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Charkhi Dadri News: आजादी के आंदोलन के नायक थे निहाल सिंह तक्षक

Fri, 26 Jan 2024 02:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Fri, 26 Jan 2024 02:14 AM IST
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Nihal Singh Takshak was the hero of the freedom movement
निहाल सिंह तक्षक।
चरखी दादरी। गांव भागवी में अमर सिंह और सीरिया देवी के घर जन्मे महान स्वतंत्रता सेनानी, जींद रियासत प्रजा मंडल के संस्थापक अध्यक्ष, पेप्सू की प्रथम निर्वाचित सरकार में वित्त मंत्री, भारतीय संविधान निर्मात्री सभा के सदस्य रहे निहाल सिंह को जनवरी 1947 में संविधान सभा का सदस्य बनाया गया था। वे 36 वर्ष की उम्र में संविधान सभा के सदस्य बने। उन्हें आजादी के आंदोलन का नायक भी कहा जाता है।
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रिटायर्ड आईएएस जयवंती श्योकंद ने बताया कि देश की आजादी के समय जींद राज्य (रियासत) भारतीय संघ का हिस्सा नहीं था और चरखी दादरी उस समय जींद राज्य का जिला होता था। उस समय निहाल सिंह के नेतृत्व में जींद को भारतीय संघ में मिलाने के लिए चरखी दादरी के किला मैदान में करीब छह महीने तक जींद की रियासत को भारत में मिलाने के लिए राजा के खिलाफ आंदोलन किया।
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आंदोलन में उनके साथ बनारसीदास, लहरी सिंह, दल सिंह, राजा महताब सहित इलाके के करीब 35,000 लोगों ने दिन-रात आंदोलन किया। उस समय राजा जींद ने निहाल सिंह तक्षक को मुख्यमंत्री बनाने की पेशकश भी की थी। निहाल सिंह के प्रयासों से 15 मार्च, 1948 को जींद का विलय भारत संघ में हुआ जिसके लिए भारतीय संसद ने सरदार पटेल और निहाल सिंह को हीरो ऑफ मर्जर मूवमेंट के खिताब से नवाजा गया।
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जयवंती श्योकंद ने बताया कि निहाल सिंह ने शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए इस क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया। निहाल सिंह ने प्रजामंडल आंदोलन, आर्य समाज आंदोलन, शिक्षा आंदोलन का सफल नेतृत्व किया। दादरी के विकास के लिए उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य आदि जैसे अहम मुद्दों की आवाज उठाई और कई आंदोलन लड़े। उसी की बदौलत चरखी दादरी इलाके में आर्य महाविद्यालय और ग्रामीण क्षेत्र में बेसिक शिक्षा के संस्थान खोले जाने की पहल हुई थी। निहाल सिंह तक्षक राजनेता के साथ ही बड़े समाज सुधारक भी थे। वे आर्यसमाज के बड़े कर्मयोगी थे।

- हमारे लिए गौरव की बात : अधिवक्ता संजीव
भारतीय संविधान सभा का सदस्य होना गौरव की बात है। उनके पौत्र संजीव तक्षक का कहना है कि दुर्भाग्य यह रहा कि हरियाणा की सभी सरकारों ने निहाल सिंह के योगदान की अनदेखी की है। निहाल सिंह के पौत्र अधिवक्ता संजीव तक्षक ने निहाल सिंह तक्षक ट्रस्ट बनाया और उन्हीं के पदचिह्नों पर चलते हुए ट्रस्ट जरूरतमंद, पीड़ित एवं असहाय व्यक्तियों की सेवा की है।
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