैं। इसके चलते उन्हें भारी-भरकम फीस चुकानी पड़ती है।
चार बार सौंप चुकी है पंचायत प्रस्ताव
सरपंच प्रेम कुमार का कहना है कि स्कूल का अपग्रेड करने के लिए ग्राम पंचायत कई बार उठा चुकी है। उन्होंने बताया कि तीन प्रस्ताव शिक्षा विभाग अधिकारियों को और एक प्रस्ताव सीधे शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा को सौंपा जा चुका है। इसके बाद भी अब तक स्कूल को अपग्रेड करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाए गए हैं।
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ग्रामीण बोले- जितने स्कूल में हैं, उतने ही बच्चे जाते हैं बाहर
गांव के मिडिल स्कूल में 153 बच्चे पढ़ते हैं। ये बच्चे पहली से आठवीं कक्षा तक हैं। इसके अलावा नौंवी से बारहवीं तक के करीब 150 बच्चे समीपवर्ती गांवों के स्कूलों में दाखिला लेने को विवश हैं।
प्रेम कुमार, सरपंच
- गांव के स्कूल को अब अपग्रेड किया जाना चाहिए। छात्राओं को दूसरे गांवों के स्कूलों में जाने के लिए अधिक परेशानियां झेलनी पड़ रही। ग्राम पंचायत के प्रस्ताव सौंपने के बाद भी विभाग रुचि नहीं ले रहा।
जगदीश
- गांव के स्कूल में करीब डेढ़ सौ बच्चे पढ़ते हैं और आठवीं से आगे स्कूल में पढ़ाई न होने से इतने ही बच्चे समीपवर्ती गांवों के स्कूलों में जाने को विवश है। स्कूल को जल्द से जल्द अपग्रेड किया जाना चाहिए।
सतेंद्र
- कुछ ग्रामीण तो अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में भेज रहे हैं लेकिन सबके लिए यह संभव नहीं है। इसलिए अभिभावक बच्चों को समीपवर्ती गांवों के राजकीय स्कूलों में भेजने को विवश हैं। स्कूल अपग्रेड होने से सबको राहत मिलेगी।
दिलबाग
हमसे जो जानकारी मांगी गई थी वो उच्चाधिकारियों को भेज चुके हैं। इस समय राजकीय मिडिल स्कूल में 153 छात्र हैं और नौंवी से बारहवीं तक के 150 बच्चे दूसरे गांवों के स्कूलों में जा रहे हैं।
वेदपाल, मुख्याध्यापक, जेवली राजकीय मिडिल स्कूल
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जेवली गांव की आबादी करीब 3400 है। गांव में 1999 में मिडिल स्कूल का निर्माण किया गया था। उस समय गांव की आबादी करीब साढ़े अठारह सौ थी। गांव की आबादी बढ़ने पर भी शिक्षा सुविधाओं में इजाफा नहीं हो पाया। स्कूल में आठवीं तक की कक्षाएं इस समय लग रही हैं और स्कूल में छात्र-छात्राओं की संख्या 153 है। पिछले साल स्कूल में 170 छात्र-छात्राएं थीं। इस समय गांव से 30 बच्चे बेरला, 40 बच्चे चांदवास, 50 बच्चे बाढड़ा व 30 बच्चे डालावास स्कूल में जा रहे हैं। ये गांव जेवली से चार से पांच किलोमीटर के दायरे में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को यह दूरी पैदल ही तय करनी पड़ती है और इसके चलते सुबह और दोपहर के समय बच्चे पसीने से लथपथ होकर स्कूल और घर पहुंचते हैं। दूसरे गांव के स्कूलों में जाने से छात्राओं को ज्यादा परेशानियां झेलनी पड़ती है। ग्रामीणों ने बताया कि वाहनों की संख्या भी इन रूटों पर कम है और इसके चलते बच्चों को पैदल ही स्कूल पहुंचना पड़ता है। स्कूल मिडिल तक होने के कारण काफी ग्रामीण अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में भेजने को विवश हैं। इसके चलते उन्हें भारी-भरकम फीस चुकानी पड़ती है।
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चार बार सौंप चुकी है पंचायत प्रस्ताव
सरपंच प्रेम कुमार का कहना है कि स्कूल का अपग्रेड करने के लिए ग्राम पंचायत कई बार उठा चुकी है। उन्होंने बताया कि तीन प्रस्ताव शिक्षा विभाग अधिकारियों को और एक प्रस्ताव सीधे शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा को सौंपा जा चुका है। इसके बाद भी अब तक स्कूल को अपग्रेड करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाए गए हैं।
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ग्रामीण बोले- जितने स्कूल में हैं, उतने ही बच्चे जाते हैं बाहर
गांव के मिडिल स्कूल में 153 बच्चे पढ़ते हैं। ये बच्चे पहली से आठवीं कक्षा तक हैं। इसके अलावा नौंवी से बारहवीं तक के करीब 150 बच्चे समीपवर्ती गांवों के स्कूलों में दाखिला लेने को विवश हैं।
प्रेम कुमार, सरपंच
- गांव के स्कूल को अब अपग्रेड किया जाना चाहिए। छात्राओं को दूसरे गांवों के स्कूलों में जाने के लिए अधिक परेशानियां झेलनी पड़ रही। ग्राम पंचायत के प्रस्ताव सौंपने के बाद भी विभाग रुचि नहीं ले रहा।
जगदीश
- गांव के स्कूल में करीब डेढ़ सौ बच्चे पढ़ते हैं और आठवीं से आगे स्कूल में पढ़ाई न होने से इतने ही बच्चे समीपवर्ती गांवों के स्कूलों में जाने को विवश है। स्कूल को जल्द से जल्द अपग्रेड किया जाना चाहिए।
सतेंद्र
- कुछ ग्रामीण तो अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में भेज रहे हैं लेकिन सबके लिए यह संभव नहीं है। इसलिए अभिभावक बच्चों को समीपवर्ती गांवों के राजकीय स्कूलों में भेजने को विवश हैं। स्कूल अपग्रेड होने से सबको राहत मिलेगी।
दिलबाग
हमसे जो जानकारी मांगी गई थी वो उच्चाधिकारियों को भेज चुके हैं। इस समय राजकीय मिडिल स्कूल में 153 छात्र हैं और नौंवी से बारहवीं तक के 150 बच्चे दूसरे गांवों के स्कूलों में जा रहे हैं।
वेदपाल, मुख्याध्यापक, जेवली राजकीय मिडिल स्कूल