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पावर कट से लोग परेशान, कारोबार प्रभावित
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पिछले एक सप्ताह से शहर में बिजली ट्रांसफार्मर ओवरलोड की समस्या से जूझ रहे है। जिसके चलते रात के समय एकसाथ सभी फीडरों मे करंट नहीं दौड़ पा रहा है। आलम यह है कि बिजली निगम को लोड नियंत्रित रखने के लिए पावर कट लगाने पड़ रहे हैं। रात के समय बिजली लोड 860 एंपीयर तक पहुंच जाता है जबकि शहर के रेलवे रोड पावर सब स्टेशन का हब ट्रांसफार्मर 840 एंपीयर लोड झेलने में ही सक्षम है। लोढ 840 एंपीयर से अधिक होने पर हब ट्रांसफार्मर के जलने का खतरा बढ़ जाता है और ऐसी स्थिति में निगम कर्मचारी लोड को इससे अधिक नहीं होने दे रहे हैं। दिन के समय भी ओवरलोड की समस्या के चलते पावर कट लगाने पड़ रहे हैं और इसका असर अलग-अलग मार्केट पर पड़ रहा है। इस समय बाजार का कारोबार बिजली कटों के चलते 20 से 40 फीसदी तक प्रभावित है।
मानसून में देरी के चलते बिजली लोड बढ़ने पर पावर कट भी बढ़ गए हैं। ओवरलोड होकी लाइनें ब्रेक डाउन कर रही हैं और इसके चलते डेढ़ से दो घंटे तक के अघोषित कट कॉलोनी और बाजारों में लग रहे हैं। हब ट्रांसफार्मर को जलने से बचाने के लिए निगम कर्मचारियों को चौबीसों घंटे लोड की निगरानी रखनी पड़ रही है। अगर कर्मचारी ऐसा नहीं करेंगे तो हब ट्रांसफार्मर ओवरलोड होकर जल जाएगा। इसकी कीमत करीब दो करोड़ रुपये है और चार साल पहले ही हब ट्रांसफार्मर ओवरलोड होकर जल गया था जिसके चलते तीन दिन तक शहर की बिजली आपूर्ति प्रभावित रही थी। ऐसी ही स्थिति अब बनी हुई है। कर्मचारियों ने पावर सब स्टेशन की कड़ी निगरानी रखनी पड़ रही है ताकि लोड बढ़ने पर इसमें फॉल्ट न आ जाए।
बिजली ओवरलोड के चलते छोटी से बड़ी लाइनों में फॉल्ट आ रहे हैं जिसके चलते घंटों तक बिजली आपूर्ति प्रभावित रहती है। ऐसे में शहर की बिजली आपूर्ति पिछले कुछ दिनों से चरमराई हुई है। शहर में प्रतिदिन सवा तीन लाख यूनिट तक की खपत हो रही है।
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मानसून की देरी की वजह से जहां पेयजल संकट बढ़ रहा है वहीं बिजली कट भी झेलने पड़ रहे हैं। बारिश होने पर बिजली की खपत भी कम हो जाती है और फ्रीक्वेंसी भी सामान्य हो जाती है लाइनों में लोड कम हो जाता है। इस समय गर्मी से वैसे ही पारा 44 डिग्री के आसपास बना रहता है ऐसे में बिजली की फ्रिक्वेंसी कम होने लगी हैं।
घिकाड़ा रोड मेन लाइन में ब्रेक डाउन
शुक्रवार रात करीब 10 बजे घिकाड़ा रोड मेन लाइन ब्रेक डाउन कर गई जिससे काफी एरिया में रातभर अंधेरा छाया रहा। सुबह लाइन को ठीक किया गया तब जाकर आपूर्ति बहाल हो सकी। शहर में दो मेन पावर ट्रांसफार्मर हैं तो रेलवे रोड व चरखी पावर सब स्टेशन में लगे हुए हैं। शहर के कुछ एरिया में गांव घसोला 33 केवीए सब स्टेशन से बिजली आपूर्ति की जाती है।
पावर कटों से पेयजल सप्लाई हो रही बाधित
शहर में पावर कटों से पेयजल आपूर्ति भी बाधित हो रही है। जब पानी की सप्लाई का समय होता है तब बिजली नहीं होती है ऐसे में लोग घरों में मोटर से पानी का उठान नहीं कर पाते।
कारीगर और व्यापार बोले: कामकाज प्रभावित, पावर कट के कारण समय पर नहीं दे पा रहे ऑर्डर
बढ़ई नरेश कुमार, शिव कुमार, सुनील व कारीगर भीम सिंह का कहना है कि पावर कटों की वजह उनका कामकाज प्रभावित हो जाता है। आजीविका पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ता है। बिजली निगम को पर्याप्त मात्रा में बिजली देनी चाहिए। वहीं, मोबाइल मार्केट एसोसिएशन प्रधान संदीप फौगाट का कहना है कि पावर कटों के चलते 30 फीसद तक काम प्रभावित है। बिजली कटों का असर रिपेयरिंग कार्यों पर पड़ रहा है। स्वर्णकार संघ प्रधान सुरेश सोनी ने बतारया कि बिजली कटों के चलते आभूषणों की कटाई से लेकर जुड़ाई तक का कार्य प्रभावित है और ऑर्डर समय पर नहीं दे पा रहे हैं।
रात के समय लोड ज्यादा बढ़ता है। इस वजह से पावर कट लगाना पड़ता है ताकि मेन पावर ट्रांसफार्मर में कोई नुकसान न होने पाए। वैसे निगम का शहरवासियों के लिए 24 घंटे बिजली आपूर्ति का शेड्यूल है।
-ओमबीर कालेहर, जेई, बिजली निगम
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मानसून में देरी के चलते बिजली लोड बढ़ने पर पावर कट भी बढ़ गए हैं। ओवरलोड होकी लाइनें ब्रेक डाउन कर रही हैं और इसके चलते डेढ़ से दो घंटे तक के अघोषित कट कॉलोनी और बाजारों में लग रहे हैं। हब ट्रांसफार्मर को जलने से बचाने के लिए निगम कर्मचारियों को चौबीसों घंटे लोड की निगरानी रखनी पड़ रही है। अगर कर्मचारी ऐसा नहीं करेंगे तो हब ट्रांसफार्मर ओवरलोड होकर जल जाएगा। इसकी कीमत करीब दो करोड़ रुपये है और चार साल पहले ही हब ट्रांसफार्मर ओवरलोड होकर जल गया था जिसके चलते तीन दिन तक शहर की बिजली आपूर्ति प्रभावित रही थी। ऐसी ही स्थिति अब बनी हुई है। कर्मचारियों ने पावर सब स्टेशन की कड़ी निगरानी रखनी पड़ रही है ताकि लोड बढ़ने पर इसमें फॉल्ट न आ जाए।
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बिजली ओवरलोड के चलते छोटी से बड़ी लाइनों में फॉल्ट आ रहे हैं जिसके चलते घंटों तक बिजली आपूर्ति प्रभावित रहती है। ऐसे में शहर की बिजली आपूर्ति पिछले कुछ दिनों से चरमराई हुई है। शहर में प्रतिदिन सवा तीन लाख यूनिट तक की खपत हो रही है।
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मानसून की देरी की वजह से जहां पेयजल संकट बढ़ रहा है वहीं बिजली कट भी झेलने पड़ रहे हैं। बारिश होने पर बिजली की खपत भी कम हो जाती है और फ्रीक्वेंसी भी सामान्य हो जाती है लाइनों में लोड कम हो जाता है। इस समय गर्मी से वैसे ही पारा 44 डिग्री के आसपास बना रहता है ऐसे में बिजली की फ्रिक्वेंसी कम होने लगी हैं।
घिकाड़ा रोड मेन लाइन में ब्रेक डाउन
शुक्रवार रात करीब 10 बजे घिकाड़ा रोड मेन लाइन ब्रेक डाउन कर गई जिससे काफी एरिया में रातभर अंधेरा छाया रहा। सुबह लाइन को ठीक किया गया तब जाकर आपूर्ति बहाल हो सकी। शहर में दो मेन पावर ट्रांसफार्मर हैं तो रेलवे रोड व चरखी पावर सब स्टेशन में लगे हुए हैं। शहर के कुछ एरिया में गांव घसोला 33 केवीए सब स्टेशन से बिजली आपूर्ति की जाती है।
पावर कटों से पेयजल सप्लाई हो रही बाधित
शहर में पावर कटों से पेयजल आपूर्ति भी बाधित हो रही है। जब पानी की सप्लाई का समय होता है तब बिजली नहीं होती है ऐसे में लोग घरों में मोटर से पानी का उठान नहीं कर पाते।
कारीगर और व्यापार बोले: कामकाज प्रभावित, पावर कट के कारण समय पर नहीं दे पा रहे ऑर्डर
बढ़ई नरेश कुमार, शिव कुमार, सुनील व कारीगर भीम सिंह का कहना है कि पावर कटों की वजह उनका कामकाज प्रभावित हो जाता है। आजीविका पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ता है। बिजली निगम को पर्याप्त मात्रा में बिजली देनी चाहिए। वहीं, मोबाइल मार्केट एसोसिएशन प्रधान संदीप फौगाट का कहना है कि पावर कटों के चलते 30 फीसद तक काम प्रभावित है। बिजली कटों का असर रिपेयरिंग कार्यों पर पड़ रहा है। स्वर्णकार संघ प्रधान सुरेश सोनी ने बतारया कि बिजली कटों के चलते आभूषणों की कटाई से लेकर जुड़ाई तक का कार्य प्रभावित है और ऑर्डर समय पर नहीं दे पा रहे हैं।
रात के समय लोड ज्यादा बढ़ता है। इस वजह से पावर कट लगाना पड़ता है ताकि मेन पावर ट्रांसफार्मर में कोई नुकसान न होने पाए। वैसे निगम का शहरवासियों के लिए 24 घंटे बिजली आपूर्ति का शेड्यूल है।
-ओमबीर कालेहर, जेई, बिजली निगम