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Charkhi Dadri News: कारीगरों और शिल्पकारों के हुनर को पहचान दिलाएगी पीएम विश्वकर्मा योजना
Sat, 03 Feb 2024 03:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sat, 03 Feb 2024 03:25 AM IST
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चरखीदादरी जिले की उपायुक्त मनदीप कौर।
चरखी दादरी। शिल्पकार और कारीगर समाज के नवनिर्माण में अपना बहुमूल्य सहयोग देते हैं। शिल्पकारों और कारीगरों के हुनर को सम्मान देते हुए केंद्र सरकार की ओर से पीएम विश्वकर्मा योजना की शुरुआत की गई है जिससे शिल्पकारों व कारीगरों के हुनर को पहचान मिलेगी।
दादरी की उपायुक्त मनदीप कौर ने बताया कि पीएम विश्वकर्मा योजना भारत की पारंपरिक कला, शिल्पकला को जीवित रखने और देश के कारीगरों, शिल्पकारों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने में सहायक होगी। पीएम विश्वकर्मा योजना का मुख्य बिंदु कारीगरों और शिल्पकारों के उत्पादों और सेवाओं की पहुंच के साथ साथ गुणवत्ता में सुधार करना है।
इसके साथ ही यह सुनिश्चित करना कि वे घरेलू और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं के साथ एकीकृत हों। यह योजना पूरे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के कारीगरों और शिल्पकारों को सहायता प्रदान करेगी। योजना के तहत 18 विभिन्न प्रकार के पारंपरिक व्यवसायों को शामिल किया गया है, जिनमें नाव बनाना, शस्त्राकार, लुहार, हथौड़ा, लोहे के औजार बनाना, ताला बनाना, सुनार, कुंभकार, मूर्तिकार, मोची, राजमिस्त्री, टोकरी, सुथार, चटाई बनाना, गुडि़या, खिलौने बनाना, बारबर, धोबी, दर्जी और मछली पकड़ने के लिए जाल बनाने का काम शामिल है।
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उन्होंने योजना के पात्र सभी कारीगरों का आह्वान किया कि वे इस योजना के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करें और लाभ उठाएं। योजना के तहत आवेदन फार्म को गांव के सरपंच और शहरी स्थानीय निकाय के पार्षद से सत्यापित किया जाएगा।
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दादरी की उपायुक्त मनदीप कौर ने बताया कि पीएम विश्वकर्मा योजना भारत की पारंपरिक कला, शिल्पकला को जीवित रखने और देश के कारीगरों, शिल्पकारों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने में सहायक होगी। पीएम विश्वकर्मा योजना का मुख्य बिंदु कारीगरों और शिल्पकारों के उत्पादों और सेवाओं की पहुंच के साथ साथ गुणवत्ता में सुधार करना है।
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इसके साथ ही यह सुनिश्चित करना कि वे घरेलू और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं के साथ एकीकृत हों। यह योजना पूरे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के कारीगरों और शिल्पकारों को सहायता प्रदान करेगी। योजना के तहत 18 विभिन्न प्रकार के पारंपरिक व्यवसायों को शामिल किया गया है, जिनमें नाव बनाना, शस्त्राकार, लुहार, हथौड़ा, लोहे के औजार बनाना, ताला बनाना, सुनार, कुंभकार, मूर्तिकार, मोची, राजमिस्त्री, टोकरी, सुथार, चटाई बनाना, गुडि़या, खिलौने बनाना, बारबर, धोबी, दर्जी और मछली पकड़ने के लिए जाल बनाने का काम शामिल है।
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उन्होंने योजना के पात्र सभी कारीगरों का आह्वान किया कि वे इस योजना के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करें और लाभ उठाएं। योजना के तहत आवेदन फार्म को गांव के सरपंच और शहरी स्थानीय निकाय के पार्षद से सत्यापित किया जाएगा।