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Charkhi Dadri News: दादरी में आज तक नहीं खिला कमल, बाढड़ा से एक बार जीत
Mon, 09 Sep 2024 05:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 09 Sep 2024 05:10 AM IST
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15 साल से सत्तारूढ़ दल के नेता को दादरी के मतदाताओं ने नहीं दिया मौका, बाढड़ा हलके की खोई सीट पाने की जुगत में भाजपा
- कमल के साथ हाथ भी जिले की दोनों सीटों के चुनाव में झोंकेगा पूरी ताकत
हनी सोनी
चरखी दादरी। भाजपा विभिन्न राज्यों के साथ केंद्र में सरकार बना रही है। प्रदेश में भी गत चुनाव में गठबंधन के जरिये सरकार बनी थी। इसमें भाजपा की हिस्सेदारी एकतरफा थी। वहीं, दूसरी ओर दादरी हलके में मोदी फैक्टर के बावजूद आज तक कमल नहीं खिला है। वर्ष 1966 से 2019 तक हुए 13 चुनाव के आंकड़े इसकी बानगी हैं। वहीं, इस अवधि में बाढड़ा में भी एक बार ही पार्टी प्रत्याशी विजयी हुआ है।
दादरी हलके पर कांग्रेस की खोई सत्ता पाने के लिए नजर है जबकि भाजपा पहली बार यहां अपने प्रत्याशी को जिताकर कमल खिलाना चाहती है। हालांकि, आठ सितंबर शाम पांच बजे तक भी कांग्रेस ने दादरी हलके से प्रत्याशी घोषित नहीं किया। जजपा पूर्व विधायक राजदीप फौगाट और भाजपा पूर्व मंत्री सतपाल सांगवान के बेटे पूर्व जेलर सुनील सांगवान को अपना प्रत्याशी घोषित कर चुकी है।फिलहाल दो ही उम्मीदवार मैदान में हैं जबकि इनेलो व आम आदमी पार्टी ने प्रत्याशी तय नहीं किए हैं।
13 चुनावों के इतिहास पर नजर डालें तो दादरी हलके की सीट चार बार कांग्रेस के खाते में गई है। दो बार लोकदल का उम्मीदवार और एक बार इनेलो का उम्मीदवार विजयी बना है। एक चुनाव में दादरी सीट हजकां के खाते में गई। इस सीट से एक बार ही निर्दलीय उम्मीदवार विजेता बना है जबकि महिला को विधायक बनने का मौका अब तक नहीं मिला है।
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- बाढड़ा हलके की सीट तीन बार गई कांग्रेस के खाते में
बाढड़ा सीट की अगर बात करें तो तीन बार कांग्रेस के खाते में गई है। लोकदल, इनेलो और हविपा को दो-दो चुनावों में इस सीट से जीत मिली है। भाजपा और जजपा के खाते में एक-एक बार यह सीट आई है।
दादरी हलके से कब व कौन बना विजेता और किसे हराया
वर्ष - विजेता उम्मीदवार- पार्टी- उपविजेता
1967- गणपतराय- इंडियन नेशनल कांग्रेस- हरनाम सिंह
1968- गणपतराय- इंडियन नेशनल कांग्रेस- हरनाम सिंह
1972- गणपतराय- नेशनल कांग्रेस आर्गेनाइजेशन- हरनाम सिंह
1977- हुकम सिंह- जनता पार्टी- गणपतराय-
1982- हुकम सिंह- लोकदल- जगजीत सिंह-
1987- हुकम सिंह- लोकदल- रिशाल सिंह
1991- धर्मपाल सिंह- हविपा- जगजीत सिंह
1996-सतपाल सांगवान- हविपा- जगजीत सिंह
2000- जगजीत सिंह- एनसीपी- शकुंतला
2005- नृपेंद्र सांगवान- इंडियन नेशनल कांग्रेस- सतपाल सांगवान
2009- सतपाल सांगवान-एचजेसीबीएल- राजदीप फौगाट
2014- राजदीप फौगाट- इनेलो- सोमबीर सांगवान
2019- सोमबीर सांगवान- निर्दलीय- सतपाल सांगवान
- बाढड़ा में 13 चुनावों में ये रही विजेता व उप विजेता की स्थिति
वर्ष - विजेता उम्मीदवार- पार्टी- उपविजेता
1967- अजीत सिंह- इंडियन नेशनल कांग्रेस- चंद्रावती
1968- अमीर सिंह- वीएचपी- अत्तर सिंह
1972- लज्जा रानी- इंडियन नेशनल कांग्रेस- अत्तर सिंह
1977- रणसिंह मान-जनता पार्टी- अत्तर सिंह
1982- चंद्रावती- लोकदल- अत्तर सिंह
1987- रणसिंह- लोकदल- अत्तर मांढ़ी
1991- अत्तर सिंह- हविपा- दलबीर
1996- नृपेंद्र मांढ़ी- हविपा- रविंद्र
2000- रणबीर सिंह- इनेलो- नृपेंद्र सिंह
2005- धर्मबीर सिंह- कांग्रेस- रणबीर सिंह
2009- रघबीर छिल्लर- इनेलो- रणबीर महेंद्रा
2014- सुखविंद्र मांढ़ी- भाजपा- रणबीर महेंद्रा
2019- नैना चौटाला-जजपा- सुखविंद्र मांढ़ी
फोटो 08
चरखी दादरी शहर का परशुराम चौक। संवाद
फोटो 09
बाढड़ा का क्रांतिकारी चौक। संवाद
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- कमल के साथ हाथ भी जिले की दोनों सीटों के चुनाव में झोंकेगा पूरी ताकत
हनी सोनी
चरखी दादरी। भाजपा विभिन्न राज्यों के साथ केंद्र में सरकार बना रही है। प्रदेश में भी गत चुनाव में गठबंधन के जरिये सरकार बनी थी। इसमें भाजपा की हिस्सेदारी एकतरफा थी। वहीं, दूसरी ओर दादरी हलके में मोदी फैक्टर के बावजूद आज तक कमल नहीं खिला है। वर्ष 1966 से 2019 तक हुए 13 चुनाव के आंकड़े इसकी बानगी हैं। वहीं, इस अवधि में बाढड़ा में भी एक बार ही पार्टी प्रत्याशी विजयी हुआ है।
दादरी हलके पर कांग्रेस की खोई सत्ता पाने के लिए नजर है जबकि भाजपा पहली बार यहां अपने प्रत्याशी को जिताकर कमल खिलाना चाहती है। हालांकि, आठ सितंबर शाम पांच बजे तक भी कांग्रेस ने दादरी हलके से प्रत्याशी घोषित नहीं किया। जजपा पूर्व विधायक राजदीप फौगाट और भाजपा पूर्व मंत्री सतपाल सांगवान के बेटे पूर्व जेलर सुनील सांगवान को अपना प्रत्याशी घोषित कर चुकी है।फिलहाल दो ही उम्मीदवार मैदान में हैं जबकि इनेलो व आम आदमी पार्टी ने प्रत्याशी तय नहीं किए हैं।
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13 चुनावों के इतिहास पर नजर डालें तो दादरी हलके की सीट चार बार कांग्रेस के खाते में गई है। दो बार लोकदल का उम्मीदवार और एक बार इनेलो का उम्मीदवार विजयी बना है। एक चुनाव में दादरी सीट हजकां के खाते में गई। इस सीट से एक बार ही निर्दलीय उम्मीदवार विजेता बना है जबकि महिला को विधायक बनने का मौका अब तक नहीं मिला है।
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- बाढड़ा हलके की सीट तीन बार गई कांग्रेस के खाते में
बाढड़ा सीट की अगर बात करें तो तीन बार कांग्रेस के खाते में गई है। लोकदल, इनेलो और हविपा को दो-दो चुनावों में इस सीट से जीत मिली है। भाजपा और जजपा के खाते में एक-एक बार यह सीट आई है।
दादरी हलके से कब व कौन बना विजेता और किसे हराया
वर्ष - विजेता उम्मीदवार- पार्टी- उपविजेता
1967- गणपतराय- इंडियन नेशनल कांग्रेस- हरनाम सिंह
1968- गणपतराय- इंडियन नेशनल कांग्रेस- हरनाम सिंह
1972- गणपतराय- नेशनल कांग्रेस आर्गेनाइजेशन- हरनाम सिंह
1977- हुकम सिंह- जनता पार्टी- गणपतराय-
1982- हुकम सिंह- लोकदल- जगजीत सिंह-
1987- हुकम सिंह- लोकदल- रिशाल सिंह
1991- धर्मपाल सिंह- हविपा- जगजीत सिंह
1996-सतपाल सांगवान- हविपा- जगजीत सिंह
2000- जगजीत सिंह- एनसीपी- शकुंतला
2005- नृपेंद्र सांगवान- इंडियन नेशनल कांग्रेस- सतपाल सांगवान
2009- सतपाल सांगवान-एचजेसीबीएल- राजदीप फौगाट
2014- राजदीप फौगाट- इनेलो- सोमबीर सांगवान
2019- सोमबीर सांगवान- निर्दलीय- सतपाल सांगवान
- बाढड़ा में 13 चुनावों में ये रही विजेता व उप विजेता की स्थिति
वर्ष - विजेता उम्मीदवार- पार्टी- उपविजेता
1967- अजीत सिंह- इंडियन नेशनल कांग्रेस- चंद्रावती
1968- अमीर सिंह- वीएचपी- अत्तर सिंह
1972- लज्जा रानी- इंडियन नेशनल कांग्रेस- अत्तर सिंह
1977- रणसिंह मान-जनता पार्टी- अत्तर सिंह
1982- चंद्रावती- लोकदल- अत्तर सिंह
1987- रणसिंह- लोकदल- अत्तर मांढ़ी
1991- अत्तर सिंह- हविपा- दलबीर
1996- नृपेंद्र मांढ़ी- हविपा- रविंद्र
2000- रणबीर सिंह- इनेलो- नृपेंद्र सिंह
2005- धर्मबीर सिंह- कांग्रेस- रणबीर सिंह
2009- रघबीर छिल्लर- इनेलो- रणबीर महेंद्रा
2014- सुखविंद्र मांढ़ी- भाजपा- रणबीर महेंद्रा
2019- नैना चौटाला-जजपा- सुखविंद्र मांढ़ी
फोटो 08
चरखी दादरी शहर का परशुराम चौक। संवाद
फोटो 09
बाढड़ा का क्रांतिकारी चौक। संवाद