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राहत : एमसीएच में डेंगू की जांच के लिए सिविल अस्प्ताल से नहीं लानी पड़ेगी पर्ची
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एमसीएच परिसर में भरे पानी की मोटर लगाकर निकासी करते स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी।
- फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। जिले में डेंगू का कहर लगातार जारी है और इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने दो अहम निर्णय लिए हैं। विभाग के दोनों ही फैसले लोगों को राहत देने वाले हैं। पहला निर्णय यह है कि एमसीएच (मातृ-शिशु अस्पताल) में डेंगू जांच करवाने के लिए आशंकित मरीज को अब पर्ची की जरूरत नहीं पड़ेगी। जबकि इससे पहले जांच के लिए उन्हें तीन किलोमीटर दूर स्थित सिविल अस्पताल से इसके लिए पर्ची बनवानी पड़ती थी। वहीं, दूसरा अहम निर्णय यह है कि शहर के प्लॉटों में भरे पानी की निकासी अब स्वास्थ्य विभाग अपने स्तर पर करेगा।
13 नवंबर तक के आंकड़ों की अगर बात करें तो जिले में 364 लोग एडीज मच्छर का शिकार शिकार बन चुके हैं। अकेले नवंबर माह में 150 से अधिक केस मिल चुके हैं जोकि चिंता का विषय है। विभागीय सूत्रों के अनुसार मानसून के दौरान 80 फीसदी शहर में जलभराव की स्थिति बनी थी और उस दौरान हुई बारिश के पानी की निकासी अब तक पूरी तरह से नहीं हो पाई है। शहर के 60 से अधिक प्लॉटों में अभी भी पानी भरा हुआ है। वहीं, शहर का मातृृ-शिशु अस्पताल भी इससे अछूता नहीं है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने शनिवार को यहां मोटर रखवाकर पानी की निकासी शुरू करवा दी है जबकि शहर में विभिन्न जगहों पर प्लॉटों में भरे पानी की निकासी योजना भी तैयार कर ली है।
डेंगू नोडल अधिकारी डॉ. गौरव भारद्वाज ने बताया कि प्लॉटों में भरे पानी की जानकारी स्वास्थ्य विभाग जिला प्रशासन समेत नगर परिषद को दे चुका है। अब विभाग इंजन और मोटरें खरीदकर अपने स्तर पर प्लॉटों से पानी की निकासी करवाएगा। उन्होंने बताया कि इससे पहले लोगों पर सख्ती भी बरती जाएगी और इसी सप्ताह चालान करने की मुहिम भी चलाई जाएगी। उन्होंने बताया कि प्लॉटों में भरे पानी का मोटर या इंजन के जरिये उठान कर सीवर लाइनों में डाला जाएगा। वहीं, दूसरी ओर उन्होंने बताया कि डेंगू जांच करवाने के लिए अब लोग सिविल अस्पताल जाने की बजाय सीधे लैब में पहुंचकर अपना सैंपल दे सकते हैं।
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25 से अधिक लोग देते हैं प्रतिदिन सैंपल
डेंगू का प्रकोप बढ़ने के चलते सैंपल देने वालों की संख्या भी बढ़ गई है। डेंगू जांच मातृ-शिशु अस्पताल में की जाती है और यहां आकर मरीज को सैंपल देना पड़ता है। अब तक सिविल अस्पताल से पर्ची बनवाकर लाने के बाद ही डेंगू जांच हो रही थी और पर्ची प्रक्रिया को पूरा करने के लिए मरीज को छह किलोमीटर की भागदौड़ करनी पड़ रही थी। अब इस सप्ताह से पर्ची झंझट विभाग ने खत्म कर दिया है और मरीज सीधे यहां पहुंचकर डेंगू जांच करवा सकते हैं। इस समय प्रतिदिन करीब 25 लोग सैंपल देने पहुंच रहे हैं।
करीब पचास हजार रुपये खर्च करेगा विभाग
पानी निकासी की व्यवस्था पर स्वास्थ्य विभाग करीब 50 हजार रुपये का बजट खर्च करेगा। इसके लिए एक इंजन और करीब चार मोटरें खरीदी जाएंगी। पानी निकासी की कवायद जल्द शुरू कर दी जाएगी और इसके लिए कर्मचारियों को ट्रेनिंग भी दी जा चुकी है। इस समय विभाग ने एक मोटर एमसीएच में लगा दी है।
चालान करने के साथ खाली प्लॉटों से पानी की निकासी विभाग अब अपने स्तर पर करेगा। इसके लिए हम इंजन और मोटरें खरीदेंगे। हमने पर्ची बिना ही एमसीएच में डेंगू जांच करने का निर्णय भी लिया है, ताकि मरीजों को सिविल अस्पताल की भागदौड़ से राहत मिल सके।
डॉ. गौरव भारद्वाज, डेंगू नोडल अधिकारी
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13 नवंबर तक के आंकड़ों की अगर बात करें तो जिले में 364 लोग एडीज मच्छर का शिकार शिकार बन चुके हैं। अकेले नवंबर माह में 150 से अधिक केस मिल चुके हैं जोकि चिंता का विषय है। विभागीय सूत्रों के अनुसार मानसून के दौरान 80 फीसदी शहर में जलभराव की स्थिति बनी थी और उस दौरान हुई बारिश के पानी की निकासी अब तक पूरी तरह से नहीं हो पाई है। शहर के 60 से अधिक प्लॉटों में अभी भी पानी भरा हुआ है। वहीं, शहर का मातृृ-शिशु अस्पताल भी इससे अछूता नहीं है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने शनिवार को यहां मोटर रखवाकर पानी की निकासी शुरू करवा दी है जबकि शहर में विभिन्न जगहों पर प्लॉटों में भरे पानी की निकासी योजना भी तैयार कर ली है।
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डेंगू नोडल अधिकारी डॉ. गौरव भारद्वाज ने बताया कि प्लॉटों में भरे पानी की जानकारी स्वास्थ्य विभाग जिला प्रशासन समेत नगर परिषद को दे चुका है। अब विभाग इंजन और मोटरें खरीदकर अपने स्तर पर प्लॉटों से पानी की निकासी करवाएगा। उन्होंने बताया कि इससे पहले लोगों पर सख्ती भी बरती जाएगी और इसी सप्ताह चालान करने की मुहिम भी चलाई जाएगी। उन्होंने बताया कि प्लॉटों में भरे पानी का मोटर या इंजन के जरिये उठान कर सीवर लाइनों में डाला जाएगा। वहीं, दूसरी ओर उन्होंने बताया कि डेंगू जांच करवाने के लिए अब लोग सिविल अस्पताल जाने की बजाय सीधे लैब में पहुंचकर अपना सैंपल दे सकते हैं।
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25 से अधिक लोग देते हैं प्रतिदिन सैंपल
डेंगू का प्रकोप बढ़ने के चलते सैंपल देने वालों की संख्या भी बढ़ गई है। डेंगू जांच मातृ-शिशु अस्पताल में की जाती है और यहां आकर मरीज को सैंपल देना पड़ता है। अब तक सिविल अस्पताल से पर्ची बनवाकर लाने के बाद ही डेंगू जांच हो रही थी और पर्ची प्रक्रिया को पूरा करने के लिए मरीज को छह किलोमीटर की भागदौड़ करनी पड़ रही थी। अब इस सप्ताह से पर्ची झंझट विभाग ने खत्म कर दिया है और मरीज सीधे यहां पहुंचकर डेंगू जांच करवा सकते हैं। इस समय प्रतिदिन करीब 25 लोग सैंपल देने पहुंच रहे हैं।
करीब पचास हजार रुपये खर्च करेगा विभाग
पानी निकासी की व्यवस्था पर स्वास्थ्य विभाग करीब 50 हजार रुपये का बजट खर्च करेगा। इसके लिए एक इंजन और करीब चार मोटरें खरीदी जाएंगी। पानी निकासी की कवायद जल्द शुरू कर दी जाएगी और इसके लिए कर्मचारियों को ट्रेनिंग भी दी जा चुकी है। इस समय विभाग ने एक मोटर एमसीएच में लगा दी है।
चालान करने के साथ खाली प्लॉटों से पानी की निकासी विभाग अब अपने स्तर पर करेगा। इसके लिए हम इंजन और मोटरें खरीदेंगे। हमने पर्ची बिना ही एमसीएच में डेंगू जांच करने का निर्णय भी लिया है, ताकि मरीजों को सिविल अस्पताल की भागदौड़ से राहत मिल सके।
डॉ. गौरव भारद्वाज, डेंगू नोडल अधिकारी