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जिले में कहीं नहीं टिड्डी दल का प्रकोप, खेतों में ग्रासहॉपर मिला : कृषि विभाग
Sat, 02 Aug 2025 01:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sat, 02 Aug 2025 01:06 AM IST
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टिकान गांव के खेत में बाजरा की फसल का जायजा लेने पहुंची कृषि विभाग की टीम। स्रोत: जनसंपर्क विभ
फोटो 09
टिकान गांव के खेत में बाजरे की फसल का जायजा लेने पहुंची कृषि विभाग की टीम। स्रोत : जनसंपर्क विभाग
- कृषि विभाग के अधिकारियों ने शुक्रवार को किया घसोला, कपूरी व टिकाण गांव के खेतों का निरीक्षण, किसानों को ग्रासहॉपर का प्रकोप खत्म करने की विधि बताई
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। जिले के किसी भी क्षेत्र के खेतों में टिड्डी दल का प्रकोप नहीं है। किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है। जिले के किसानों की शिकायत पर शुक्रवार को कृषि विभाग के अधिकारियों ने खेतों का दौरा करने के बाद यह जानकारी दी।
कृषि विभाग से डाॅ. सज्जन सिंह ने डाॅ. विकास को साथ लेकर घसोला, कपूरी व टिकाण गांव के खेतों में पहुंचकर बाजरा व अन्य फसलों का निरीक्षण किया। इस दौरान बाजरे के खेतों का सर्वे करने पर पाया कि बाजरा में टिड्डी का प्रकोप नहीं है। खेतों में ग्रासहॉपर मिला है। इसे आम भाषा में फड़का भी कहते हैं।
फड़का फसल को छोटी अवस्था से लेकर पूरी वृद्धि तक तक हानि पहुंचाता है। ये पत्तों के किनारे से खाते हैं, जिससे भारी प्रकोप की अवस्था में केवल पत्तों की मध्य शिखाएं और कभी-कभी तो केवल पतला तना ही रह जाता है।
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विभागीय अधिकारियों ने किसानों को बताया कि इसकी रोकथाम के लिए 500 मिलीलीटर मैलाथियान 50 ईसी का छिड़काव 250 लीटर पानी में प्रति एकड़ करें। छिड़काव करते समय किसान हाथों में दस्ताने पहनें और मुंह को भी ढक लें। आंखों पर चश्मा भी पहनें। दवा के छिड़काव के 7-10 दिन तक फसल को पशुओं के चारे के रूप में प्रयोग न करें।
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टिकान गांव के खेत में बाजरे की फसल का जायजा लेने पहुंची कृषि विभाग की टीम। स्रोत : जनसंपर्क विभाग
- कृषि विभाग के अधिकारियों ने शुक्रवार को किया घसोला, कपूरी व टिकाण गांव के खेतों का निरीक्षण, किसानों को ग्रासहॉपर का प्रकोप खत्म करने की विधि बताई
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। जिले के किसी भी क्षेत्र के खेतों में टिड्डी दल का प्रकोप नहीं है। किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है। जिले के किसानों की शिकायत पर शुक्रवार को कृषि विभाग के अधिकारियों ने खेतों का दौरा करने के बाद यह जानकारी दी।
कृषि विभाग से डाॅ. सज्जन सिंह ने डाॅ. विकास को साथ लेकर घसोला, कपूरी व टिकाण गांव के खेतों में पहुंचकर बाजरा व अन्य फसलों का निरीक्षण किया। इस दौरान बाजरे के खेतों का सर्वे करने पर पाया कि बाजरा में टिड्डी का प्रकोप नहीं है। खेतों में ग्रासहॉपर मिला है। इसे आम भाषा में फड़का भी कहते हैं।
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फड़का फसल को छोटी अवस्था से लेकर पूरी वृद्धि तक तक हानि पहुंचाता है। ये पत्तों के किनारे से खाते हैं, जिससे भारी प्रकोप की अवस्था में केवल पत्तों की मध्य शिखाएं और कभी-कभी तो केवल पतला तना ही रह जाता है।
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विभागीय अधिकारियों ने किसानों को बताया कि इसकी रोकथाम के लिए 500 मिलीलीटर मैलाथियान 50 ईसी का छिड़काव 250 लीटर पानी में प्रति एकड़ करें। छिड़काव करते समय किसान हाथों में दस्ताने पहनें और मुंह को भी ढक लें। आंखों पर चश्मा भी पहनें। दवा के छिड़काव के 7-10 दिन तक फसल को पशुओं के चारे के रूप में प्रयोग न करें।