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बिजली विभाग का निजीकरण किसान, मजदूर और गरीबों के हितों पर कुठाराघात : फोगाट खाप

Sat, 24 Oct 2026 01:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Sat, 24 Oct 2026 01:01 AM IST
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Privatization of the electricity department is a blow to the interests of farmers, laborers, and the poor: Phogat Khap
स्वामी दयाल धाम पर बैठक में मौजूद फोगाट खाप के पदाधिकारी। - फोटो : 1
चरखी दादरी। बिजली विभाग के निजीकरण के विरोध में सर्वजातीय फोगाट खाप भी बिजली कर्मचारियों के समर्थन में उतर आई है। शुक्रवार को बाबा स्वामी दयाल धाम पर खाप प्रधान सुरेश फोगाट की अध्यक्षता में आयोजित कार्यकारिणी और सदस्यों की बैठक में सरकार के फैसले की निंदा करते हुए इसे वापस लेने की मांग की गई। खाप ने चेतावनी दी कि मांग नहीं मानी गई तो बिजली कर्मचारियों का आंदोलन प्रदेशव्यापी जनआंदोलन बन सकता है।
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खाप प्रधान सुरेश फोगाट, सचिव कुलदीप फोगाट और एडवोकेट रविंद्र फोगाट ने कहा कि बिजली विभाग का निजीकरण किसानों, मजदूरों, गरीबों, मध्यम वर्ग, छोटे व्यापारियों और कर्मचारियों के हितों को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि निजी कंपनियां मुनाफे को प्राथमिकता देंगी जिससे आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। साथ ही, कर्मचारियों के सामने रोजगार का संकट भी खड़ा होने की आशंका है।
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खाप प्रतिनिधियों ने कहा कि बिजली जैसी आवश्यक सेवा का संचालन जनहित और जनकल्याण को ध्यान में रखकर होना चाहिए। बिजली कर्मचारी अपने हितों और विभाग को निजीकरण से बचाने के लिए आंदोलन कर रहे हैं और खाप उनकी मांगों का समर्थन करती है। उन्होंने मुख्यमंत्री, बिजली मंत्री और संबंधित अधिकारियों से फैसले पर पुनर्विचार करने तथा कर्मचारियों की मांगों पर बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की।
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खाप ने स्पष्ट किया कि सरकार को आम जनता की चिंताओं को गंभीरता से लेना चाहिए। यदि निजीकरण का फैसला वापस नहीं लिया गया तो इस मुद्दे पर कर्मचारियों के साथ अन्य वर्ग भी आंदोलन में शामिल हो सकते हैं।
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